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भागवत कथा में भगवान कृष्ण का किया गुणगान
Updated Sat, 11 Nov 2017 12:34 AM IST
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भागवत कथा में भगवान कृष्ण का किया गुणगान
रायबरेली। जीआईसी ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन शुक्रवार को कथा व्यास राजन जी महाराज ने भक्त सुदामा चरित्र परीक्षित मोक्ष एवं कृष्ण भगवान के परमधाम गमन की कथा का रसपान कराया। कथा के अंतिम दिन श्रोताओं को भारी भीड़ जुटी।
कथा व्यास ने कहा कि उन्होंने कहा कि सुदामा बहुत ही गरीब थे फि र भी वह अपने सखा भगवान द्वारिकाधीश से कुछ मांगने नहीं जाते थे। जगतपति श्रीकृष्ण से अपनी मित्रता का जिक्र उन्होंने कभी अपनी धर्मपत्नी से भी नहीं किया। सुदामा जी निष्काम भक्ति के प्रतीक हैं। इसलिए न तो सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण से कुछ मांगा और न ही भगवान ने सुदामा जी को ही कुछ दिया। उन्होंने बताया कि सुदामा से मिलने के बाद भगवान श्री कृष्ण के आंसू नहीं थम रहे थे। वह अपने बाल सखा की दीनहीन दशा देख कर व्याकुल हो गए थे। कथा के दौरान कलाकारों द्वारा सुदामा जी की भव्य झांकी सजाई गई। बीच-बीच में मधुर संगीतमय भजनों पर श्रोता झूमते रहे। कथा व्यास ने आगे कहा कि भागवत कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा के प्रताप से ही राजा परीक्षित को सातवें दिन ही मोक्ष की मिला था। भागवत कथा भक्त और भगवान की कथा है। भक्ति मार्ग और उससे मिलने वाले पुण्य फ ल मनुष्य को धर्म, आस्था और आध्यात्मिकता से जोड़ते हैं। इस दौरान उन्होंने परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई और साथ ही कथा से मिलने वाले पुण्य फ ल के विषय में अपनी बात रखी।
कथा के अंत में भगवान के परमधाम गमन का मार्मिक वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि बलराम ने पहले अपने धाम के लिए प्रस्थान किया। उसके बाद भगवान ने इस लोक को छोड़कर अपने धाम के लिए गमन किया। उनके गमन के साथ ही यदुवंशियों का भी पतन शुरू हो गया। वे शराब में डूब गए। शराब पतन का मार्ग प्रशस्त करती है और गंगा जल उद्धार का मार्ग दिखाती है। कथा व्यास ने कहा कि जिस परिवार में नशे जैसी बुराइयां रहती हैं, वहां पुण्य फ ल का भी नाश होता है। कथा व्यास ने सभी से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि कलयुग में यह सबसे पावन कथा है। इसके श्रवण मात्र से श्रद्घालुओं को पुण्य मिलता है। मुख्य आयोजक हरिश श्रीवास्तव, जलजा श्रीवास्तव, एओपी शुक्ला, एसएन यादव, उपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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रायबरेली। जीआईसी ग्राउंड में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन शुक्रवार को कथा व्यास राजन जी महाराज ने भक्त सुदामा चरित्र परीक्षित मोक्ष एवं कृष्ण भगवान के परमधाम गमन की कथा का रसपान कराया। कथा के अंतिम दिन श्रोताओं को भारी भीड़ जुटी।
कथा व्यास ने कहा कि उन्होंने कहा कि सुदामा बहुत ही गरीब थे फि र भी वह अपने सखा भगवान द्वारिकाधीश से कुछ मांगने नहीं जाते थे। जगतपति श्रीकृष्ण से अपनी मित्रता का जिक्र उन्होंने कभी अपनी धर्मपत्नी से भी नहीं किया। सुदामा जी निष्काम भक्ति के प्रतीक हैं। इसलिए न तो सुदामा ने भगवान श्रीकृष्ण से कुछ मांगा और न ही भगवान ने सुदामा जी को ही कुछ दिया। उन्होंने बताया कि सुदामा से मिलने के बाद भगवान श्री कृष्ण के आंसू नहीं थम रहे थे। वह अपने बाल सखा की दीनहीन दशा देख कर व्याकुल हो गए थे। कथा के दौरान कलाकारों द्वारा सुदामा जी की भव्य झांकी सजाई गई। बीच-बीच में मधुर संगीतमय भजनों पर श्रोता झूमते रहे। कथा व्यास ने आगे कहा कि भागवत कथा सुनने से पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा के प्रताप से ही राजा परीक्षित को सातवें दिन ही मोक्ष की मिला था। भागवत कथा भक्त और भगवान की कथा है। भक्ति मार्ग और उससे मिलने वाले पुण्य फ ल मनुष्य को धर्म, आस्था और आध्यात्मिकता से जोड़ते हैं। इस दौरान उन्होंने परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई और साथ ही कथा से मिलने वाले पुण्य फ ल के विषय में अपनी बात रखी।
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कथा के अंत में भगवान के परमधाम गमन का मार्मिक वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि बलराम ने पहले अपने धाम के लिए प्रस्थान किया। उसके बाद भगवान ने इस लोक को छोड़कर अपने धाम के लिए गमन किया। उनके गमन के साथ ही यदुवंशियों का भी पतन शुरू हो गया। वे शराब में डूब गए। शराब पतन का मार्ग प्रशस्त करती है और गंगा जल उद्धार का मार्ग दिखाती है। कथा व्यास ने कहा कि जिस परिवार में नशे जैसी बुराइयां रहती हैं, वहां पुण्य फ ल का भी नाश होता है। कथा व्यास ने सभी से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा कि कलयुग में यह सबसे पावन कथा है। इसके श्रवण मात्र से श्रद्घालुओं को पुण्य मिलता है। मुख्य आयोजक हरिश श्रीवास्तव, जलजा श्रीवास्तव, एओपी शुक्ला, एसएन यादव, उपेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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