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शिक्षा ही जीवन का आधार, महिलाएं बने स्वावलंबी
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सिंहपुर (रायबरेली)। शिक्षा ही जीवन का आधार है। इसलिए जरूरी है कि शिक्षा हासिल करके स्वावलंबी बनें। अब महिलाएं किसी से कमजोर नहीं हैं। बस उन्हें आगे बढ़ने और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हिम्मत चाहिए।
अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत सोमवार को सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के संत पथिक इंटर कॉलेज महेशपुर में नारी शिक्षा को लेकर आयोजित परिचर्चा में महिलाओं ने कुछ इसी अंदाज में अपनी बात रखी। सभी ने कहा कि लड़का-लड़की एक समान हैं। बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
माता-पिता को चाहिए कि बालिकाओं को भी अपने बेटे की तरह समझें। बालिकाओं की शिक्षा दीक्षा पर जोर दें, जिससे उनका विकास हो सके और वह स्वावलंबी बन सकें।
- रियाज अहमद, खंड विकास अधिकारी, सिंहपुर
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए। आज देश में अनेक क्षेत्रों में महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं। मां-बाप को भी अपनी बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी मदद करनी चाहिए
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- श्रीकांत त्रिपाठी, प्रबंधक
बेहतर समाज के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है और बालिकाओं को स्वावलंबी बनाना माता-पिता का कर्तव्य है।
- नीतू सिंह, शिक्षिका
बालिकाओं की शिक्षा से एक नहीं, बल्कि दो घरों में खुशियां रहती हैं और उनके बच्चों में संस्कार उत्पन्न होते हैं।
- कुलदीप तिवारी, शिक्षक
बेटियों की पढ़ाई के लिए परिवारीजन आगे नहीं आते हैं, यह ठीक नहीं है। बेटियां शिक्षित होंगी, तभी अपने अधिकारों की जानकारी करके स्वयं के पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। - अंशिका, छात्रा
बेटियों की तरक्की से ही देश का विकास संभव है। बेटियां अपने को कमजोर न समझें और आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षित हों।
- काजल, छात्रा
अभिभावकों को अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाना चाहिए। बेटियां शिक्षित होंगी, तभी आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में सहयोग करेंगी।
- कीर्ति, छात्रा
बेटियों का सम्मान करने में ही समाज की बेहतरी होगी। बेटियों का अपमान हमें किसी कीमत पर नहीं करना चाहिए। बेटियां आत्मनिर्भर बनें।
- नंदनी, छात्रा
समाज के निर्माण और देश के विकास में बेटियों का बहुत बड़ा योगदान है। बेटियां आज किसी से पीछे नहीं हैं। बस उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। - नाजमीन, छात्रा
बेटियों पर जुल्म किए जाते हैं। बेटियां जुल्म सह लेती हैं, लेकिन कहीं पर शिकायत नहीं करती हैं। बेटियां इस मिथक को तोड़ें और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएं। - पिंकी, छात्रा
बेटियां किसी से कमजोर नहीं हैं। बस उन्हें अपनी शक्ति पहचाननी चाहिए और तरक्की की दिशा में कार्य करना चाहिए। - पूजा त्रिवेदी, छात्रा
बेटियां अपने आप को कमजोर न समझें। अपने ऊपर होने वाले जुल्म के खिलाफ बिना किसी भय के आवाज उठाएं। - ब्यूटी सिंह, छात्रा
बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हों तो समाज को मजबूरन उनका सम्मान करना पड़ेगा। बेटियां आज किसी से पीछे नहीं हैं।
- शिवानी, छात्र
आज बेटियां कहीं भी पीछे नहीं हैं। सब जगह आगे हैं। जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो ऑटो रिक्शा चलाने से भी नहीं पीछे हटतीं। - संगीता, छात्रा
बेटियां अगर मन से कमजोर नहीं हैं तो शारीरिक कमजोरी उसके तरक्की में बाधा नहीं बनती है। बेटियां शिक्षित हों। - सबीहा, छात्रा
बेटियां कमजोर नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी तरक्की की पताका लहरा रही हैं। बेटियों का सम्मान करना चाहिए। - हिमांशू, छात्रा
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अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत सोमवार को सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के संत पथिक इंटर कॉलेज महेशपुर में नारी शिक्षा को लेकर आयोजित परिचर्चा में महिलाओं ने कुछ इसी अंदाज में अपनी बात रखी। सभी ने कहा कि लड़का-लड़की एक समान हैं। बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं करना चाहिए।
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माता-पिता को चाहिए कि बालिकाओं को भी अपने बेटे की तरह समझें। बालिकाओं की शिक्षा दीक्षा पर जोर दें, जिससे उनका विकास हो सके और वह स्वावलंबी बन सकें।
- रियाज अहमद, खंड विकास अधिकारी, सिंहपुर
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना चाहिए। आज देश में अनेक क्षेत्रों में महिलाएं अपना परचम लहरा रही हैं। मां-बाप को भी अपनी बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी मदद करनी चाहिए
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- श्रीकांत त्रिपाठी, प्रबंधक
बेहतर समाज के लिए शिक्षा बहुत ही जरूरी है और बालिकाओं को स्वावलंबी बनाना माता-पिता का कर्तव्य है।
- नीतू सिंह, शिक्षिका
बालिकाओं की शिक्षा से एक नहीं, बल्कि दो घरों में खुशियां रहती हैं और उनके बच्चों में संस्कार उत्पन्न होते हैं।
- कुलदीप तिवारी, शिक्षक
बेटियों की पढ़ाई के लिए परिवारीजन आगे नहीं आते हैं, यह ठीक नहीं है। बेटियां शिक्षित होंगी, तभी अपने अधिकारों की जानकारी करके स्वयं के पैरों पर खड़ी हो सकेंगी। - अंशिका, छात्रा
बेटियों की तरक्की से ही देश का विकास संभव है। बेटियां अपने को कमजोर न समझें और आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षित हों।
- काजल, छात्रा
अभिभावकों को अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाना चाहिए। बेटियां शिक्षित होंगी, तभी आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में सहयोग करेंगी।
- कीर्ति, छात्रा
बेटियों का सम्मान करने में ही समाज की बेहतरी होगी। बेटियों का अपमान हमें किसी कीमत पर नहीं करना चाहिए। बेटियां आत्मनिर्भर बनें।
- नंदनी, छात्रा
समाज के निर्माण और देश के विकास में बेटियों का बहुत बड़ा योगदान है। बेटियां आज किसी से पीछे नहीं हैं। बस उन्हें अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। - नाजमीन, छात्रा
बेटियों पर जुल्म किए जाते हैं। बेटियां जुल्म सह लेती हैं, लेकिन कहीं पर शिकायत नहीं करती हैं। बेटियां इस मिथक को तोड़ें और जुल्म के खिलाफ आवाज उठाएं। - पिंकी, छात्रा
बेटियां किसी से कमजोर नहीं हैं। बस उन्हें अपनी शक्ति पहचाननी चाहिए और तरक्की की दिशा में कार्य करना चाहिए। - पूजा त्रिवेदी, छात्रा
बेटियां अपने आप को कमजोर न समझें। अपने ऊपर होने वाले जुल्म के खिलाफ बिना किसी भय के आवाज उठाएं। - ब्यूटी सिंह, छात्रा
बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हों तो समाज को मजबूरन उनका सम्मान करना पड़ेगा। बेटियां आज किसी से पीछे नहीं हैं।
- शिवानी, छात्र
आज बेटियां कहीं भी पीछे नहीं हैं। सब जगह आगे हैं। जिम्मेदारियों का बोझ परिवार पर पड़ा तो ऑटो रिक्शा चलाने से भी नहीं पीछे हटतीं। - संगीता, छात्रा
बेटियां अगर मन से कमजोर नहीं हैं तो शारीरिक कमजोरी उसके तरक्की में बाधा नहीं बनती है। बेटियां शिक्षित हों। - सबीहा, छात्रा
बेटियां कमजोर नहीं हैं। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी तरक्की की पताका लहरा रही हैं। बेटियों का सम्मान करना चाहिए। - हिमांशू, छात्रा