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दिल्ली में इलाज कराकर लौटा एनटीपीसी कर्मचारी
Updated Wed, 22 Nov 2017 12:47 AM IST
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एनटीपीसी हादसा : बोला अमृत, मौत का तांडव देख हो गया था बेहोश
रायबरेली। अचानक तेज धमाका और राख के गुबार से छाए अंधेरे के बीच बचाओ-बचाओ की मची चीख-पुकार से एक पल तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। तभी मुझे भी अपने शरीर में जलन का अहसास हुआ। हर तरफ भगदड़ और अफरातफरी का मंजर था। मौत तांडव कर रही थी। ये सब देखकर मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया।
यह कहना है एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के घायल श्रमिक अमृतलाल का। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद पहले उसे लखनऊ और फिर दिल्ली सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया था। अब वह स्वस्थ होकर अपने गांव फरीदपुर लौट आया है। तीन पुत्रियों और एक पुत्र के पिता अमृतलाल ने बताया कि एनटीपीसी ने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। समय पर उसे हवाई जहाज से इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया, तभी तो उसकी जिंदगी बच गई। अब वह अच्छा हो गया है और फिर से उसी दुर्घटनाग्रस्त इकाई में काम करना चाहता है। वह जल्दी से जल्दी छठवीं इकाई से विद्युत उत्पादन होते देखना चाहता है।
एनटीपीसी ऊंचाहार के प्रबंधक जनसंपर्क अनिल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक अमृतलाल के बेटे आशीष ने भी कहा है कि वह भी बड़ा होकर एनटीपीसी में काम करना चाहता है। उसके पिता के साथ हुए हादसे को देखकर पूरा परिवार सदमे में था। अगर कोई अनहोनी हो जाती तो हम लोग केवल अनाथ ही नहीं होते, बल्कि सभी का जीवन अंधकारमय हो जाता, पढ़ाई लिखाई बंद हो जाती, बहनों की शादी कैसे होती, लेकिन अब सब ठीक है।
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रायबरेली। अचानक तेज धमाका और राख के गुबार से छाए अंधेरे के बीच बचाओ-बचाओ की मची चीख-पुकार से एक पल तो कुछ समझ में ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। तभी मुझे भी अपने शरीर में जलन का अहसास हुआ। हर तरफ भगदड़ और अफरातफरी का मंजर था। मौत तांडव कर रही थी। ये सब देखकर मैं बेहोश हो गया। जब होश आया तो खुद को अस्पताल में पाया।
यह कहना है एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के घायल श्रमिक अमृतलाल का। हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद पहले उसे लखनऊ और फिर दिल्ली सफदरगंज अस्पताल ले जाया गया था। अब वह स्वस्थ होकर अपने गांव फरीदपुर लौट आया है। तीन पुत्रियों और एक पुत्र के पिता अमृतलाल ने बताया कि एनटीपीसी ने इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। समय पर उसे हवाई जहाज से इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया, तभी तो उसकी जिंदगी बच गई। अब वह अच्छा हो गया है और फिर से उसी दुर्घटनाग्रस्त इकाई में काम करना चाहता है। वह जल्दी से जल्दी छठवीं इकाई से विद्युत उत्पादन होते देखना चाहता है।
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एनटीपीसी ऊंचाहार के प्रबंधक जनसंपर्क अनिल कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक अमृतलाल के बेटे आशीष ने भी कहा है कि वह भी बड़ा होकर एनटीपीसी में काम करना चाहता है। उसके पिता के साथ हुए हादसे को देखकर पूरा परिवार सदमे में था। अगर कोई अनहोनी हो जाती तो हम लोग केवल अनाथ ही नहीं होते, बल्कि सभी का जीवन अंधकारमय हो जाता, पढ़ाई लिखाई बंद हो जाती, बहनों की शादी कैसे होती, लेकिन अब सब ठीक है।
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