{"_id":"5b7711ce42c792462d1338b9","slug":"161534529998-raebareli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"2833 केंद्रों पर बच्चों को नहीं दिया जा रहा हाटकुक्ड","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2833 केंद्रों पर बच्चों को नहीं दिया जा रहा हाटकुक्ड
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:33 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रायबरेली। परिषदीय स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के लिए भी पका-पकाया भोजन बनाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। कागजों पर ही 2833 आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड योजना का संचालन हो रहा है। वजह यह है कि शासन से एक महीने पहले ही बजट मिल गया था, लेकिन बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने अब तक ग्राम पंचायतों को यह धनराशि नहीं उपलब्ध कराई है। ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधान भोजन बनवाने को राजी नहीं हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मनमानी का खामियाजा केंद्रों पर आने वाले बच्चों को भोगना पड़ रहा है।
जिले में 2833 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले बच्चों को पका पकाया भोजन देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि पहले भी हाटकुक्ड प्लान संचालित था, लेकिन मनमानी के कारण उसे बंद कर दिया गया था। अब हाटकुक्ड योजना के तहत भोजन प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर बनवाना है।
इसके लिए प्रति बच्चा प्रधानों को साढे़ चार रुपये का बजट भी जिले को मिल चुका है। जिले में एक महीने का बजट आ चुका है, लेकिन अब तक यह बजट ग्राम प्रधानों को नहीं दिया गया है। बीती 10 अगस्त से विभाग ने जिले में योजना तो शुरू करा दी है, लेकिन केंद्रों पर आने वाले बच्चों को बजट के अभाव में भोजन नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
केंद्रों पर पहुंच रहा नमकीन दलिया का खाली पैकेट
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड के साथ ही मीठी और नमकीन दलिया के साथ ही प्रिमिक्सि लड्डू भी दिया जा रहा है। खास बात यह है कि कई केंद्रों पर नमकीन दलिया और मीठी दलिया के खाली पैकेट पहुंच रहे हैं। पैकेट सीलबंद हैं, लेकिन अंदर कुछ भी भरा नहीं हैं। कई ब्लॉकों से इस तरह की शिकायतें आ रही हैं।
ग्राम प्रधान व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संयुक्त खोते खुलवाए जा रहे हैं। 80 प्रतिशत खाते खुल गए हैं। जल्द ही हाटकुक्ड का धन खातों में भेजा जाएगा। प्रधानों से योजना संचालित करने का अनुरोध किया गया है। जल्द ही खातों में बजट पहुंच जाएगा।
- कन्हैया लाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी
विज्ञापन
जिले में 2833 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर आने वाले बच्चों को पका पकाया भोजन देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि पहले भी हाटकुक्ड प्लान संचालित था, लेकिन मनमानी के कारण उसे बंद कर दिया गया था। अब हाटकुक्ड योजना के तहत भोजन प्राथमिक स्कूलों में एमडीएम की तर्ज पर बनवाना है।
विज्ञापन
इसके लिए प्रति बच्चा प्रधानों को साढे़ चार रुपये का बजट भी जिले को मिल चुका है। जिले में एक महीने का बजट आ चुका है, लेकिन अब तक यह बजट ग्राम प्रधानों को नहीं दिया गया है। बीती 10 अगस्त से विभाग ने जिले में योजना तो शुरू करा दी है, लेकिन केंद्रों पर आने वाले बच्चों को बजट के अभाव में भोजन नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
केंद्रों पर पहुंच रहा नमकीन दलिया का खाली पैकेट
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड के साथ ही मीठी और नमकीन दलिया के साथ ही प्रिमिक्सि लड्डू भी दिया जा रहा है। खास बात यह है कि कई केंद्रों पर नमकीन दलिया और मीठी दलिया के खाली पैकेट पहुंच रहे हैं। पैकेट सीलबंद हैं, लेकिन अंदर कुछ भी भरा नहीं हैं। कई ब्लॉकों से इस तरह की शिकायतें आ रही हैं।
ग्राम प्रधान व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के संयुक्त खोते खुलवाए जा रहे हैं। 80 प्रतिशत खाते खुल गए हैं। जल्द ही हाटकुक्ड का धन खातों में भेजा जाएगा। प्रधानों से योजना संचालित करने का अनुरोध किया गया है। जल्द ही खातों में बजट पहुंच जाएगा।
- कन्हैया लाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी