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चश्मदीद की जुबानी, हादसे की कहानी
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:20 AM IST
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कहीं अफसरों ने लाशों को ठिकाने तो नहीं लगा दिया?
रोहनियां (रायबरेली)। एनटीपीसी हादसे के वक्त यूनिट में काम कर रहा पूरे तुराबी मजरे मोखरा गांव निवासी बलराम चिल्ला-चिल्लाकर मीडिया के सामने हादसे की सच्चाई बयां कर रहा था। कोई उसकी बात पर यकीन करे न करे, लेकिन उसकी बातों से सवाल बहुत सारे खड़े होते हैं। वह हादसे के बाद परियोजना में मची चीख-पुकार का चश्मदीद गवाह है। उसका दावा है कि घटना के वक्त लगभग 500 मजदूर काम कर रहे थे। इसमें लगभग 150 श्रमिक घायल हुए हैं। बलराम के मुताबिक, मरने वालों की संख्या जो भी बताई जा रही है, वह सही नहीं है। कहीं अफसरों ने लाशों को ठिकाने तो नहीं लगा दिया है।
बलराम का कहना है कि परियोजना के अधिकारी लगभग 26 लोगों के मरने की ही बात कर रहे हैं। अगर अधिकारियों की बात सही है तो अभी तक काम करने वाले सारे मजदूरों की पूरी जानकारी सामने क्यों नहीं आई। काम करने वाले मजदूरों की सूची रही होगी। मरने वालों की संख्या लगभग 26 और घायलों की संख्या लगभग 150 बताई जा रही है। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी यूनिट में महज लगभग 180 लोग तो काम कर नहीं रहे होंगे? अगर ज्यादा लोग काम कर रहे थे। तो बाकी लोगों का पता अब तक क्यों नहीं चल पाया है? कहीं एनटीपीसी प्रबंधन हादसे में मरने वालों की संख्या कम करने चक्कर में लाशों को ठिकाने लगाने में तो नहीं जुटा है। बलराम का आरोप है कि घटना के बाद अधिकारियों ने सही सलामत बचे मजदूरों को भगा दिया था और कई लाशों को ठिकाने लगा दिया। उसका कहना है कि उसने खुद 15 शवों को बाहर निकाला और उसके बाद अधिकारियों ने उसे भगा दिया कि कहीं सच्चाई न उजागर हो जाए।
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रोहनियां (रायबरेली)। एनटीपीसी हादसे के वक्त यूनिट में काम कर रहा पूरे तुराबी मजरे मोखरा गांव निवासी बलराम चिल्ला-चिल्लाकर मीडिया के सामने हादसे की सच्चाई बयां कर रहा था। कोई उसकी बात पर यकीन करे न करे, लेकिन उसकी बातों से सवाल बहुत सारे खड़े होते हैं। वह हादसे के बाद परियोजना में मची चीख-पुकार का चश्मदीद गवाह है। उसका दावा है कि घटना के वक्त लगभग 500 मजदूर काम कर रहे थे। इसमें लगभग 150 श्रमिक घायल हुए हैं। बलराम के मुताबिक, मरने वालों की संख्या जो भी बताई जा रही है, वह सही नहीं है। कहीं अफसरों ने लाशों को ठिकाने तो नहीं लगा दिया है।
बलराम का कहना है कि परियोजना के अधिकारी लगभग 26 लोगों के मरने की ही बात कर रहे हैं। अगर अधिकारियों की बात सही है तो अभी तक काम करने वाले सारे मजदूरों की पूरी जानकारी सामने क्यों नहीं आई। काम करने वाले मजदूरों की सूची रही होगी। मरने वालों की संख्या लगभग 26 और घायलों की संख्या लगभग 150 बताई जा रही है। अब सवाल यह है कि इतनी बड़ी यूनिट में महज लगभग 180 लोग तो काम कर नहीं रहे होंगे? अगर ज्यादा लोग काम कर रहे थे। तो बाकी लोगों का पता अब तक क्यों नहीं चल पाया है? कहीं एनटीपीसी प्रबंधन हादसे में मरने वालों की संख्या कम करने चक्कर में लाशों को ठिकाने लगाने में तो नहीं जुटा है। बलराम का आरोप है कि घटना के बाद अधिकारियों ने सही सलामत बचे मजदूरों को भगा दिया था और कई लाशों को ठिकाने लगा दिया। उसका कहना है कि उसने खुद 15 शवों को बाहर निकाला और उसके बाद अधिकारियों ने उसे भगा दिया कि कहीं सच्चाई न उजागर हो जाए।
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