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40 की क्षमता, पर ठूंस दिए 225 मवेशी, मर रहे भूखे
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40 की क्षमता, पर ठूंस दिए 225 मवेशी
रायबरेली। भले ही छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए गौशाला का निर्माण कराया गया है, लेकिन यह सब ढकोसला साबित हो रहा है। राही ब्लॉक क्षेत्र में नारेतीर मजरे लोधवारी गांव में गौशाला का निर्माण कराया गया है।
एक टिन रखी है, जिसमें 40 मवेशियों को रखा जा सकता हैं, लेकिन मौजूदा समय में 225 मवेशी ठूंसे गए है। इससे आधे से ज्यादा मवेशी तो कड़ी धूप में बाहर बैठे रहते हैं। खाने के नाम पर केवल पानी पिलाया जाता है।
भूसा कई महीनों से नहीं है। कई मवेशी बीमार हैं, जो एक जगह बैठे है। न वह उठ पाते हैं न ही चल पाते हैं। करीब 28 लाख रुपये की लागत से बनने से इस गौशाला का हाल बेहाल है। अभी तक एक टिनशेड व खाने के लिए हौद का निर्माण कराया गया है।
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ढाई महीने से यहां मवेशियों को रखा जा रहा है। देखरेख के लिए दो श्रमिक जगन्नाथ और लक्ष्मी शंकर को रखा गया है। खास बात यह है कि टिनशेड के नीचे 40 मवेशी रह सकते हैं, जबकि मौजूदा समय में 225 मवेशी रखे गए हैं। बाकी मवेशी धूप में खड़े रहते हैं।
इनकी दुर्दशा देखने वाला कोई नहीं है। चारा नहीं मिलने से मवेशियों की हालत दयनीय है। चमड़ी सिकुड़ गई है, हड्डियां दिखने लगी है। खाने के नाम पर केवल सबमर्सिबल चलाकर पानी पिलाया जाता है।
यहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह छह मवेशियों की मौत हो चुकी है। अभी भी कई मवेशी बीमार हैं। चारा काफी दिनों से नहीं है। इसलिए केवल पानी पिलाया जाता है। हम लोगों की मजदूरी भी नहीं मिली है।
टैक्स कलेक्टर, जिला पंचायत इंद्रजीत सिंह का दावा है कि गोशाला में भूसे की कोई कमी नहीं है। अभी भी एक सप्ताह के लिए भूसा रखा है। चारा खरीदने के लिए पशुपालन विभाग से बजट की मांग की गई है। कोई मवेशी नहीं मर रहा है। मौजूदा समय में 192 मवेशी हैं।
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रायबरेली। भले ही छुट्टा मवेशियों को रखने के लिए गौशाला का निर्माण कराया गया है, लेकिन यह सब ढकोसला साबित हो रहा है। राही ब्लॉक क्षेत्र में नारेतीर मजरे लोधवारी गांव में गौशाला का निर्माण कराया गया है।
एक टिन रखी है, जिसमें 40 मवेशियों को रखा जा सकता हैं, लेकिन मौजूदा समय में 225 मवेशी ठूंसे गए है। इससे आधे से ज्यादा मवेशी तो कड़ी धूप में बाहर बैठे रहते हैं। खाने के नाम पर केवल पानी पिलाया जाता है।
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भूसा कई महीनों से नहीं है। कई मवेशी बीमार हैं, जो एक जगह बैठे है। न वह उठ पाते हैं न ही चल पाते हैं। करीब 28 लाख रुपये की लागत से बनने से इस गौशाला का हाल बेहाल है। अभी तक एक टिनशेड व खाने के लिए हौद का निर्माण कराया गया है।
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ढाई महीने से यहां मवेशियों को रखा जा रहा है। देखरेख के लिए दो श्रमिक जगन्नाथ और लक्ष्मी शंकर को रखा गया है। खास बात यह है कि टिनशेड के नीचे 40 मवेशी रह सकते हैं, जबकि मौजूदा समय में 225 मवेशी रखे गए हैं। बाकी मवेशी धूप में खड़े रहते हैं।
इनकी दुर्दशा देखने वाला कोई नहीं है। चारा नहीं मिलने से मवेशियों की हालत दयनीय है। चमड़ी सिकुड़ गई है, हड्डियां दिखने लगी है। खाने के नाम पर केवल सबमर्सिबल चलाकर पानी पिलाया जाता है।
यहां तैनात कर्मचारियों ने बताया कि पिछले सप्ताह छह मवेशियों की मौत हो चुकी है। अभी भी कई मवेशी बीमार हैं। चारा काफी दिनों से नहीं है। इसलिए केवल पानी पिलाया जाता है। हम लोगों की मजदूरी भी नहीं मिली है।
टैक्स कलेक्टर, जिला पंचायत इंद्रजीत सिंह का दावा है कि गोशाला में भूसे की कोई कमी नहीं है। अभी भी एक सप्ताह के लिए भूसा रखा है। चारा खरीदने के लिए पशुपालन विभाग से बजट की मांग की गई है। कोई मवेशी नहीं मर रहा है। मौजूदा समय में 192 मवेशी हैं।