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एम्स को झटका, किसानों का जमीन देने से इंकार
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रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विस्तार को झटका लगा है।
जमीन के अधिग्रहण के लिए शासन से 10 करोड़ का बजट मिलने के बाद भी किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
करीब 52 एकड़ जमीन के लिए करीब छह महीने से किसानों से सुलह-समझौते की प्रक्रिया पर विराम लग गया है। किसानों की ओर सर्किल रेट व नौकरी या पांच गुना मुआवजे की शर्त नामंजूर कर दी गई है। सरकार व किसानों में एक भी शर्त पर बात नहीं बन सकी है।
शहर से सटे दरियापुर में एम्स संचालित है। अस्थायी भवन में ओपीडी के साथ ही जुलाई से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के भवन के निर्माण का काम भी चल रहा है।
एम्स को पूरी तरह से संचालित कराने के लिए 52 एकड़ भूमि के लिए जिला प्रशासन और दरियापुर, मधुपुरी आदि गांवों के किसानों से करीब छह महीने से बात चल रही थी।
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किसानों ने सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को एम्स में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा नौकरी न दिला पाने पर सर्किल रेट का चार गुने मुआवजे की मांग की।
महानिदेशक (चिकित्सा व शिक्षा) के स्तर से अर्जन निकाय कमेटी और किसानों के बीच कई चरणों में बात हुई। सहायक निदेशक (चिकित्सा व शिक्षा) की मौजूदगी में जिला प्रशासन के अधिकारियों व किसानों के बीच जमीन को लेकर अंतिम बार बातचीत हुई, लेकिन किसान शर्तें पूरी होने के बाद ही जमीन देने पर अड़े रहे।
ऐसे में कमेटी ने किसानों की दोनों शर्तों को पूरा करने में असमर्थता जताई। शर्तें पूरी न हो पाने के कारण किसानों की जमीन लेने की प्रक्रिया पर विराम लग गया है।
गंगा एक्सप्रेसस की 26 हेक्टेयर जमीन लेने की तैयारी
किसानों से बात न बनने के बाद अब जिला प्रशासन एम्स और रेलवे लाइन के बीच स्थित गंगा एक्सप्रेसस फैक्टरी की 26 हेक्टेयर जमीन को लेने के प्रयास में जुट गया है।
इस फैक्टरी में पूर्व में सीमेंट की चादरें बनती थी, लेकिन कई वर्षों से फैक्ट्री बंद है। मुंबई निवासी फैक्टरी मालिक से बात शुरू की गई है।
हालांकि जिला प्रशासन को सकारात्मक रुख मिला है। हालांकि यह जमीन मिलने के बाद एम्स को करीब सौ बीघा जमीन मिल जाएगी। ऐसा होने के बाद प्रशासन को किसानों की जमीन की जरूरत नहीं होगी।
जमीन के लिए प्रशासन को चाहिए 55 करोड़
एम्स की जमीन के लिए जिला प्रशासन के बाद पिछले कई वर्षों से आठ करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। गुरुवार के बजट में 10 करोड़ मिलने के बाद अब 18 करोड़ हो गए हैं, लेकिन पूरी जमीन लेने के लिए करीब 55 करोड़ रुपयों की जरूरत है। हालांकि बात बन जाने के बाद शासन से और धन की डिमांड की जाएगी।
किसानों से एम्स के लिए 52 एकड़ की जमीन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। किसान एम्स में नौकरी और चार गुना तक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि उनकी शर्तें पूरी हो पानी संभव नहीं हैं। किसानों से बात न बनने पर गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जमीन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
राम अभिलाष, एडीएम (प्रशासन)
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जमीन के अधिग्रहण के लिए शासन से 10 करोड़ का बजट मिलने के बाद भी किसान अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं।
करीब 52 एकड़ जमीन के लिए करीब छह महीने से किसानों से सुलह-समझौते की प्रक्रिया पर विराम लग गया है। किसानों की ओर सर्किल रेट व नौकरी या पांच गुना मुआवजे की शर्त नामंजूर कर दी गई है। सरकार व किसानों में एक भी शर्त पर बात नहीं बन सकी है।
शहर से सटे दरियापुर में एम्स संचालित है। अस्थायी भवन में ओपीडी के साथ ही जुलाई से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू कराने के लिए मेडिकल कॉलेज के भवन के निर्माण का काम भी चल रहा है।
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एम्स को पूरी तरह से संचालित कराने के लिए 52 एकड़ भूमि के लिए जिला प्रशासन और दरियापुर, मधुपुरी आदि गांवों के किसानों से करीब छह महीने से बात चल रही थी।
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किसानों ने सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को एम्स में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव रखा। इसके अलावा नौकरी न दिला पाने पर सर्किल रेट का चार गुने मुआवजे की मांग की।
महानिदेशक (चिकित्सा व शिक्षा) के स्तर से अर्जन निकाय कमेटी और किसानों के बीच कई चरणों में बात हुई। सहायक निदेशक (चिकित्सा व शिक्षा) की मौजूदगी में जिला प्रशासन के अधिकारियों व किसानों के बीच जमीन को लेकर अंतिम बार बातचीत हुई, लेकिन किसान शर्तें पूरी होने के बाद ही जमीन देने पर अड़े रहे।
ऐसे में कमेटी ने किसानों की दोनों शर्तों को पूरा करने में असमर्थता जताई। शर्तें पूरी न हो पाने के कारण किसानों की जमीन लेने की प्रक्रिया पर विराम लग गया है।
गंगा एक्सप्रेसस की 26 हेक्टेयर जमीन लेने की तैयारी
किसानों से बात न बनने के बाद अब जिला प्रशासन एम्स और रेलवे लाइन के बीच स्थित गंगा एक्सप्रेसस फैक्टरी की 26 हेक्टेयर जमीन को लेने के प्रयास में जुट गया है।
इस फैक्टरी में पूर्व में सीमेंट की चादरें बनती थी, लेकिन कई वर्षों से फैक्ट्री बंद है। मुंबई निवासी फैक्टरी मालिक से बात शुरू की गई है।
हालांकि जिला प्रशासन को सकारात्मक रुख मिला है। हालांकि यह जमीन मिलने के बाद एम्स को करीब सौ बीघा जमीन मिल जाएगी। ऐसा होने के बाद प्रशासन को किसानों की जमीन की जरूरत नहीं होगी।
जमीन के लिए प्रशासन को चाहिए 55 करोड़
एम्स की जमीन के लिए जिला प्रशासन के बाद पिछले कई वर्षों से आठ करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। गुरुवार के बजट में 10 करोड़ मिलने के बाद अब 18 करोड़ हो गए हैं, लेकिन पूरी जमीन लेने के लिए करीब 55 करोड़ रुपयों की जरूरत है। हालांकि बात बन जाने के बाद शासन से और धन की डिमांड की जाएगी।
किसानों से एम्स के लिए 52 एकड़ की जमीन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। किसान एम्स में नौकरी और चार गुना तक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। हालांकि उनकी शर्तें पूरी हो पानी संभव नहीं हैं। किसानों से बात न बनने पर गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जमीन मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
राम अभिलाष, एडीएम (प्रशासन)