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सात दिन बाद सामने आया गनपत
Updated Wed, 08 Nov 2017 12:34 AM IST
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सात दिन बाद सामने आया गनपत
रायबरेली। एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के बाद सात दिन बाद एक श्रमिक सामने आया है, जो घटना के वक्त मौजूद था। ऊपर वाले का शुक्र है कि आज गनपत अपनों के बीच है। हादसे की बात पूछते ही गनपत का रूह कांप उठता है। उसका यही कहना है कि ऊपर वाले का शुक्र रहा कि उसकी जिंदगी बच गई। हां शरीर के कुछ हिस्से मामूली रुप से झुलस गए।
ऊंचाहार तहसील क्षेत्र के महिमापुर मजरे गंगौली निवासी गनपत भी एनटीपीसी ऊंचाहार में मजदूरी करता था। गनपत के मुताबिक हादसे वाले दिन यूनिट में करीब काफी संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे थे। इसी दौैरान तेज धमाका हुआ और फिर वहां पर भगदड़ मच गई। किसी तरह वहां से भागकर जान बचाई, लेकिन शरीर के कई स्थानों पर झुलस गया। उसका कहना है कि उसे एनटीपीसी ले जाया गया, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया है। गनपत का कहना है कि एनटीपीसी में हुआ हादसा अफसरों की लापरवाही की चूक है। यदि चूक न हुई होती तो शायद यह दर्दनाक हादसा न होता। ऊपर वाले का शुक्र है कि जान बच गई और हम अपनों के बीच हैं। उस दर्दनाक हादसे की तस्वीर आज भी उसके आंखों के सामने नाचती रहती है। शायद यह तस्वीर कभी भूल पाऊं।
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रायबरेली। एनटीपीसी ऊंचाहार में हुए हादसे के बाद सात दिन बाद एक श्रमिक सामने आया है, जो घटना के वक्त मौजूद था। ऊपर वाले का शुक्र है कि आज गनपत अपनों के बीच है। हादसे की बात पूछते ही गनपत का रूह कांप उठता है। उसका यही कहना है कि ऊपर वाले का शुक्र रहा कि उसकी जिंदगी बच गई। हां शरीर के कुछ हिस्से मामूली रुप से झुलस गए।
ऊंचाहार तहसील क्षेत्र के महिमापुर मजरे गंगौली निवासी गनपत भी एनटीपीसी ऊंचाहार में मजदूरी करता था। गनपत के मुताबिक हादसे वाले दिन यूनिट में करीब काफी संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे थे। इसी दौैरान तेज धमाका हुआ और फिर वहां पर भगदड़ मच गई। किसी तरह वहां से भागकर जान बचाई, लेकिन शरीर के कई स्थानों पर झुलस गया। उसका कहना है कि उसे एनटीपीसी ले जाया गया, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया है। गनपत का कहना है कि एनटीपीसी में हुआ हादसा अफसरों की लापरवाही की चूक है। यदि चूक न हुई होती तो शायद यह दर्दनाक हादसा न होता। ऊपर वाले का शुक्र है कि जान बच गई और हम अपनों के बीच हैं। उस दर्दनाक हादसे की तस्वीर आज भी उसके आंखों के सामने नाचती रहती है। शायद यह तस्वीर कभी भूल पाऊं।
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