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Pratapgarh News: 15 सालों में क्यों नहीं शुरू हो पाया एसटीपी...जानने पहुंची कमेटी
Mon, 04 Sep 2023 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
Updated Mon, 04 Sep 2023 11:41 PM IST
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एनजीटी की ओर से गठित ओवरसाइट कमेटी ने एसटीपी व शहर में सीवर लाइन का किया निरीक्षण
एनजीटी चेयरपर्सन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर गठित ओवरसाइट कमेटी ने सोमवार को सई नदी के तट पर बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और शहर की सीवर लाइन का निरीक्षण किया। 15 साल पहले बनी यह योजना अब तक धरातल पर न उतर पाई।
सई नदी के तट पर करोड़ों की लागत से स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सीवर लाइन से न जुड़ पाने के कारण नालों का गंदा पानी नदी में गिरता था। नदी प्रदूषित होता रही। इसे लेकर अष्टभुजानगर के रहने वाले अधिवक्ता टीएस सिंह ने एनजीटी में वाद दायर किया। इसके बाद एनजीटी चेयरपर्सन के आदेश से एसटीपी की जांच के लिए ओवरसाइट कमेटी का गठन हुआ।
सोमवार को कमेटी के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौर, सदस्य अनंत सिंह व एनजीटी के अधिकारियों ने अजीत नगर स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया। करीब तीन घंटे तक गहनता से छानबीन करने के बाद टीम रामलीला मैदान स्थित वेटलैंड देखने पहुंची। जहां शहर के गंदे पानी को शोधित करने की प्रक्रिया देखी। शहर में नई सीवर लाइन बिछाने के साथ ही घरों में कनेक्शन देने की सलाह दी। पूरे ईश्वरनाथ में बनने वाले 13 एमएलडी वाले एसटीपी की प्रगति जानी।
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शाम को टीम वापस लौट गई। टीम के चेयरमैन अपनी रिपोर्ट एनजीटी चेयरपर्सन को सौपेंगे। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रायबरेली व जल निगम की टीम के साथ नगर पालिका के ईओ भी मौजूद रहे।
गौरतलब हो कि एनजीटी में वाद दायर होने के बाद जल निगम प्रयागराज ने शहर में गिरने वाले नालों की टेपिंग कर किसी तरह एसटीपी से जोड़ तो दिया गया। लेकिन पूरी तरह से योजना शुरू नहीं हो पाई।
इनसेट
सड़क बनाई, गमलोंं में लगाए फूल
ओवरसाइट कमेटी के निरीक्षण की खबर के बाद जलनिगम व नगर पालिका दिन-रात कर्मचारियों को लगाकर तैयारी कराते रहे। एसटीपी तक तक जाने वाली बदहाल सड़क दुरुस्त कराई गई। लाल कारपेट का सहारा लिया गया। गमलों में फूल भी रखे गए थे। ताकि कमेटी खुश रहे।
इनसेट
पैसे की व्यवस्था हो तो नगर पालिका संभाले जिम्मा
जलनिगम द्वारा संचालित एसटीपी अभी तक नगर पालिका को हैंडओवर क्यों नहीं हो पाई। कमेटी के इस सवाल पर ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि संचालन में हर माह करीब 20 से 25 लाख रुपये खर्च आएगा। इस धनराशि के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
साइड स्टोरी
विकास की गति...बिना चले ही खराब हो गए थे उपकरण
प्रतापगढ़। दस सालों तक एसटीपी बंद रहने के कारण उसके कई उपकरण खराब हो गए, जिन पर करोड़ों खर्च कर दोबारा दुरुस्त किया।
सीवेज निस्तारण की योजना वर्ष 2007 में स्वीकृत हुई थी। बजट वित्तीय वर्ष 2009-10 में जारी हुआ था। 18.20 करोड़ से शहर में 12.47 किमी सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाना था। एसटीपी का निर्माण वर्ष 2010 में शुरू कराया गया। दिसंबर 2011 में बनकर तैयार हो गया। निर्माण के करीब दस साल बाद भी एसटीपी ठप पड़ा रहा। इससे उसके कई उपकरण खराब हो गए थे, जिनकी मरम्मत सहित एसटीपी को चलाने के लिए 3.54 करोड़ रुपये की डिमांड की गई। धनराशि मिलने के बाद जनवरी 2023 में मरम्मत का काम पूरा हो सका। संवाद
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एनजीटी चेयरपर्सन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर गठित ओवरसाइट कमेटी ने सोमवार को सई नदी के तट पर बने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और शहर की सीवर लाइन का निरीक्षण किया। 15 साल पहले बनी यह योजना अब तक धरातल पर न उतर पाई।
सई नदी के तट पर करोड़ों की लागत से स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सीवर लाइन से न जुड़ पाने के कारण नालों का गंदा पानी नदी में गिरता था। नदी प्रदूषित होता रही। इसे लेकर अष्टभुजानगर के रहने वाले अधिवक्ता टीएस सिंह ने एनजीटी में वाद दायर किया। इसके बाद एनजीटी चेयरपर्सन के आदेश से एसटीपी की जांच के लिए ओवरसाइट कमेटी का गठन हुआ।
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सोमवार को कमेटी के चेयरमैन सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौर, सदस्य अनंत सिंह व एनजीटी के अधिकारियों ने अजीत नगर स्थित एसटीपी का निरीक्षण किया। करीब तीन घंटे तक गहनता से छानबीन करने के बाद टीम रामलीला मैदान स्थित वेटलैंड देखने पहुंची। जहां शहर के गंदे पानी को शोधित करने की प्रक्रिया देखी। शहर में नई सीवर लाइन बिछाने के साथ ही घरों में कनेक्शन देने की सलाह दी। पूरे ईश्वरनाथ में बनने वाले 13 एमएलडी वाले एसटीपी की प्रगति जानी।
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शाम को टीम वापस लौट गई। टीम के चेयरमैन अपनी रिपोर्ट एनजीटी चेयरपर्सन को सौपेंगे। इस मौके पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रायबरेली व जल निगम की टीम के साथ नगर पालिका के ईओ भी मौजूद रहे।
गौरतलब हो कि एनजीटी में वाद दायर होने के बाद जल निगम प्रयागराज ने शहर में गिरने वाले नालों की टेपिंग कर किसी तरह एसटीपी से जोड़ तो दिया गया। लेकिन पूरी तरह से योजना शुरू नहीं हो पाई।
इनसेट
सड़क बनाई, गमलोंं में लगाए फूल
ओवरसाइट कमेटी के निरीक्षण की खबर के बाद जलनिगम व नगर पालिका दिन-रात कर्मचारियों को लगाकर तैयारी कराते रहे। एसटीपी तक तक जाने वाली बदहाल सड़क दुरुस्त कराई गई। लाल कारपेट का सहारा लिया गया। गमलों में फूल भी रखे गए थे। ताकि कमेटी खुश रहे।
इनसेट
पैसे की व्यवस्था हो तो नगर पालिका संभाले जिम्मा
जलनिगम द्वारा संचालित एसटीपी अभी तक नगर पालिका को हैंडओवर क्यों नहीं हो पाई। कमेटी के इस सवाल पर ईओ राम अचल कुरील ने बताया कि संचालन में हर माह करीब 20 से 25 लाख रुपये खर्च आएगा। इस धनराशि के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलने के बाद ही हैंडओवर की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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विकास की गति...बिना चले ही खराब हो गए थे उपकरण
प्रतापगढ़। दस सालों तक एसटीपी बंद रहने के कारण उसके कई उपकरण खराब हो गए, जिन पर करोड़ों खर्च कर दोबारा दुरुस्त किया।
सीवेज निस्तारण की योजना वर्ष 2007 में स्वीकृत हुई थी। बजट वित्तीय वर्ष 2009-10 में जारी हुआ था। 18.20 करोड़ से शहर में 12.47 किमी सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जाना था। एसटीपी का निर्माण वर्ष 2010 में शुरू कराया गया। दिसंबर 2011 में बनकर तैयार हो गया। निर्माण के करीब दस साल बाद भी एसटीपी ठप पड़ा रहा। इससे उसके कई उपकरण खराब हो गए थे, जिनकी मरम्मत सहित एसटीपी को चलाने के लिए 3.54 करोड़ रुपये की डिमांड की गई। धनराशि मिलने के बाद जनवरी 2023 में मरम्मत का काम पूरा हो सका। संवाद