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अंग्रेजी सेना को धूल चटाने वाले की यादों को बिसराया
Sun, 08 Aug 2021 12:39 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 12:39 AM IST
सार
देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने 1942 में रेलवे लाइन उखाड़कर अंग्रेजी सेना को लेकर जाने वाली ट्रेन पलट दी थी। ट्रेन पलटने वाले क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजी हुकूमत ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की थी।
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विश्वनाथगंज रेलवे के समीप पूरे खरगराय स्थित रेलवे पुल। संवाद
- फोटो : PRATAPGARH
विस्तार
देश को आजाद कराने के लिए क्रांतिकारियों ने 1942 में रेलवे लाइन उखाड़कर अंग्रेजी सेना को लेकर जाने वाली ट्रेन पलट दी थी। ट्रेन पलटने वाले क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजी हुकूमत ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की थी। आजादी की जंग में हुए इस अहम घटनाक्रम को बिसरा दिया गया। यहां इस घटना का जिक्र तक नहीं है।
आजादी की लड़ाई के दौरान वर्ष 1942 में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिया था। जिले में क्रांतिकारियों के तेवर से ब्रिटिश शासन के माथे पर चिंता की लकीरें उभर गई थीं। मानधाता थाना क्षेत्र के विश्वनाथगंज रेलवे स्टेशन के दक्षिण व बाजार के पश्चिम दिशा में स्थित पूरेखरगराय में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सेना की ट्रेन पलटने के लिए कमर कस ली। यह ट्रेन प्रयागराज से सुल्तानपुर जा रही थी। क्रांतिकारियों के खिलाफ दमन की कार्रवाई के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर सेना भेजी गई थी। जिसे रोकने के लिए आजादी के दीवानों ने रेलवे लाइन उखाड़कर अंग्रेजी सैनिकों को लेकर आ रही ट्रेन को पलटा दिया था। इस काम को अंजाम देने में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू जयनारायण सिंह, शिवनारायण शुक्ला, उमापति तिवारी प्रमुख शामिल रहे। कई दिनों तक रेलवे लाइनों को उखाड़ने वालों की तलाश में अंग्रेजी सेना भटकती रही।
हालांकि कुछ दिनों बाद सभी क्रांतिकारियों को अंग्रेजी सेना ने चिह्नित कर लिया। पहले शिवनारायण शुक्ला पकड़े गए। बाद में आजादी के दीवाने जयनारायण व उमापति तिवारी को भी अंग्रेजी सेना पकड़कर ले गई। अंग्रेजों ने गिरफ्तार किए गए शिवनारायण शुक्ला के पैरों में लाठी बांधकर ऊपर हाथ बांध दिया था। जलती हुई आग पर शिवनारायण को नंगे पैर रस्सी के सहारे तवा पर खड़ा कर दिया। वह पैर तक नहीं मोड़ नहीं पा रहे थे। उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा, ताकि अन्य क्रांतिकारियों के नाम पता चल सकें। वह यातना सहते रहे, लेकिन जुबान नहीं खोली। मुकदमे की सुनवाई के दौरान क्रांतिकारी जयनारायण व शिवनारायण शुक्ला, उमापति तिवारी समेत अन्य लोगों अजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।
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हालांकि सभी को सुनाई गई सजा के विरोध में लखनऊ में अपील की गई। बताते हैं कि शिवनारायण शुक्ला के भाई पैरवी के सिलसिले में लखनऊ गए थे। लौटते समय उनकी मौत हो गई। उस समय सभी क्रांतिकारी जेल में सजा काट रहे थे। इस बात की जानकारी होने पर उन्हें निराशा हुई। हालांकि कुछ दिनों बाद सभी को जमानत मिल गई।
देश आजाद होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अंग्रेजी सेना को धूल चटाने वाले क्रांतिकारियों की याद में विश्वनाथगंज को पर्यटन या फिर किसी स्मारक का स्वरूप दिया जाएगा। मगर ऐसा नहीं हो क्रांतिकारियों की याद के रूप में विकसित करने की हो पहल विश्वनाथगंज के पूरेखरगराय से गुजरी रेलवे लाइन क्रांतिकारियों की यादें समेटे हुए है। यहां पर बने पुल के नीचे छिपकर क्रांतिकारी ट्रैक उखाड़ने के लिए एक-एक कर लाइन पर जाते थे। इलाके के दानपाल सिंह, जेबी सिंह, नरसिंह बहादुर, रामपाल यादव, समर बहादुर सिंह आदि बताते हैं कि इस स्थल को क्रांतिकारियों की याद के रूप में स्थापति करने की पहल होनी चाहिए।
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आजादी की लड़ाई के दौरान वर्ष 1942 में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत की नाक में दम कर दिया था। जिले में क्रांतिकारियों के तेवर से ब्रिटिश शासन के माथे पर चिंता की लकीरें उभर गई थीं। मानधाता थाना क्षेत्र के विश्वनाथगंज रेलवे स्टेशन के दक्षिण व बाजार के पश्चिम दिशा में स्थित पूरेखरगराय में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सेना की ट्रेन पलटने के लिए कमर कस ली। यह ट्रेन प्रयागराज से सुल्तानपुर जा रही थी। क्रांतिकारियों के खिलाफ दमन की कार्रवाई के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर सेना भेजी गई थी। जिसे रोकने के लिए आजादी के दीवानों ने रेलवे लाइन उखाड़कर अंग्रेजी सैनिकों को लेकर आ रही ट्रेन को पलटा दिया था। इस काम को अंजाम देने में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू जयनारायण सिंह, शिवनारायण शुक्ला, उमापति तिवारी प्रमुख शामिल रहे। कई दिनों तक रेलवे लाइनों को उखाड़ने वालों की तलाश में अंग्रेजी सेना भटकती रही।
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हालांकि कुछ दिनों बाद सभी क्रांतिकारियों को अंग्रेजी सेना ने चिह्नित कर लिया। पहले शिवनारायण शुक्ला पकड़े गए। बाद में आजादी के दीवाने जयनारायण व उमापति तिवारी को भी अंग्रेजी सेना पकड़कर ले गई। अंग्रेजों ने गिरफ्तार किए गए शिवनारायण शुक्ला के पैरों में लाठी बांधकर ऊपर हाथ बांध दिया था। जलती हुई आग पर शिवनारायण को नंगे पैर रस्सी के सहारे तवा पर खड़ा कर दिया। वह पैर तक नहीं मोड़ नहीं पा रहे थे। उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा, ताकि अन्य क्रांतिकारियों के नाम पता चल सकें। वह यातना सहते रहे, लेकिन जुबान नहीं खोली। मुकदमे की सुनवाई के दौरान क्रांतिकारी जयनारायण व शिवनारायण शुक्ला, उमापति तिवारी समेत अन्य लोगों अजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।
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हालांकि सभी को सुनाई गई सजा के विरोध में लखनऊ में अपील की गई। बताते हैं कि शिवनारायण शुक्ला के भाई पैरवी के सिलसिले में लखनऊ गए थे। लौटते समय उनकी मौत हो गई। उस समय सभी क्रांतिकारी जेल में सजा काट रहे थे। इस बात की जानकारी होने पर उन्हें निराशा हुई। हालांकि कुछ दिनों बाद सभी को जमानत मिल गई।
देश आजाद होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अंग्रेजी सेना को धूल चटाने वाले क्रांतिकारियों की याद में विश्वनाथगंज को पर्यटन या फिर किसी स्मारक का स्वरूप दिया जाएगा। मगर ऐसा नहीं हो क्रांतिकारियों की याद के रूप में विकसित करने की हो पहल विश्वनाथगंज के पूरेखरगराय से गुजरी रेलवे लाइन क्रांतिकारियों की यादें समेटे हुए है। यहां पर बने पुल के नीचे छिपकर क्रांतिकारी ट्रैक उखाड़ने के लिए एक-एक कर लाइन पर जाते थे। इलाके के दानपाल सिंह, जेबी सिंह, नरसिंह बहादुर, रामपाल यादव, समर बहादुर सिंह आदि बताते हैं कि इस स्थल को क्रांतिकारियों की याद के रूप में स्थापति करने की पहल होनी चाहिए।