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मानक दरकिनार, दागी कॉलेजों को भी बना दिया परीक्षा केंद्र
Wed, 19 Dec 2018 01:45 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Dec 2018 01:45 AM IST
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माध्यमिक शिक्षा परिषद
हाईस्कूल व इंटर की बोर्ड परीक्षा में केंद्र निर्धारण प्रक्रिया में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है। केंद्रों के फाइनल सत्यापन में विभागीय अफसरों ने दागी कॉलेजों की भी रिपोर्ट भेज दी। यूपी बोर्ड की 2018-19 की परीक्षा के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से बनाए 210 परीक्षा केंद्रों में ऐसे विद्यालयों को भी शामिल किया गया है जिन्हें पहले डिबार करने की संस्तुति की जा चुकी है। दागी कॉलेजों को केंद्र सूची में रखे जाने से विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
यूपी बोर्ड की परीक्षा इस बार छह फरवरी से शुरू हो रही है। शिक्षासत्र शुरू होते ही विभाग की ओर से बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर कवायद शुरू हो गई थी। केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया के मद्देनजर बोर्ड द्वारा सूचना प्रपत्र के जरिए विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मंागी गई। जिसमें कें द्र बनने के लिए विद्यालयों ने झूठी सूचनाएं प्रेषित कर दीं। इसके बाद टीमें गठित कर अफसरों ने विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करने का दावा करते हुए रिपोर्ट भेज दी।
नवंबर माह में बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों की पहली सूची जारी की। जिस पर 195 आपत्तियां आईं। कहीं कक्ष की कमी रही तो कहीं विद्यालय व केंद्रों की निर्धारित दूरी में अंदर। डीएम ने इसे संज्ञान में लेकर पुन: केंद्रों के सत्यापन का निर्देश दिया। तहसीलवार केंद्रों का स्थापन कर रिपोर्ट भेजी गई। मगर सत्यापन रिपोर्ट मेें भी मानक को बिल्कुल भी तरजीह नहीं दी गई। सोमवार को यूपी बोर्ड द्वारा जिले में परीक्षा केंद्रों की फ ाइनल सूची जारी की गई तो इसकी पोल खुल गई। पहली सूची के 202 केंद्रों के सापेक्ष फाइनल सूची 210 केंद्रों की जारी हुई।
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मजे की बात यह है कि 210 केंद्रों की सूची में दो ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है जिन पर सत्र 2017-18 की परीक्षा के दौरान डिबार करने की संस्तुति किए जाने की कार्रवाई हो चुकी है। तत्कालीन डीआईओएस डा. बृजेश मिश्र ने दोनों विद्यालयों पर कार्रवाई की थी। अब सूची में दागी विद्यालयों का नाम आने पर अफसरों द्वारा किए गए सत्यापन पर सवाल उठ रहे हैं।
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यूपी बोर्ड की परीक्षा इस बार छह फरवरी से शुरू हो रही है। शिक्षासत्र शुरू होते ही विभाग की ओर से बोर्ड परीक्षा की तैयारी को लेकर कवायद शुरू हो गई थी। केंद्रों के निर्धारण की प्रक्रिया के मद्देनजर बोर्ड द्वारा सूचना प्रपत्र के जरिए विद्यालयों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मंागी गई। जिसमें कें द्र बनने के लिए विद्यालयों ने झूठी सूचनाएं प्रेषित कर दीं। इसके बाद टीमें गठित कर अफसरों ने विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करने का दावा करते हुए रिपोर्ट भेज दी।
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नवंबर माह में बोर्ड ने परीक्षा केंद्रों की पहली सूची जारी की। जिस पर 195 आपत्तियां आईं। कहीं कक्ष की कमी रही तो कहीं विद्यालय व केंद्रों की निर्धारित दूरी में अंदर। डीएम ने इसे संज्ञान में लेकर पुन: केंद्रों के सत्यापन का निर्देश दिया। तहसीलवार केंद्रों का स्थापन कर रिपोर्ट भेजी गई। मगर सत्यापन रिपोर्ट मेें भी मानक को बिल्कुल भी तरजीह नहीं दी गई। सोमवार को यूपी बोर्ड द्वारा जिले में परीक्षा केंद्रों की फ ाइनल सूची जारी की गई तो इसकी पोल खुल गई। पहली सूची के 202 केंद्रों के सापेक्ष फाइनल सूची 210 केंद्रों की जारी हुई।
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मजे की बात यह है कि 210 केंद्रों की सूची में दो ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है जिन पर सत्र 2017-18 की परीक्षा के दौरान डिबार करने की संस्तुति किए जाने की कार्रवाई हो चुकी है। तत्कालीन डीआईओएस डा. बृजेश मिश्र ने दोनों विद्यालयों पर कार्रवाई की थी। अब सूची में दागी विद्यालयों का नाम आने पर अफसरों द्वारा किए गए सत्यापन पर सवाल उठ रहे हैं।