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मातृभूमि पर आघात बर्दाश्त नहीं
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Sun, 11 Jan 2015 11:11 PM IST
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देश की धरती को राष्ट्रीय स्वयंसेवक अपनी माता मानता है। वह उसके लिए अपना जीवन तक न्यौछावर कर सकता है। मातृभूमि पर कोई आघात करेगा तो संघ इसको कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। स्वयंसेवक उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।
रविवार को केपी कॉलेज प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एकत्रीकरण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता काशी प्रांत के प्रचारक अभय कुमार ने अपने उद्गार कुछ इस अंदाज में व्यक्त किए।
स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा राष्ट्र की उन्नति में उनका बहुत योगदान है। आज देश जिस हालात से गुजर रहा है, उसमें सभी की भूमिका अग्रणी होनी चाहिए। यह हिंदुओं की भूमि है और रहेगी। हम सभी लोग इस धरती को अपनी माता कहते हैं। यही भूमि ऐसी है जहां सभी बिना किसी भेद-भाव के रहते हैं। इसकी रक्षा के लिए हमें हर वक्त तन, मन, धन से तैयार रहना चाहिए। कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम व समर्पण का भाव शाखा में ही सिखाया जाता है। यह वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, विवेकानंद जैसे महापुरुषों की धरती है। इसमें संकीर्ण मानसिकता रखने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।
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उन्होंने कहाकि 1857 के बाद से इस देश का हिंदू समाज धीरे-धीरे जाग्रत होने लगा है। यह अलग बात है उस समय के हिंदू नेताओं को यातनाएं दी गईं। इसके बाद भी हिंदू समाज बिखरा नहीं बल्कि दोगुनी ताकत से आगे बढ़ा है। प्रचारक ने कहा संघ का लक्ष्य विशाल है। वह अपने मूल्यों का हनन किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा। यह देश हमारी मां है इस पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा। इस मौके पर ध्वज प्रणाम हुआ। एकल गीत व स्वामी विवेकानंद के अमृतवचन भी सुनाए गए।
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रविवार को केपी कॉलेज प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एकत्रीकरण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता काशी प्रांत के प्रचारक अभय कुमार ने अपने उद्गार कुछ इस अंदाज में व्यक्त किए।
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स्वयंसेवकों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा राष्ट्र की उन्नति में उनका बहुत योगदान है। आज देश जिस हालात से गुजर रहा है, उसमें सभी की भूमिका अग्रणी होनी चाहिए। यह हिंदुओं की भूमि है और रहेगी। हम सभी लोग इस धरती को अपनी माता कहते हैं। यही भूमि ऐसी है जहां सभी बिना किसी भेद-भाव के रहते हैं। इसकी रक्षा के लिए हमें हर वक्त तन, मन, धन से तैयार रहना चाहिए। कहा कि राष्ट्र के प्रति प्रेम व समर्पण का भाव शाखा में ही सिखाया जाता है। यह वीर शिवाजी, महाराणा प्रताप, विवेकानंद जैसे महापुरुषों की धरती है। इसमें संकीर्ण मानसिकता रखने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है।
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उन्होंने कहाकि 1857 के बाद से इस देश का हिंदू समाज धीरे-धीरे जाग्रत होने लगा है। यह अलग बात है उस समय के हिंदू नेताओं को यातनाएं दी गईं। इसके बाद भी हिंदू समाज बिखरा नहीं बल्कि दोगुनी ताकत से आगे बढ़ा है। प्रचारक ने कहा संघ का लक्ष्य विशाल है। वह अपने मूल्यों का हनन किसी भी कीमत पर नहीं होने देगा। यह देश हमारी मां है इस पर किसी भी प्रकार का अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा। इस मौके पर ध्वज प्रणाम हुआ। एकल गीत व स्वामी विवेकानंद के अमृतवचन भी सुनाए गए।