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Pratapgarh News: 50 हजार मीट्रिकटन यूरिया की आवश्यकता, उपलब्ध सिर्फ 20 हजार

Fri, 28 Jul 2023 09:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रतापगढ़ Updated Fri, 28 Jul 2023 09:36 PM IST
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Requirement of 50 thousand metric tons of urea, only 20 thousand available
खुले बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी

प्रतापगढ़। धान की रोपाई का समय आते ही यूरिया का संकट गहरा गया है। जिले की साधन सहकारी समितियों और सरकारी बिक्री केंद्रों पर खाद का भीेषण संकट है। किसान मजबूरी में खुले बाजार से खाद खरीदने को विवश हैं। सरकारी बिक्री केंद्रों पर किसानों के लिए खतौनी के साथ आधारकार्ड लेकर जाना अनिवार्य कर दिया गया है। एक बीघा से कम खेत होने पर दो ही बोरी यूरिया दी जाएगी।





जिले के 99,289 हेक्टेयर में धान की खेती होती है। धान का खेती के लिए डीएपी की मांग कम और यूरिया की अधिक होती है। रोपाई के एक हफ्ते बाद अनिवार्य रूप से दानेदार यूरिया का छिड़काव करना होता है नहीं तो पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। इसलिए धान की रोपाई करने वाला प्रत्येक किसान यूरिया खाद का प्रयोग अवश्य करता है। जुलाई माह में यूरिया की मांग 50,851 मीट्रिकटन है, जबकि अभी तक 15,680 मीट्रिकटन ही यूरिया समितियों तक पहुंची है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में यूरिया का संकट कितना गहरा है। साधन सहकारी समितियों पर तैनात सचिव खाद नहीं होने की दशा में ताला बंदकर गायब हो जाते हैं। इससे किसान खुले बाजार में खाद खरीदने को मजबूर हैं।
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सितंबर माह में आएगी रैक
जिले में सितंबर माह के पहले खाद की रैक आने की अनुमति रेलवे प्रशासन ने नहीं दी है। इससे किसानों को लम्बा इंतजार करना होगा। मुख्यालय स्थित गोदाम में जो खाद रखी हुई है, उसे अब समितियों को भेजी जाएगी।
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ई-पास मशीन खराब बताकर करते थे खेल
सरकारी बिक्री केंद्रों पर खाद की बिक्री के लिए आधारकार्ड को अनिवार्य किया गया है, मगर कर्मचारी ई-पास मशीन को खराब बताकर अभी तक खाद की बिक्री कर लेते थे। इससे वितरण में अनियमितता व्याप्त थी। अधिकारियों ने इसपर रोक लगाने के लिए मशीन खराब होने पर खाद न बांटने का निर्देश दिया है।


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डीएम ने खाद की उपलब्धता की ली जानकारी
डीएम प्रकाशचंद्र श्रीवास्तव ने शुक्रवार को सहायक निबंधक, जिला कृषि अधिकारी और पीसीएफ जिला प्रबंधक को बुलाकर खाद की कमी के बाबत जानकारी ली। पीसीएफ जिला प्रबंधक धनंजय तिवारी ने बताया कि 5800 मीट्रिकटन यूरिया गोदाम में है। डीएम ने कल से यह खाद समितियों पर पहुंचाने को कहा है।



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डीएम ने समीक्षा बैठक करके कहा है कि गोदाम में जो खाद रखी है, उसे अविलंब समितियों पर भेजी जाए। इसके लिए पीसीएफ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। फूलपुर इफको से प्रतिदिन ट्रकों से खाद मंगाई जा रही है।

अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी

क्या कहते किसान ------------
खाद का वितरण कब होता है पता ही नहीं चलता
साधन सहकारी समिति पर खाद कब आती और कब इसका वितरण होता है, पता ही नहीं चलता। खाद प्राय: रात में ही आती है। वितरण की कोई तिथि भी निश्चित नहीं है। एक तिथि निश्चित होनी चाहिए।


-रतनलाल, जामताली
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छोटे किसानों की होती है अनदेखी
जिले में अधिकांश छोटे किसान हैं, जिन्हें एक या दो बोरी खाद की आवश्यकता होती है, मगर छोटे किसान ताकते रह जाते हैं और बड़े किसान इसका लाभ उठा लेते हैं।
संजय मिश्रा, रानीगंज
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खतौनी खोलेगी पोल
खाद के लिए खतौनी अनिवार्य करने से अब उन किसानों की पोल खुल जाएगी, जो सचिवों पर दबाव बनाकर 50-50 बोरी यूरिया ले लेते हैं।
मुन्ना दुबे, शिवगढ़
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