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खुलासा : ढाई करोड़ की डीएपी के गबन में पीसीएफ प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक और पूर्व जिला प्रबंधक भी थे शामिल

Thu, 13 Jan 2022 10:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़ Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 13 Jan 2022 10:29 PM IST
सार

रिमांड पर लिए गए भंडार नायक संतोष कुमार ने उगले राज। आठ समितियों के सचिवों के माध्यम से बाजार में बेची गई थी खाद। भंडार नायक की महिला मित्र के घर कानपुर जाएगी पुलिस। गबन में शामिल पूरे हीरामन के सचिव को भेजा जेल। 

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regional manager and former district manager of PCF Prayagraj were also involved in the embezzlement of DAP of 2.5 crores
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीसीएफ के गोदामों से ढाई करोड़ रुपये की डीएपी के गबन के मामले में निलंबित भंडार नायक संतोष कुमार ने पुलिस की पूछताछ में कई अहम राज उगले हैं। पुलिस के मुताबिक, डीएपी के गबन में पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक, पूर्व जिला प्रबंधक समेत आठ समितियों के सचिव व कर्मचारी भी शामिल रहे।

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पूछताछ के बाद पुलिस ने आरएम व पूर्व जिला प्रबंधक समेत अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी, मगर वे हाथ नहीं आए। भंडार नायक के प्रयागराज स्थित आवास व रिश्तेदारों के घरों पर भी ताले लटकते मिले। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी पूरे हीरामन के सचिव को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 

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रानीगंज थाना क्षेत्र के सिंगाही सरायसेतराय निवासी संतोष कुमार पीसीएफ में भंडार नायक के पद पर तैनात था। उसके खिलाफ नगर कोतवाली में पीसीएफ के जिला प्रबंधक धनंजय तिवारी ने 1055 मीट्रिक टन डीएपी गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस ने उस पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। मंगलवार रात पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।

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भंडार नायक को लिया गया है रिमांड पर

कोर्ट के आदेश पर बृहस्पतिवार को पुलिस ने संतोष कुमार को जेल से 24 घंटे के लिए रिमांड पर लिया। उससे पूछताछ में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस के अनुसार, साधन सहकारी समिति आशापुर, छेमरसरैया, सोनपुरा, गौरामाफी, नचरौला, पूरे हीरामन, नारायनपुर व लक्ष्मणपुर के सचिवों के माध्यम से डीएपी बाजारों में ब्लैक में बेची गई।

 

ढाई करोड़ रुपये के खाद घोटोले में पीसीएफ प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार, पूर्व जिला प्रबंधक धीरेंद्र कुमार तिवारी, एकाउंटेंट दिनेश सरोज, पटल सहायक दिनेश कुमार भी शामिल हैं। यह बात भी सामने आई कि समितियों की जांच जिला प्रबंधक से कराने के बजाय पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा कौशांबी के जिला प्रबंधक हरेंद्र कुमार से कराई गई।


जांच में उनकी भी भूमिका संदिग्ध मिली है। पुलिस उनका नाम भी विवेचना में शामिल कर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। पूर्व जिला प्रबंधक धीरेंद्र तिवारी मौजूदा समय में मिर्जापुर में तैनात हैं। पुलिस ने संतोष कुमार के प्रयागराज स्थित आवास समेत रिश्तेदारों के घरों पर दबिश दी, लेकिन सभी स्थानों पर ताला बंद मिला।

भंडार नायक की महिला मित्र के यहां भी जाएगी पुलिस

पीसीएफ प्रयागराज के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव कुमार व पूर्व जिला प्रबंधक धीरेंद्र तिवारी भी अपने घरों पर नहीं मिले। गबन के मामले में एक आरोपी पूरे हीरामन के सहकारी समिति के सचिव राजेश पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया। अब पुलिस भंडार नायक की महिला मित्र की तलाश में कानपुर में दबिश देने की तैयारी में है।


सीओ सिटी अभय पांडेय ने बताया कि भंडार नायक को रिमांड पर लेने के बाद पूछताछ में पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। सभी की पुष्टि करने के बाद आगे की कार्रवाई जारी रहेगी। अवैध रूप से संपत्ति अर्जित करने वालों के खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई होगी। उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।

बहनोई के नाम खरीदा ट्रक, खोला मुर्गी फार्म
डीएपी व यूरिया की ढुलाई के 40 लाख रुपये बकाया चुकाने के लिए उर्वरक की कालाबाजारी करने के वाले निलंबित भंडार नायक संतोष कुमार ने अधिकारियों की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद मनमानी शुरू कर दी। कोतवाली पुलिस के अनुसार, उसने डेढ़ साल के भीतर ढाई करोड़ रुपये की खाद बाजार में बिकवा दी। इस बीच उसने अपने बहनोई के नाम से ट्रक खरीदा और 20 लाख रुपये की लागत से मुर्गीफार्म भी खोल दिया।
 

वह अक्सर अपनी महिला मित्र से मिलने भी जाता रहता था। महिला मित्र के भाई को भी उसने व्यापार करने के लिए लाखों रुपये दिए। अफसरों को भी 40-40 लाख रुपये हिस्सा दिया। उनके आदेश का पालन भी करता रहा। गबन को छिपाने के लिए अफसर से लेकर भंडार नायक तक गोलमाल करते रहे, मगर डीएपी की कमी के चलते हो रहे हंगामे ने आखिरकार पोल खोल दी।  

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