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स्कूल की मान्यता देने में भी लंबा खेल
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Sat, 01 Aug 2015 11:47 PM IST
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भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी तगड़ा खेल हुआ है। कुछ माह पूर्व मान्यता के लिए हाईस्कूल व इंटर की शीर्ष अफसरों को भेजी गई फाइल में रिपोर्ट लगाने के लिए लंबा खेल हुआ। यही वजह रही कि तमाम ऐसे स्कूलों की फाइल मान्यता के लिए भेज दी गई, जिनके भवन का मानक पूर्ण ही नहीं था। इतना ही नहीं एक कमरे पर मान्यता की फाइल पर रिपोर्ट लगा कर संस्तुति की गई है।
घूसखोरी के मामले में बदनाम माध्यमिक शिक्षा विभाग का एक नया कारनामा प्रकाश में आया है। कुछ माह पहले इंटर व हाईस्कूल की मान्यता के लिए फाइलें शीर्ष अफसरों को भेजी जानी थीं। फाइल में प्रबंधकों के जरिए किए गए दावे सच हैं या नहीं इस बात की जांच हुई। फिर यहीं से खेल शुरू हो गया। जांच के लिए विभाग के लोग विद्यालयों में पहुंचे। जहां सेटिंग हुई वहां का मानक अपूर्ण होते हुए भी सारे कमरे व खेल मैदान आदि का मानक पूरा कर दिया गया। हालांकि इस काम के लिए 50 से 70 हजार रुपये की वसूली की गई।
विभाग के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि ऐसे स्कूलों की फाइल यहां से मान्यता के लिए पैसा लेकर भेज दी गईं, जिनके पास एक या दो ही कमरे बने थे। मान्यता की इन फाइलों में जबरदस्त खेल किया गया। सत्ता पक्ष के एक नेता के स्कूल का कोई कमरा ही नहीं बना था। उनके दबाव में अधिकारियों ने मान्यता के लिए मांगे गए कमरों का मानक पूरा कर दिया। लोग बताते हैं कि इन दिनों वह कुछ कमरों का निर्माण अपने गांव में शुरू करा दिए हैं। कहा जा रहा है कि स्कूल मान्यता के लिए कुछ माह पूर्व भेजी गई फाइलों की जांच कराई जाए तो अधिकांश फाइलों में दर्ज रिकार्ड और स्थलीय स्थिति में जमीन व आसमान का अंतर सामने होगा।
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घूसखोरी के मामले में बदनाम माध्यमिक शिक्षा विभाग का एक नया कारनामा प्रकाश में आया है। कुछ माह पहले इंटर व हाईस्कूल की मान्यता के लिए फाइलें शीर्ष अफसरों को भेजी जानी थीं। फाइल में प्रबंधकों के जरिए किए गए दावे सच हैं या नहीं इस बात की जांच हुई। फिर यहीं से खेल शुरू हो गया। जांच के लिए विभाग के लोग विद्यालयों में पहुंचे। जहां सेटिंग हुई वहां का मानक अपूर्ण होते हुए भी सारे कमरे व खेल मैदान आदि का मानक पूरा कर दिया गया। हालांकि इस काम के लिए 50 से 70 हजार रुपये की वसूली की गई।
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विभाग के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि ऐसे स्कूलों की फाइल यहां से मान्यता के लिए पैसा लेकर भेज दी गईं, जिनके पास एक या दो ही कमरे बने थे। मान्यता की इन फाइलों में जबरदस्त खेल किया गया। सत्ता पक्ष के एक नेता के स्कूल का कोई कमरा ही नहीं बना था। उनके दबाव में अधिकारियों ने मान्यता के लिए मांगे गए कमरों का मानक पूरा कर दिया। लोग बताते हैं कि इन दिनों वह कुछ कमरों का निर्माण अपने गांव में शुरू करा दिए हैं। कहा जा रहा है कि स्कूल मान्यता के लिए कुछ माह पूर्व भेजी गई फाइलों की जांच कराई जाए तो अधिकांश फाइलों में दर्ज रिकार्ड और स्थलीय स्थिति में जमीन व आसमान का अंतर सामने होगा।
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