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ढाई महीने में 210 मिमी बारिश, धान की फसलों पर संकट
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बारिश न होने से खरीफ की फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। पीक सीजन में अनुपात के मुताबिक बारिश नहीं होने से किसानों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। ढाई महीने के भीतर जिले में सिर्फ 210 मिमी बारिश हुई है। इससे फसलें प्रभावित हो रही हैं। सबसे ज्यादा धान की फसल पर संकट है। बारिश के मुख्य महीने में बादल सिर्फ उमड़-घुमड़ तक सीमित हैं।
आमतौर पर जिले में सीजन में 1200 मिमी बारिश होती है। इस बार मई व जून महीने में ही बारिश शुरू हो गई थी। ताउते तूफान के असर से जून माह में ही जिले में 400 मिमी बारिश हुई, मगर इस बारिश से किसानों को लाभ नहीं मिला। दरअसल, इस दौरान किसानों की नर्सरी तैयार हो रही थी। इससे किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए थे। जुुलाई माह के मध्य चरण में बारिश हुई तो किसानों ने धान की रोपाई शुरू की। इसके बाद बीच-बीच में रिमझिम फुहारें पड़ती रहीं।
एक माह पूर्व 11 अगस्त को झमाझम 110 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इसके बाद से बादल रूठ गए। जुलाई, अगस्त व सितंबर माह के मध्य चरण तक सिर्फ 210 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। जबकि इसका अनुपात 400 मिमी के पार होना चाहिए। इससे धान की फसलों में पानी की स्तर बना रहता है। लगभग एक महीने से बारिश नहीं होने से धान की फसल पानी के अभाव में सूखने लगी है।
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सबसे ज्यादा संकट उन किसानों के सामने है, जहां नहरों की सुविधा नहीं है। किसान फसलों को बचाने के लिए पंपिंगसेट का सहारा ले रहे है। इससे उनकी जेब ढीली हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर इसका असर पड़ेगा। हालांकि जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह का कहना है कि धान की फसल अभी प्रभावित नहीं हुई है। जहां नहरों की सुविधा नहीं है, वहां दिक्कत है, मगर पंपिंगसेट से सिंचाई किसान कर रहे हैं। बारिश भी बीच-बीच में हो रही है।
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आमतौर पर जिले में सीजन में 1200 मिमी बारिश होती है। इस बार मई व जून महीने में ही बारिश शुरू हो गई थी। ताउते तूफान के असर से जून माह में ही जिले में 400 मिमी बारिश हुई, मगर इस बारिश से किसानों को लाभ नहीं मिला। दरअसल, इस दौरान किसानों की नर्सरी तैयार हो रही थी। इससे किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए थे। जुुलाई माह के मध्य चरण में बारिश हुई तो किसानों ने धान की रोपाई शुरू की। इसके बाद बीच-बीच में रिमझिम फुहारें पड़ती रहीं।
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एक माह पूर्व 11 अगस्त को झमाझम 110 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। इसके बाद से बादल रूठ गए। जुलाई, अगस्त व सितंबर माह के मध्य चरण तक सिर्फ 210 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। जबकि इसका अनुपात 400 मिमी के पार होना चाहिए। इससे धान की फसलों में पानी की स्तर बना रहता है। लगभग एक महीने से बारिश नहीं होने से धान की फसल पानी के अभाव में सूखने लगी है।
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सबसे ज्यादा संकट उन किसानों के सामने है, जहां नहरों की सुविधा नहीं है। किसान फसलों को बचाने के लिए पंपिंगसेट का सहारा ले रहे है। इससे उनकी जेब ढीली हो रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर इसका असर पड़ेगा। हालांकि जिला कृषि अधिकारी डॉ. अश्वनी सिंह का कहना है कि धान की फसल अभी प्रभावित नहीं हुई है। जहां नहरों की सुविधा नहीं है, वहां दिक्कत है, मगर पंपिंगसेट से सिंचाई किसान कर रहे हैं। बारिश भी बीच-बीच में हो रही है।