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दो बजे के बाद कोई इमरजेंसी नहीं, ले जाओ मरीज

Fri, 06 Sep 2019 12:01 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 06 Sep 2019 12:01 AM IST
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No emergency after two o'clock, take patient
जिला महिला अस्पताल में दोपहर दो बजे के बाद इमरजेंसी नहीं चल रही है। मरीजों को रेफर कर दिया जा रहा है। उधर, शासन का निर्देश है कि नब्बे प्रतिशत प्रसव सरकारी अस्पतालों में कराया जाए। नर्स और डाक्टरों की कमी से प्रसव कराना तो दूर अस्पताल प्रशासन ने दोपहर दो बजे के बाद मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। मजबूरन मरीजों को प्रयागराज या फिर जिले के किसी नर्सिंगहोम का चक्कर काटना पड़ता है।
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शासन ने आदेश दिया है कि एएनएम सेंटर, सीएचसी अथवा पीएचसी के साथ जिला महिला अस्पताल में ही प्रसव कराया जाए। देखरेख के लिए उन्हें 48 घंटे अस्पताल में रखा जाए। शासन की ओर से मिलने वाले योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। मगर जिले के महिला अस्पताल का हाल बेहाल है। यहां दोपहर दो बजे के बाद इमरजेंसी सेवा बंद कर दी जा रही है। मरीजों को दवा देकर घर या फिर प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में लोग प्रयागराज न जाकर किसी प्राइवेट अस्पताल या फिर झोलाछाप के यहां चले जाते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानी जाए तो जिला अस्पताल में 21 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं, मगर तैनाती महज नौ की है। यही हाल डॉक्टरों का है। शासन ने 11 पद स्वीकृत किए हैं, मगर सीएमएस को मिलाकर तीन डॉक्टर तैनात है। तीन डॉक्टरों को सीएमओ ने अटैच किया है। ऐसे में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक ओटी चलती है। दोपहर बाद ओटी को बंद कर दिया जाता है। नौ नर्स की तैनाती है। इनमें से सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक दो नर्स इमरजेंसी तो दो नर्स ओटी देखती हैं।
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एएनएम सेंटर पर लटकता रहता है ताला
प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक एएनएम सेंटर का निर्माण शासन ने कराया है। मगर एएनएम की कमी को देखते हुए दो सेंटर की देखरेख करने की जिम्मेदारी एक ही एएनएम को दे दी गई है। ऐसे में एएनएम सेंटर पर ताला लटकता रहता है। प्रसव पीड़िताएं सेंटर पर पहुंचती है तो आशा बहू मिलती है। वह मदद का भरोसा दिलाते हुए किसी पीएचसी अथवा सीएचसी पर ले जाती हैं। जहां डॉक्टर देखने के बाद जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। यहां मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
इमरजेंसी 24 घंटे संचालित हो रही है। डॉक्टर और नर्स की कमी के चलते दोपहर बाद ऑपरेशन नहीं किया जाता है। जांच में जब यह पता चलता है कि प्रसव होने में अभी समय लगेगा तो ऐसे मरीजों को दवा देकर घर भेज दिया जाता है। प्रसव पीड़िता की हालत गंभीर होने पर उसे रेफर किया जाता है। जिनका प्रसव होने वाला होता है उसे भर्ती कर लिया जाता है। प्रसव कराया जाता है। नर्स और डॉक्टर के लिए शासन से मांग की गई है।

डॉ. रीना प्रसाद, सीएमएस जिला महिला अस्पताल
90 प्रतिशत प्रसव संस्थागत कराने के लिए शासन ने आदेश दिया है। जहां पर जो कमियां हैं उसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। महिला अस्पताल में कुछ डॉक्टरों को अटैच किया जा चुका है। जल्द ही नर्स को भी अटैच किया जाएगा। ताला बंदकर फरार रहने वाली एएनएम के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉ. एके श्रीवास्तव, सीएमओ
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