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लॉकडाउन: पचास प्रतिशत दूध की घटी मांग, संकट में पशुपालक

Wed, 01 Apr 2020 11:45 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 01 Apr 2020 11:45 PM IST
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Lockdown: Fifty percent milk demand reduced, cattleman in crisis
जिले में 21 दिन के लॉकडाउन से दूध की खपत में पचास फीसदी की कमी आई है। चाय और मिठाई की दुकानें बंद होने से दूध, खोवा, पनीर और मक्खन का बाजार ठंडा हो गया है।
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आठ दिन पहले जिले में 14,840 लीटर प्रतिदिन दूध की खपत होती थी, जो बंदी के चलते 7,420 लीटर पर आ गई है। इससे वह किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं, जो दुग्ध का उत्पादन करके अपने व्यवसाय का माध्यम बना चुके थे।
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लॉकडाउन के आठवें दिन जिले भर की चाय, मिठाई की दुकानों पर ताला लटका हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में जितना दूध घरों में बच्चों और बूढों के पीने और चाय में खर्च होता है, उससे दोगुना दूध खोवा, पनीर और मक्खन में खर्च होता है। दूध की मांग को देखते हुए जिले के बड़ी संख्या में युवा किसान दूध डेयरी को अपना व्यवसाय अपना चुके हैं।
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पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में प्रतिदिन 14,840 लीटर की मांग है। इसमें 9,984 लीटर दूध का उत्पादन जिले में होता है, और 4856 लीटर दूध मऊआइमा और प्रयागराज से आता है। इसी में वह पैकेट बंद दूध भी शामिल है, जो दुकानों पर मिलता है। मगर आठ दिन से लॉकडाउन होने से जिले में उत्पादन होने वाले दूध की खपत नहीं हो पा रही है। इस कारण मऊआइमा और प्रयागराज से सप्लाई करने वालों को झटका लगा है।
शहर के अधिकांश लोगों पहुंचे गांव
शहर में नौकरी पेशा से जुटे और बच्चों को लेकर शहर पढ़ाने के लिए आने वाले परिवार लॉकडाउन की घोषणा होते ही गांव पहुंच गए हैं। परिवार और बच्चों के गांव पहुंचने शहर में दूध की मांग घट गई है।
गांव में अब दही और मट्ठा तैयार कर रहे पशुपालक
गांव से शहर दूध आने में खड़ी हो रही बाधा के चलते अधिकांश पशुपालकों ने दही और मट्ठा तैयार करना प्रारंभ कर दिया है। उचित मूल्य नहीं मिलने से वह अब देसी घी तैयार कर भरपाई करने में लगे हुए हैं।

लॉकडाउन के दौरान के दूध की बिक्री पर कोई नहीं है। मगर यह तो सच है कि मिठाई और चाय की दुकानें बंद होने से मांग पर असर पड़ा है। फिर भी आम ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए दूधिए को बगैर रोक-टोक आने -जाने की छूट प्रदान की गई है।
डा. विजय प्रताप सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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