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सरकारी अस्पतालों में ताला, नहीं हो रही जांच, लोगों की जेब हो रही खाली
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सरकारी अस्पतालों की पैथालॉजी बंद हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। बाहर जांच कराने में उन्हें अपनी जेब खाली करनी पड़ रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत शुगर के मरीजों और प्रसव पीड़िताओं को हो रही है। महिला अस्पताल में आने वाली प्रसव पीड़िताओं को बाहर से एचआईवी समेत अन्य जांचें करानी पड़ रही हैं।
लॉकडाउन के दौरान अस्पताल की ओटी को लॉक कर दिया गया। ओपीडी और पैथालॉजी को भी बंद कर दिया गया। सिर्फ इमरजेंसी सेवा चालू रखी गई। पखवारे भर पहले शासन ने ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज करने के लिए आदेश तो दे दिया, मगर पैथालॉजी में अभी भी ताला लटक रहा है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ सीएचसी में नाम मात्र की ओपीडी का संचालन हो रहा है। भीड़ इकट्ठा न हो, इसके लिए पैथॉलाजी का संचालन नहीं किया जा रहा है। इससे गर्भवती महिलाओं के साथ ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच कराने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। डॉक्टरों की सलाह पर प्राइवेट पैथालॉजी सेंटर पर जाना पड़ रहा है। जहां उनसे जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे महंगी जांच अल्ट्रासाउंड और एचआईवी की है। इसके चलते वे जांच कराने से कतरा रही हैं।
थर्मल स्क्रीनिंग में लगा दी गई एलटी की ड्यूटी
जिला और महिला अस्पताल के साथ ही रानीगंज, सुखपालनगर, गौरा, पट्टी, अमरगढ़, बाघराय, सांगीपुर, महेशगंज, कुंडा जैसे अस्पतालों के एलटी की ड्यूटी थर्मल स्क्रीनिंग या फिर कंट्रोल रूम में लगा दी गई है। ऐसे में पैथालॉजी सेंटर पर ताला लटकता रहता है। दूरदराज से जांच कराने के लिए आने वाले लोगों को लौटना पड़ रहा है।
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इस तरह मरीजों से जांच के नाम पर होती है लूट
एचआईवी - पांच सौ से आठ सौ रुपये
एलएफटी - दो से ढाई सौ रुपये
शुगर - 70 से 100 रुपये
हिमोग्लोबिन- 40 से 50 रुपये
सीबीसी 250 से 300 रुपये
हेपेटाइटिस बी 400 से पांच सौ रुपये
ब्लड ग्रुप 40 से 50 रुपये
बीडीआरएल 250 से 300 रुपये
कुछ एलटी की ड्यूटी कोरोना के मरीजों की जांच के लिए लगाई गई है। जहां एलटी हैं, यदि वहां जांच नहीं की जा रही है तो यह गलत है। इसकी जांच की जाएगी।
डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ।
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लॉकडाउन के दौरान अस्पताल की ओटी को लॉक कर दिया गया। ओपीडी और पैथालॉजी को भी बंद कर दिया गया। सिर्फ इमरजेंसी सेवा चालू रखी गई। पखवारे भर पहले शासन ने ओपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज करने के लिए आदेश तो दे दिया, मगर पैथालॉजी में अभी भी ताला लटक रहा है। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल के साथ सीएचसी में नाम मात्र की ओपीडी का संचालन हो रहा है। भीड़ इकट्ठा न हो, इसके लिए पैथॉलाजी का संचालन नहीं किया जा रहा है। इससे गर्भवती महिलाओं के साथ ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को जांच कराने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। डॉक्टरों की सलाह पर प्राइवेट पैथालॉजी सेंटर पर जाना पड़ रहा है। जहां उनसे जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे महंगी जांच अल्ट्रासाउंड और एचआईवी की है। इसके चलते वे जांच कराने से कतरा रही हैं।
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थर्मल स्क्रीनिंग में लगा दी गई एलटी की ड्यूटी
जिला और महिला अस्पताल के साथ ही रानीगंज, सुखपालनगर, गौरा, पट्टी, अमरगढ़, बाघराय, सांगीपुर, महेशगंज, कुंडा जैसे अस्पतालों के एलटी की ड्यूटी थर्मल स्क्रीनिंग या फिर कंट्रोल रूम में लगा दी गई है। ऐसे में पैथालॉजी सेंटर पर ताला लटकता रहता है। दूरदराज से जांच कराने के लिए आने वाले लोगों को लौटना पड़ रहा है।
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इस तरह मरीजों से जांच के नाम पर होती है लूट
एचआईवी - पांच सौ से आठ सौ रुपये
एलएफटी - दो से ढाई सौ रुपये
शुगर - 70 से 100 रुपये
हिमोग्लोबिन- 40 से 50 रुपये
सीबीसी 250 से 300 रुपये
हेपेटाइटिस बी 400 से पांच सौ रुपये
ब्लड ग्रुप 40 से 50 रुपये
बीडीआरएल 250 से 300 रुपये
कुछ एलटी की ड्यूटी कोरोना के मरीजों की जांच के लिए लगाई गई है। जहां एलटी हैं, यदि वहां जांच नहीं की जा रही है तो यह गलत है। इसकी जांच की जाएगी।
डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ।