शैक्षिक महाकुंभ : इसरो के वैज्ञानिक बोले- अंतरिक्ष में है भविष्य, बच्चों में जिज्ञासा पैदा करने की जरूरत
प्रैक्टिकल की जरूरत है। बच्चों में जिज्ञासा पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य अंतरिक्ष में है। बच्चे रॉकेट बना रहे हैं। इसरो कई क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। हम सभी सेटलाइट बना रहे हैं।
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राष्ट्रीय शैक्षिक महाकुंभ के दूसरे दिन शनिवार को इसरो की ओर से आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में वैज्ञानिक डॉ. संतोष जगन्नाथ पिसे ने बच्चों को अंतरिक्ष के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने इसरो के कार्यों से भी अवगत कराया। डॉ. जगन्नाथ ने कहा कि हमारे एजुकेशन सिस्टम में बहुत सारा बदलाव हो रहा है, लेकिन अभी और भी बदलाव की जरूरत है।
प्रैक्टिकल की जरूरत है। बच्चों में जिज्ञासा पैदा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य अंतरिक्ष में है। बच्चे रॉकेट बना रहे हैं। इसरो कई क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। हम सभी सेटलाइट बना रहे हैं। यह सेटलाइट 450 किमी ऊपर जाएगा। उन्होंने कहा कि शैक्षिक महाकुंभ में ढेर सारे बच्चे आए हुए थे, मगर उनमे सात बच्चे ऐसे आए जिनके सवाल हैरान करने वाले थे।
इससे सहजता से ग्रामीण परिवेश के बच्चों की प्रतिभा का आकलन किया जा सकता है। वैज्ञानिक डॉ. संतोष जगन्नाथ पिसे वर्ष 2000 से इसरो से जुड़े हैं। 2000 से अधिक लेक्चर दे चुके हैं। उनके साथ प्रशिक्षक श्वेता पांडेय व अपूर्वा भी सहयोग कर रही हैं।
सपने देखने के साथ उनका पीछा करना भी जरूरी: विवेक
प्रातपगढ़। राष्ट्रीय शैक्षिक महाकुंभ के दूसरे दिन गुड़गांव से आए इंजीनियरिंग एक्सपर्ट विवेक गुप्ता ने बच्चों को बताया कि सपने देखना जरूरी है, मगर सपनों को सच करने के लिए उनका पीछा करना भी जरूरी है। सपने देखने के बाद आप यदि सोचेंगे यह सब सहजता से हासिल हो जाएगा, तो यह संभव नहीं है।
समय देना पड़ेगा और मेहनत भी करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के असफल होने पर कभी भी माता-पिता व शिक्षक को दोषी न बताएं। इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही स्वयं की है। स्वयं को जिम्मेदार मानने वाले बच्चे कभी असफल नहीं होते हैं। इंजीनियर विवेक गुप्ता पूर्व में रेलवे में अफसर रहे। 2015 में नौकरी से इस्तीफा देने के बाद अब इंजीनियरों की पौध तैयार कर रहे हैं।
जूनियर इंजीनियर तैयार कर रहे बलवीर
प्रदेश के कासगंज के हीरापुर के रहने वाले इंजीनियर बलवीर सिंह का मिशन डिप्लोमा इंजीनियर तैयार करने का है। कक्षा10वीं पास करने वाले बच्चों को वह प्रेरित कर जूनियर इंजीनियर की पढ़ाइ कराते हैं। उन्हें ऑनलाइन क्लास देते हैं। उन्होंने कहा कि मध्यम परिवार के बच्चे भी इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। हाईस्कूल पास करने के बाद डिप्लोमा कर वह भी जूनियर इंजीनियर बन सकते हैं।
खगोल विज्ञान मनीषियों की देन: जेजे रावल
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के दूसरे दिन शनिवार को भारतीय खगोल वैज्ञानिक जेजे रावल ने खगोल विज्ञान के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि खगोल विज्ञान में ऋषियों एवं मुनियों का योगदान है। आर्यभट्ट, बौद्धायना, भास्कराचार्य ने खगोल विज्ञान व गणित विषय में बहुत योगदान दिया है। विषय कोई भी हो, रुचि पैदा करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को किताबी ज्ञान के साथ ही प्रैक्टिकल पर भी ध्यान देना चाहिए।