{"_id":"5bdb46babdec22697f68056b","slug":"dirt-on-roads-rusting-machine-of-30-lakh","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़कों पर गंदगी, जंग खा रही 30 लाख की मशीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़कों पर गंदगी, जंग खा रही 30 लाख की मशीन
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Fri, 02 Nov 2018 12:21 AM IST
विज्ञापन
प्रतापगढ़।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो; प्रतापगढ़।
विज्ञापन
नगर पालिका की रोड स्वीपिंग मशीन शहीद उद्यान में जंग खा रही है। वहीं शहर की सड़कों पर उड़ती धूल से दुकानदार से लेकर राहगीर तक परेशान हैं। लगभग 30 लाख रुपये की लागत से खरीदी गई रोड स्वीपिंग मशीन का प्रयोग नहीं हो रहा। इससे दिन-रात शहर की सड़कों पर धूल उड़ती रहती है। शहरियों को होने वाली दिक्कत के बावजूद पालिका के अफसर के कानों में जूं नहीं रेंग रही है।
दो साल पहले नगर पालिका की ओर से शहर की सड़कों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गई थी। इस मशीन की खरीद पर नगर पालिका ने करीब 30 लाख रुपये खर्च किए थे। मगर हालत यह है कि जिस दिन से मशीन खरीदी गई, उस दिन से अब तक मात्र शहर की सड़कों पर 10-15 दिन ही यह नजर आई। रोड स्वीपिंग मशीन को शहीद उद्यान गार्डेन के गोदाम में खड़ा किया गया है। अब मशीन में जंग लगने लगी है। जबकि शहर की सड़कों पर धूल उड़ने से लोगों को परेशानी हो रही है।
इस साल भले ही कागज पर रोड स्वीपिंग मशीन को चलाने के लिए लिखापढ़ी की गई हो, लेकिन एक दिन भी सड़क पर मशीन सड़क पर चलते नहीं दिखी। अफसरों का तर्क रहता है कि मशीन के संचालन के लिए कोई कुशल चालक मौजूद नहीं है। इस कारण यह प्रयोग में बहुत कम लाई जाती है।
विज्ञापन
दो साल पहले नगर पालिका की ओर से शहर की सड़कों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीन खरीदी गई थी। इस मशीन की खरीद पर नगर पालिका ने करीब 30 लाख रुपये खर्च किए थे। मगर हालत यह है कि जिस दिन से मशीन खरीदी गई, उस दिन से अब तक मात्र शहर की सड़कों पर 10-15 दिन ही यह नजर आई। रोड स्वीपिंग मशीन को शहीद उद्यान गार्डेन के गोदाम में खड़ा किया गया है। अब मशीन में जंग लगने लगी है। जबकि शहर की सड़कों पर धूल उड़ने से लोगों को परेशानी हो रही है।
विज्ञापन
इस साल भले ही कागज पर रोड स्वीपिंग मशीन को चलाने के लिए लिखापढ़ी की गई हो, लेकिन एक दिन भी सड़क पर मशीन सड़क पर चलते नहीं दिखी। अफसरों का तर्क रहता है कि मशीन के संचालन के लिए कोई कुशल चालक मौजूद नहीं है। इस कारण यह प्रयोग में बहुत कम लाई जाती है।
विज्ञापन