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बैंकों में उमड़ी ग्राहकों की भीड़
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crowed of account holders in banks
- फोटो : PRATAPGARH
लॉकडाउन के दौरान रुपये निकालने वाले ग्राहकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जबकि जमा करने वाले गिने-चुने लोग पहुंच रहे हैं। इससे शहर और ग्रामीण इलाकों में नगदी का संकट गहरा गया है। ग्रामीण इलाकों की शाखाओं में रुपये खत्म होने से खाताधारकों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
लॉकडाउन के 14वें दिन शहर और गांव की बैंक शाखाओं के साथ ही टाइनी शाखाओं में रुपये निकालने वाले ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक उमड़ने वाली भीड़ सिर्फ रुपये लेने के लिए पहुंच रही है। शहर की बैंकों में भीड़ को रोकने के लिए अंकों का रोस्टर लागू किया गया है। नौ अप्रैल तक चलने वाले रोस्टर से बैंक कर्मचारी राहत की सांस ले रहे हैं। मगर ग्रामीण इलाकों में हाल यह है कि सुबह से लाइन में खडे़ होने वाले ग्राहकों को दोपहर बाद मुख्यालय से कैश वैन आने पर ही रुपये मिल रहे हैं।
जनधन, विधवा, वृद्धावस्था, दिव्यांग, पारिवारिक पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या अधिक है। हालांकि यह लाभार्थी पांच सौ से पांच हजार रुपये ही निकाल रहे हैं। मगर इनकी संख्या अधिक होने के कारण बैंकों में सामाजिक दूरी का फार्मूला ध्वस्त हो गया है। बैंकों से रुपये निकालने वालों की संख्या अधिक होने से नगदी का संकट गहरा गया है। शहर और गांव की शाखाओं में रुपये के लिए बैंक अफसरों को भी जुगाड़ खोजना पड़ रहा है।
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शहर और ग्रामीण इलाकों की बैंक शाखाओं में जब ग्राहकों को रुपये देने के लिए खजाना खाली हो जाता है। तो वह गैस एजेंसी संचालक और पेट्रोलपंप संचालकों से फोन कर कैश की मांग करते हैं। इससे खाताधारकों की मांग पूरी होती है।
शहर में कर्मचारी और व्यवसायी बैंकों से अधिक रुपये निकाल रहे हैं। हालांकि इस समय रुपये का खर्च केवल जीवन यापन तक ही सीमित है। मगर लोग सावधानी के चलते बैंकों से रुपये निकाल रहे है। किसी प्रकार की असुविधा होने पर ऐन वक्त पर निपटा जा सके।
शहर के एटीएम में रुपये भरे हुए हैं। दरअसल में गांव के लोग शहर नहीं आ पा रहे हैं। इससे वह शहर के एटीएम से रुपये भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे शहर के लोगों को नगदी की कोई खास समस्या नहीं है।
लॉकडाउन के दौरान रुपये जमा करने वालों की संख्या बेहद कम और निकालने वालों की संख्या बढ़ गई है। बैंकों को मांग के अनुरूप कैश मुहैया कराया जा रहा है। अभी कैश की कोई दिक्कत नहीं है, मगर पूरी स्थिति से मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है।
जीपी निगम, चीफ मैनेजर, एसबीआई
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लॉकडाउन के 14वें दिन शहर और गांव की बैंक शाखाओं के साथ ही टाइनी शाखाओं में रुपये निकालने वाले ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक उमड़ने वाली भीड़ सिर्फ रुपये लेने के लिए पहुंच रही है। शहर की बैंकों में भीड़ को रोकने के लिए अंकों का रोस्टर लागू किया गया है। नौ अप्रैल तक चलने वाले रोस्टर से बैंक कर्मचारी राहत की सांस ले रहे हैं। मगर ग्रामीण इलाकों में हाल यह है कि सुबह से लाइन में खडे़ होने वाले ग्राहकों को दोपहर बाद मुख्यालय से कैश वैन आने पर ही रुपये मिल रहे हैं।
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जनधन, विधवा, वृद्धावस्था, दिव्यांग, पारिवारिक पेंशन पाने वाले लाभार्थियों की संख्या अधिक है। हालांकि यह लाभार्थी पांच सौ से पांच हजार रुपये ही निकाल रहे हैं। मगर इनकी संख्या अधिक होने के कारण बैंकों में सामाजिक दूरी का फार्मूला ध्वस्त हो गया है। बैंकों से रुपये निकालने वालों की संख्या अधिक होने से नगदी का संकट गहरा गया है। शहर और गांव की शाखाओं में रुपये के लिए बैंक अफसरों को भी जुगाड़ खोजना पड़ रहा है।
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शहर और ग्रामीण इलाकों की बैंक शाखाओं में जब ग्राहकों को रुपये देने के लिए खजाना खाली हो जाता है। तो वह गैस एजेंसी संचालक और पेट्रोलपंप संचालकों से फोन कर कैश की मांग करते हैं। इससे खाताधारकों की मांग पूरी होती है।
शहर में कर्मचारी और व्यवसायी बैंकों से अधिक रुपये निकाल रहे हैं। हालांकि इस समय रुपये का खर्च केवल जीवन यापन तक ही सीमित है। मगर लोग सावधानी के चलते बैंकों से रुपये निकाल रहे है। किसी प्रकार की असुविधा होने पर ऐन वक्त पर निपटा जा सके।
शहर के एटीएम में रुपये भरे हुए हैं। दरअसल में गांव के लोग शहर नहीं आ पा रहे हैं। इससे वह शहर के एटीएम से रुपये भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इससे शहर के लोगों को नगदी की कोई खास समस्या नहीं है।
लॉकडाउन के दौरान रुपये जमा करने वालों की संख्या बेहद कम और निकालने वालों की संख्या बढ़ गई है। बैंकों को मांग के अनुरूप कैश मुहैया कराया जा रहा है। अभी कैश की कोई दिक्कत नहीं है, मगर पूरी स्थिति से मुख्यालय को अवगत कराया जा चुका है।
जीपी निगम, चीफ मैनेजर, एसबीआई