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अस्पताल में प्रसूता की मौत, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Fri, 10 Apr 2015 12:55 AM IST
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प्रतापगढ़। प्रसव बाद संग्रामगढ़ से रेफर होकर जिला महिला अस्पताल आई प्रसूता की इलाज के दौरान गुरुवार देर रात मौत हो गई। डॉक्टर पर पैसे की मांग व लापरवाही का आरोप लगा परिजनों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस पहुंचने पर मामला शांत हुआ।
मानिकपुर के ऐंठू पूरेलालसाहब का पुरवा निवासी मनोज की पत्नी रेनू (22) को गुरुवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन डिलेवरी के लिए उसे संग्रामगढ़ स्थित अस्पताल ले गए। वहां पर रेनू दोपहर करीब दो बजे एक बच्चे को जन्म दी। ब्लीडिंग अधिक होने से प्रसूता की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में प्रसूता को वहां से जिला महिला अस्पताल के लिए डॉक्टरों ने रेफर कर दिया।
उसके देवर नीरज ने बताया कि शाम करीब पांच बजे वह भारी रेनू को जिला महिला अस्पताल में भर्ती किया। आरोप है कि भर्ती करते ही डॉक्टरों ने खून की कमी बता पैसे की मांग की। असमर्थता जताने पर इलाज में लापरवाही बरती गई। जिसकी वजह से उसकी भाभी की मौत हो गई। प्रसूता की अस्पताल में मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। माहौल बिगड़ते देख सीएमएस डॉ. संतोष तिवारी ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंचने के बाद मामला शांत हो गया। नवजात पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।
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प्रसूता रेनू की मौत के बाद उसके बच्चे की परवरिश को लेकर परिजनों में चिंता व्याप्त है। नवाजात को गोद में लेकर उसकी चाची बिलखती रही। परिजनों का कहना था कि यदि इलाज ठीक से हुआ होता तो रेनू की जान न जाती।
प्रसूता संग्रामगढ़ से रेफर होकर शाम को आई थी। उसके पास कोई जांच रिपोर्ट नहीं थी। ब्लड जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट आने के पहले ब्लीडिंग ज्यादा होने के कारण उसकी मौत हो गई। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
डॉ. संतोष तिवारी
सीएमएस जिला महिला अस्पताल
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मानिकपुर के ऐंठू पूरेलालसाहब का पुरवा निवासी मनोज की पत्नी रेनू (22) को गुरुवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजन डिलेवरी के लिए उसे संग्रामगढ़ स्थित अस्पताल ले गए। वहां पर रेनू दोपहर करीब दो बजे एक बच्चे को जन्म दी। ब्लीडिंग अधिक होने से प्रसूता की हालत बिगड़ गई। गंभीर हालत में प्रसूता को वहां से जिला महिला अस्पताल के लिए डॉक्टरों ने रेफर कर दिया।
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उसके देवर नीरज ने बताया कि शाम करीब पांच बजे वह भारी रेनू को जिला महिला अस्पताल में भर्ती किया। आरोप है कि भर्ती करते ही डॉक्टरों ने खून की कमी बता पैसे की मांग की। असमर्थता जताने पर इलाज में लापरवाही बरती गई। जिसकी वजह से उसकी भाभी की मौत हो गई। प्रसूता की अस्पताल में मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। माहौल बिगड़ते देख सीएमएस डॉ. संतोष तिवारी ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंचने के बाद मामला शांत हो गया। नवजात पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है।
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प्रसूता रेनू की मौत के बाद उसके बच्चे की परवरिश को लेकर परिजनों में चिंता व्याप्त है। नवाजात को गोद में लेकर उसकी चाची बिलखती रही। परिजनों का कहना था कि यदि इलाज ठीक से हुआ होता तो रेनू की जान न जाती।
प्रसूता संग्रामगढ़ से रेफर होकर शाम को आई थी। उसके पास कोई जांच रिपोर्ट नहीं थी। ब्लड जांच के लिए भेजा गया था। रिपोर्ट आने के पहले ब्लीडिंग ज्यादा होने के कारण उसकी मौत हो गई। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
डॉ. संतोष तिवारी
सीएमएस जिला महिला अस्पताल