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वादी-प्रतिवादी की मौत नहीं हो सका फैसला
अमर उजाला ब्यूूराे प्रतापगढ़
Updated Fri, 23 Dec 2016 11:23 PM IST
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दीवानी न्यायालयों में मुकदमे इतने अधिक हैं कि उनमें तारीख लगाने के सिवा कोई चारा नहीं होता है। रानीगंज तहसील के भीट गांव का एक जमीन का विवाद 27 साल से चल रहा है। जिसमें वादी और प्रतिवादी की मृत्यु हो चुकी है, मगर इसके बाद भी मुकदमे में कोई फैसला नहीं हुआ है। कभी स्थगन आदेश तो कभी नोटिस और सम्मन के दौर तक ही मामला पहुंचा है। वर्तमान में जिस कोर्ट में मुकदमा है वह अभी खाली चल रही है।
पीड़ितों को न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है, सरकार में बैठे लोग भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। सेशन और लोअर कोर्ट में मुकदमे इतने अधिक हैं कि उनकी सुनवाई करना कोर्ट के लिए कोई आसान कार्य नहीं है। रानीगंज तहसील के भीट गांव निवासी रामसमुझ ने गांव के ही शीतलाचरण के खिलाफ आबादी के विवाद का मुकदमा दायर कर जमीन को अपने कब्जे में बताया। अक्तूबर 1989 में सिविल कोर्ट में दायर मुकदमे के वादी रामसमुझ और प्रतिवादी शीतलाचरण की मौत हो गई है। अब उनकी औलाद इस मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि वर्तमान में जिस अदालत में यह मामला विचाराधीन है, वह लंबे समय से खाली चल रही है। सवाल यह उठता है कि तारीख-दर-तारीख अगर इसी प्रकार लगती रही, तो व्यक्ति को न्याय की उम्मीद भी टूट सकती है।
पीड़ितों को न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है, सरकार में बैठे लोग भी इस दिशा में कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। सेशन और लोअर कोर्ट में मुकदमे इतने अधिक हैं कि उनकी सुनवाई करना कोर्ट के लिए कोई आसान कार्य नहीं है। रानीगंज तहसील के भीट गांव निवासी रामसमुझ ने गांव के ही शीतलाचरण के खिलाफ आबादी के विवाद का मुकदमा दायर कर जमीन को अपने कब्जे में बताया। अक्तूबर 1989 में सिविल कोर्ट में दायर मुकदमे के वादी रामसमुझ और प्रतिवादी शीतलाचरण की मौत हो गई है। अब उनकी औलाद इस मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि वर्तमान में जिस अदालत में यह मामला विचाराधीन है, वह लंबे समय से खाली चल रही है। सवाल यह उठता है कि तारीख-दर-तारीख अगर इसी प्रकार लगती रही, तो व्यक्ति को न्याय की उम्मीद भी टूट सकती है।
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