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कोटेदार की मौत पर सुलग उठा घुइसरनाथ

Wed, 17 Jun 2015 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़ Updated Wed, 17 Jun 2015 11:35 PM IST
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Kotedar 's death raised smoldering Guisrnath
बुधवार को कोटेदार की संदिग्ध दशा में जंगल में लाश मिलने के बाद घुइसरनाथ धाम सुलग उठा। आक्रोशित लोगों ने जाम लगाने के साथ ही तोड़फोड़ और बवाल करना शुरू कर दिया। कोटेदार के परिजनों ने प्रधान के घरवालों पर उसकी हत्या करने का आरोप लगाते हुए आगजनी और पथराव शुरू कर दिया। प्रधान के घर और वाहनों को आग के हवाले कर दिया। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस से भी ग्रामीण भिड़ गए। हालत बिगड़ते देख आननफानन में कई थानों की फोर्स बुला ली गई। पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज के साथ ही कई राउंड हवाई फायरिंग और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। करीब दो घंटे तक पुलिस और ग्रामीणों के बीच गुरिल्ला युद्ध चलता रहा। पड़ोस के जिले रायबरेली, सुल्तानपुर, इलाहाबाद से पुलिस अफसर पीएसी, आरएएफ तथा सीआरपीएफ की कई टुकड़ियों के साथ पहुंचे। इलाहाबाद जोन के आईजी, डीआईजी के साथ ही डीएम, एसपी भी पहुंच गए। तब जाकर किसी तरह हालत पर काबू पाया जा सका।
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सांगीपुर थाना क्षेत्र के कुंभापुर (घुइसरनाथ धाम) में बुधवार सुबह करीब दस बजे कोटेदार रमेश वर्मा (35) का शव संदिग्ध दशा में गांव के करीब सरपत में मिला। पिता रामकुमार के मुताबिक रमेश सुबह करीब सात बजे मंदिर में जल चढ़ाने गया था। करीब एक घंटे बाद वह मंदिर से लौटा। इस बीच उसके किसी परिचित का फोन आया। रमेश ने फोन पर तुरंत पहुंचने की बात कही और घर से निकल पड़ा। इसके बाद वह लौटकर नहीं आया। करीब दस बजे मवेशी चरा रहे कुछ ग्रामीणों की नजर सरपतों के झुरमुट में मूर्छित पड़े रमेश पर पड़ी। इसकी जानकारी मिलते ही परिजन भागकर मौके पर पहुंचे। आननफानन में उसे लेकर लालगंज सीएचसी आए। यहां चिकित्सकों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया। इसके बाद रोते बिलखते घरवाले उसका शव लेकर घर पहुंचे। इस बीच गांव में कोटेदारी के विवाद में उसकी हत्या की खबर फैल गई। बड़ी संख्या में लोग उसके घर पर जमा हो गए। गुस्साए ग्रामीण मृतक का शव लेकर सांगीपुर-लालगंज हाइवे पर स्थित प्रधान सावित्री के घर के सामने पहुंचे और जाम लगा दिया। उग्र लोग प्रधान के जेठ शिवदास पर हत्या का आरोप लगाने लगे। इस पर शिवदास व उसके परिजन भी उत्तेजित हो गए। दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई। इससे कई लोग लहूलुहान हो गए। बवाल की सूचना पर सांगीपुर एसओ एमपी तिवारी मय फोर्स मौके पर पहुंचे। पुलिस के पहुंचने पर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। ग्रामीणों ने प्रधानपति शंकरदास के घर में आग लगा दी। घर के सामने खड़े दो ट्रक, पांच बाइक को आग के हवाले कर दिया।
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एसओ ने फौरन बवाल बढ़ने की सूचना लालगंज सीओ को दी। इस पर सीओ सीताराम, लालगंज कोतवाल सभाजीत मिश्र के साथ मौके पर पहुंचे। सीओ ने तत्काल संग्रामगढ़ एसओ वीरेंद्र तिवारी व उदयपुर एसओ संतोष दुबे को भी सर्किल पुलिस के साथ मौके पर बुला लिया। सीओ के निर्देश पर रेहुआ लालगंज में तैनात पीएसी की टुकड़ी भी यहां आ पहुंची। इसके बावजूद गुस्साए लोगों का तांडव थम न सका। लोगों ने शंकरदास व उसके भाई रामदास की गोदामों में भी आग लगा दी। गोदाम में जलता गैस सिलेंडर फेंके जाने से आग की लपटें विकराल हो उठीं। घी व तेल में आग पकड़ने के बाद बाजार की स्थिति भयावह हो उठी। सूचना पर फायर बिग्रेड की टीम सांगीपुर से यहां पहुंची, लेकिन उपद्रवी उसे आगे नहीं बढ़ने दे रहे थे।
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पत्थरबाजी में संग्रामगढ़ फायर ब्रिगेड का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा फायर ब्रिगेड का सिपाही सुभाष सिंह, एएसपी दिनेश सिंह, एसपी के पीआरओ दीनदयाल यादव, सांगीपुर एसओ एमपी तिवारी, लालगंज कोतवाल सभाजीत मिश्र, एसआई धनंजय सिंह, आरक्षी बृजकिशोर अवस्थी, होमगार्ड वीरेंद्रनाथ शुक्ल, इंद्रेश द्विवेदी समेत दर्जनभर पुलिस कर्मी भी चुटहिल हो गए। बाजार में आगजनी व ईंट-पत्थर से खलबल मच गई। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने हवाई फायरिंग के साथ रबड़ की गोलियां दागनीं शुरू कर दीं। उपद्रवियों को काबू में करने के लिए पुलिस कर्मियों ने आंसू गैस छोड़ना शुरू कर दिया। स्थिति बेकाबू होने की सूचना पाकर डीएम अमृत त्रिपाठी व एसपी बलिकरन सिंह यादव ने भी पहुंचकर मोर्चा संभाला। सूचना पाकर आईजी बृजभूषण, डीआईजी भगवान स्वरूप, एसडीएम वाईबी सिंह भी मौके पर पहुंचे। आईजी के निर्देश पर इलाहाबाद से आरएएफ व सीआरएफ तथा पीएसी की कई टुकड़ियां भी आ गईं। तब जाकर हालात पर काबू पाया जा सका। देर रात तक अधिकारी गांव के उपद्रवियों की धरपकड़ करते रहे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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