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गया था वकालत की पढ़ाई करने, घर आई लाश
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:34 PM IST
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इलाहाबाद में वकालत की पढ़ाई कर रहे दिलीप का शव गांव पहुंचा तो परिजनों में चीखपुकार मच गई। शनिवार की शाम हुए विवाद के बारे में घरवालों को भी ठीक से जानकारी नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि इतना बड़ा कसूर तो उनके बेटे का नहीं था कि उसकी पीटकर हत्या कर दी गई। उसका शव देखकर गांव के लोगों के भी आंसू छलक पड़े। पूर्व प्रमुख बबलू सिंह ने मौके पर पहुंचकर अंत्येष्टि का प्रबंध कराया। इसके बाद दोपहर में उसका अंतिम संस्कार जहानाबाद घाट पर किया गया।
हथिगवां थाना क्षेत्र के भुलसा बछरौली गांव निवासी रामलाल सरोज का परिवार पढ़ा-लिखा है। उनके तीन बेटों में बड़ा बेटा महेश सरोज रायबरेली में सांख्यिकी अधिकारी है। मझला बेटा प्रदीप भी रायबरेली में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है। सबसे छोटा बेटा दिलीप इलाहाबाद में रहकर वकालत की पढ़ाई कर रहा था। देर रात परिजनों को दिलीप के साथ मारपीट होने की सूचना मिली तो वह भागकर इलाहाबाद पहुंचे। इसके बाद किसी की दिलीप से बातचीत नहीं हो पाई। चिकित्सक उसे कोमा में बताते रहे। बाद में मृत घोषित कर दिया। रविवार को उसका शव गांव पहुंचा तो चीत्कार मच गई। गांववालों की भी आंखें छलक पड़ीं।
मां-बाप का कहना था कि उनके बेटे की इतनी बड़ी दुश्मनी तो किसी से नहीं हो सकती थी कि उसकी पीटकर हत्या कर दी जाती। शव दोपहर में पहुंचा तो गांव सहित आसपास के गांव के लोग भी जुट गए। एक बार लोग आक्रोशित हो गए। शव लेकर प्रदर्शन की तैयारी शुरू हो गई, लेकिन पूर्व प्रमुख बबलू सिंह ने सभी को समझाया। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता देते हुए शव का अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान हथिगवां पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। घटना को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश रहा।
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हथिगवां थाना क्षेत्र के भुलसा बछरौली गांव निवासी रामलाल सरोज का परिवार पढ़ा-लिखा है। उनके तीन बेटों में बड़ा बेटा महेश सरोज रायबरेली में सांख्यिकी अधिकारी है। मझला बेटा प्रदीप भी रायबरेली में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है। सबसे छोटा बेटा दिलीप इलाहाबाद में रहकर वकालत की पढ़ाई कर रहा था। देर रात परिजनों को दिलीप के साथ मारपीट होने की सूचना मिली तो वह भागकर इलाहाबाद पहुंचे। इसके बाद किसी की दिलीप से बातचीत नहीं हो पाई। चिकित्सक उसे कोमा में बताते रहे। बाद में मृत घोषित कर दिया। रविवार को उसका शव गांव पहुंचा तो चीत्कार मच गई। गांववालों की भी आंखें छलक पड़ीं।
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मां-बाप का कहना था कि उनके बेटे की इतनी बड़ी दुश्मनी तो किसी से नहीं हो सकती थी कि उसकी पीटकर हत्या कर दी जाती। शव दोपहर में पहुंचा तो गांव सहित आसपास के गांव के लोग भी जुट गए। एक बार लोग आक्रोशित हो गए। शव लेकर प्रदर्शन की तैयारी शुरू हो गई, लेकिन पूर्व प्रमुख बबलू सिंह ने सभी को समझाया। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता देते हुए शव का अंतिम संस्कार कराया। इस दौरान हथिगवां पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। घटना को लेकर गांव के लोगों में आक्रोश रहा।
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