{"_id":"59c15baa4f1c1b2e688b581e","slug":"goes-for-investigation","type":"story","status":"publish","title_hn":"जांच के लिए दीपक के घर पहुंचे सीओ पट्टी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
जांच के लिए दीपक के घर पहुंचे सीओ पट्टी
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Tue, 19 Sep 2017 11:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कंधई थाने में पुलिस हिरासत में दीपक के जहर खाने के बाद हुई मौत के मामले में मंगलवार को सीओ पट्टी उसके घर पहुुंचे। उनके साथ हमदर्दी जताने के बहाने परिजनों पर दबाव बनाने के लिए कंधई पुलिस भी पहुंच गई। जिसमे ऐसे पुलिसकर्मी भी थे जो उस वक्त थाने में मौजूद थे, जब दीपक ने जहर खाया था। परिजनों ने साफ कहा कि उन्हें इंसाफ चाहिए।
बतादें कि कंधई थाना क्षेत्र के अस्थरा निवासी दीपक कुमार (20) पुत्र रामकुमार का पत्नी से विवाद चल रहा था। शनिवार को कंधई पुलिस ने उसे समाधान दिवस पर पत्नी दीपिका के विवाद को सुलझाने के लिए थाने पर बुलाया था। पिता रामकुमार की मानें तो वह दस बजे थाने पर पहुंच गया। जहां पुलिसकर्मियों ने थाने के चौकीदार दीपक के ससुर रमाकांत निवासी पिपरी खालसा की मिलीभगत से पीटा गया और पत्नी दीपिका ने पति के साथ जाने से ही इंकार कर दिया। शाम को परिजनों की शिकायत के बाद उसे डायल 100 की टीम 6 बजे थाने ले आई थी। दीपक के पीछे-पीछे पिता व भाई भी थाने पहुंचे थे। पिता रामकुमार का आरोप है कि नीम के चबूतरे पर सभी बैठे थे, लगभग सवा आठ बजे एक सिपाही आया और उसने दीपक को पीटना शुरू कर दिया। सभी को बाहर भगा दिया गया था। सिपाही की पिटाई से आहत होकर दीपक ने थाने के भीतर ही रात नौ बजे के बाद जहर खा लिया था। दीपक की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। रात लगभग 2.30 बजे उसकी मौत हो गई। उसकी मौत की जानकारी परिवार के लोगों को रविवार की सुबह हो सकी थी। रामकुमार का आरोप है कि पत्नी के वियोग व पुलिस पिटाई से आहत होकर दीपक ने थाने में जहर खाया है। इस मामले में मृतक दीपक के पिता रामकुमार की तहरीर पर पुलिस ने पत्नी दीपिका समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। मंगलवार को सीओ पट्टी अस्थरा पहुंचे। उनके पीछे कंधई पुलिस भी परिवार के लोगों से झूठी हमदर्दी जताने के बहाने दबाव बनाने के लिए पहुंच गई। ग्रामीणों की मानेें तो घर पर पहुंचे दो सिपाही उस वक्त थाने पर मौजूद थे, जब दीपक को सिपाही ने पीटा था और उन लोगों को भगाया था। उन लोगों के भय के कारण परिवार के लोग सीओ के सामने अपनी बात खुलकर नहीं रख सके। परिवार के लोगों ने कहा कि उन लोगों को इंसाफ चाहिए। सीओ पट्टी ने बताया कि वह परिवार के लोगों से वह मिलने गए थे। जांच करने नहीं। सवाल यह उठता है कि अभी तक पीड़ितों से दूरी बनाने वाली पुलिस कब से रहमदिल हो गई। चर्चाओं पर यकीन करें तो मृतक के परिजनों को पुलिस यह संदेश देने गई थी कि वह उनके साथ हैं। ताकि वे लोग पुलिसकर्मियों के खिलाफ कुछ न बोलें।
विज्ञापन
बतादें कि कंधई थाना क्षेत्र के अस्थरा निवासी दीपक कुमार (20) पुत्र रामकुमार का पत्नी से विवाद चल रहा था। शनिवार को कंधई पुलिस ने उसे समाधान दिवस पर पत्नी दीपिका के विवाद को सुलझाने के लिए थाने पर बुलाया था। पिता रामकुमार की मानें तो वह दस बजे थाने पर पहुंच गया। जहां पुलिसकर्मियों ने थाने के चौकीदार दीपक के ससुर रमाकांत निवासी पिपरी खालसा की मिलीभगत से पीटा गया और पत्नी दीपिका ने पति के साथ जाने से ही इंकार कर दिया। शाम को परिजनों की शिकायत के बाद उसे डायल 100 की टीम 6 बजे थाने ले आई थी। दीपक के पीछे-पीछे पिता व भाई भी थाने पहुंचे थे। पिता रामकुमार का आरोप है कि नीम के चबूतरे पर सभी बैठे थे, लगभग सवा आठ बजे एक सिपाही आया और उसने दीपक को पीटना शुरू कर दिया। सभी को बाहर भगा दिया गया था। सिपाही की पिटाई से आहत होकर दीपक ने थाने के भीतर ही रात नौ बजे के बाद जहर खा लिया था। दीपक की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया। रात लगभग 2.30 बजे उसकी मौत हो गई। उसकी मौत की जानकारी परिवार के लोगों को रविवार की सुबह हो सकी थी। रामकुमार का आरोप है कि पत्नी के वियोग व पुलिस पिटाई से आहत होकर दीपक ने थाने में जहर खाया है। इस मामले में मृतक दीपक के पिता रामकुमार की तहरीर पर पुलिस ने पत्नी दीपिका समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। मंगलवार को सीओ पट्टी अस्थरा पहुंचे। उनके पीछे कंधई पुलिस भी परिवार के लोगों से झूठी हमदर्दी जताने के बहाने दबाव बनाने के लिए पहुंच गई। ग्रामीणों की मानेें तो घर पर पहुंचे दो सिपाही उस वक्त थाने पर मौजूद थे, जब दीपक को सिपाही ने पीटा था और उन लोगों को भगाया था। उन लोगों के भय के कारण परिवार के लोग सीओ के सामने अपनी बात खुलकर नहीं रख सके। परिवार के लोगों ने कहा कि उन लोगों को इंसाफ चाहिए। सीओ पट्टी ने बताया कि वह परिवार के लोगों से वह मिलने गए थे। जांच करने नहीं। सवाल यह उठता है कि अभी तक पीड़ितों से दूरी बनाने वाली पुलिस कब से रहमदिल हो गई। चर्चाओं पर यकीन करें तो मृतक के परिजनों को पुलिस यह संदेश देने गई थी कि वह उनके साथ हैं। ताकि वे लोग पुलिसकर्मियों के खिलाफ कुछ न बोलें।
विज्ञापन