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रूट बदलकर साजिश के तहत की गई वारदात
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Mon, 30 Nov 2015 11:34 PM IST
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गुटखा व्यापारी अमित की मौत मामूली दुर्घटना नहीं है। हत्या और उसके बाद लूट की वारदात के पीछे सोची समझी साजिश की बू आ रही है। अक्सर सीधे निर्मल तिराहे से रेलवे स्टेशन की ओर वाली सड़क पकड़ने के बजाए अमित ने पुराना मालगोदाम वाला रूट क्यों पकड़ा। घटना के फौरन बाद अंधेरे का लाभ उठाकर मौके पर पहुंचने और अचानक गायब होने वाले लोग कौन थे। चर्चा है कि घटनास्थल पर सबूत मिटाने का भी प्रयास किया गया। घटना में सिलसिलेवार सामने आए ये ऐसे सवाल हैं जिनकी तरफ पुलिस का भी ध्यान नहीं गया है।
परिजनों का कहना है कि गुटखा के व्यवसाय के सिलसिले में अमित अक्सर कानपुर जाया करता था। वह नौकर अबुल हसन को साथ लेकर घर से निकलता था। निर्मल तिराहे से होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचता था। सोमवार को भी उसको उसी रास्ते से जाना था। मगर पता नहीं कैसे वह निर्मल तिराहे से मुड़ने के बजाए उसके पहले वाले तिराहे पुराना मालगोदाम से मुड़ गया। इस बारे में नौकर भी कुुछ बोल नहीं रहा है। अबुल के अनुसार बोलेरो से टक्कर के बाद वह और अमित दोनों सड़क पर गिर पड़े। उसके बाद से नोटों से भरा बैग और अटैची गायब हो गई। अबुल के अनुसार उसे कुछ नहीं मालूम वहां पर कोई दूसरा नहीं आया था। सवाल यह है कि जब वहां पर कोई और नहीं था तो बैग और अटैची कहां गई। चर्चा है कि घटना के समय अंधेरा था। बोलेरो के जाने के बाद कई लोग अंधेरे का लाभ उठाकर वहां पर पहुंचे और सामान लेकर फरार हो गए। इसकी चर्चा जोर-शोर से हो रही है।
हो सकता हो लुटेरों के बारे में अबुल हसन को पता है मगर वह अपना मुंह नहीं खोल रहा हो। ये भी हो सकता है कि इस वारदात में आस-पास के ही किसी व्यक्ति का हाथ हो। टक्कर मारने वाली बोलेरो पोर्टिको की तरफ से आई थी। इस लिहाज से परिसर में यात्रियों के इंतजार में खडे़ टेपो और मैजिक चालकों को भी वारदात वाली बोलेरो के बारे में पता होगा। जिस समय की वारदात है उस समय इंटरसिटी से कानपुर जाने वाले यात्रियों की भी भीड़ रहती है। जो लोग परिजनों को स्टेशन पर पहुंचाने आए होंगे उनको भी बोलेरो के बारे में पता होगा। परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।
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परिजनों का कहना है कि गुटखा के व्यवसाय के सिलसिले में अमित अक्सर कानपुर जाया करता था। वह नौकर अबुल हसन को साथ लेकर घर से निकलता था। निर्मल तिराहे से होते हुए रेलवे स्टेशन पहुंचता था। सोमवार को भी उसको उसी रास्ते से जाना था। मगर पता नहीं कैसे वह निर्मल तिराहे से मुड़ने के बजाए उसके पहले वाले तिराहे पुराना मालगोदाम से मुड़ गया। इस बारे में नौकर भी कुुछ बोल नहीं रहा है। अबुल के अनुसार बोलेरो से टक्कर के बाद वह और अमित दोनों सड़क पर गिर पड़े। उसके बाद से नोटों से भरा बैग और अटैची गायब हो गई। अबुल के अनुसार उसे कुछ नहीं मालूम वहां पर कोई दूसरा नहीं आया था। सवाल यह है कि जब वहां पर कोई और नहीं था तो बैग और अटैची कहां गई। चर्चा है कि घटना के समय अंधेरा था। बोलेरो के जाने के बाद कई लोग अंधेरे का लाभ उठाकर वहां पर पहुंचे और सामान लेकर फरार हो गए। इसकी चर्चा जोर-शोर से हो रही है।
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हो सकता हो लुटेरों के बारे में अबुल हसन को पता है मगर वह अपना मुंह नहीं खोल रहा हो। ये भी हो सकता है कि इस वारदात में आस-पास के ही किसी व्यक्ति का हाथ हो। टक्कर मारने वाली बोलेरो पोर्टिको की तरफ से आई थी। इस लिहाज से परिसर में यात्रियों के इंतजार में खडे़ टेपो और मैजिक चालकों को भी वारदात वाली बोलेरो के बारे में पता होगा। जिस समय की वारदात है उस समय इंटरसिटी से कानपुर जाने वाले यात्रियों की भी भीड़ रहती है। जो लोग परिजनों को स्टेशन पर पहुंचाने आए होंगे उनको भी बोलेरो के बारे में पता होगा। परिजनों का आरोप है कि घटनास्थल से साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।
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