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नौकरी दिलाने वाला जालसाज हत्थे चढ़ा
ब्यूरो/अमर उजाला प्रतापगढ़
Updated Thu, 07 May 2015 11:33 PM IST
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रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर अधिवक्ता के भाई को झांसा देकर जालसाज ने पांच लाख रुपए हड़प लिए। नौकरी न दिला पाने पर रकम लौटाने की बात हुई तो डेढ़ लाख के तीन चेक दिए। जो बैंक में लगाते ही बाउंस हो गए। जालसाज को पकड़कर पुलिस पूछताछ कर रही है।
नगर कोतवाली के कमास निवासी महावीर पाल ने अजीत नगर के रहने वाले अधिवक्ता हरिओम पांडेय के भाई अंबर प्रसाद को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपए कई वर्ष पहले लिए थे। इस बीच वह नौकरी न दिला सका तो अंबर रुपए लौटाने के लिए उससे कहने लगा। आरोप है कि तीन चेक 50-50 हजार के उसने दिए थे। जो बैंक में लगाने के बाद बाउंस हो गए।
गुरुवार को महावीर पुलिस लाइंस के पास लोगों ने पकड़ लिया। इसके बाद हरिओम समेत अन्य लोग पहुंचे और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उसके पास से पुलिस मित्र का कार्ड और अपना दल सदर विधानसभा के सचिव का परिचय पत्र मिला है। शहर कोतवाल बलिराम मिश्र ने बताया कि जालसाजी करने वाले महावीर से पूछताछ की जा रही है। उसने कई लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर अपना शिकार बनाया है।
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कमास निवासी महावीर पाल को पूर्व एसपी अनंतदेव के समय चिलबिला चौकी प्रभारी ने पुलिसमित्र बनाया था। लोगों की मानें तो महावीर पुलिसमित्र का कार्ड दिखाकर लोगों पर रुआब गांठता था। हालांकि गुरुवार को पुलिस के शिकंजे में पहुंचने के बाद उसकी बोलती बंद थी।
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नगर कोतवाली के कमास निवासी महावीर पाल ने अजीत नगर के रहने वाले अधिवक्ता हरिओम पांडेय के भाई अंबर प्रसाद को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपए कई वर्ष पहले लिए थे। इस बीच वह नौकरी न दिला सका तो अंबर रुपए लौटाने के लिए उससे कहने लगा। आरोप है कि तीन चेक 50-50 हजार के उसने दिए थे। जो बैंक में लगाने के बाद बाउंस हो गए।
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गुरुवार को महावीर पुलिस लाइंस के पास लोगों ने पकड़ लिया। इसके बाद हरिओम समेत अन्य लोग पहुंचे और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। उसके पास से पुलिस मित्र का कार्ड और अपना दल सदर विधानसभा के सचिव का परिचय पत्र मिला है। शहर कोतवाल बलिराम मिश्र ने बताया कि जालसाजी करने वाले महावीर से पूछताछ की जा रही है। उसने कई लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर अपना शिकार बनाया है।
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कमास निवासी महावीर पाल को पूर्व एसपी अनंतदेव के समय चिलबिला चौकी प्रभारी ने पुलिसमित्र बनाया था। लोगों की मानें तो महावीर पुलिसमित्र का कार्ड दिखाकर लोगों पर रुआब गांठता था। हालांकि गुरुवार को पुलिस के शिकंजे में पहुंचने के बाद उसकी बोलती बंद थी।