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शाखा प्रबंधक ने 56 लाख रुपये का किया घपला
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:01 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : indian express
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बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने 26 किसानों की फर्जी फाइल तैयार कराकर 56 लाख रुपये का घपला किया है। विजलेंस टीम की जांच में प्रथमदृष्टया इसका खुलासा हुआ है। हालांकि विजलेंस टीम अभी बैंक में रुककर मैनेजर के पूरे कार्यकाल की पत्रावलियों को जांच रही है। अफसरों का मानना है कि फर्जीवाड़े की संख्या अभी बढ़ सकती है।
संडवाचंद्रिका के कोठानेवढिया, पचखरा और सांगीपुर विकास खंड के कल्यानपुरकला, सरायलालशाह, सरुवा, नेवादा, पूरेनारायणदास गांव के 26 किसानों की फोटो और अभिलेख लगाकर 56 लाख रुपये का घपला किया है। इसका खुलासा विजलेंस टीम की जांच में हुआ है। अधिकारियों की मानें तो स्थानीय दलालों ने राशनकार्ड बनाने के बहाने से गरीब किसानों के अभिलेख एकत्रित करके ऋण की फर्जी फाइल तैयार करके रुपये का बंटवारा कर लिया था। इसका खुलासा उस समय हुआ, जब राजस्व कर्मी कर्जमाफी का सत्यापन करने गांव पहुंच गए। बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में तीन वर्षों तक तैनात रहे तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने 26 किसानों को बगैर कर्ज लिए ही कर्जदार बना दिया। मैनेजर के खेल का खुलासा बैंक अधिकारियों को छह माह पहले ही हो गया था। मगर वह मैनेजर के इस कारनामे को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। मगर जब जिला पहुंचा तो बैंक अधिकारी भी हरकत में आ गए। अधिकारियों की मानें तो फर्जीवाडे़ की परतें अभी और उधड़ने वाली है। विजलेंस टीम ने अभी तक सिर्फ आरोप लगाने वाले किसानों की है जांच ही है। मैनेजर के कार्यकाल में हुए सभी ऋण के फाइलों की जांच कराई जा रही है। अफसरों के मुताबित और भी फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
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संडवाचंद्रिका के कोठानेवढिया, पचखरा और सांगीपुर विकास खंड के कल्यानपुरकला, सरायलालशाह, सरुवा, नेवादा, पूरेनारायणदास गांव के 26 किसानों की फोटो और अभिलेख लगाकर 56 लाख रुपये का घपला किया है। इसका खुलासा विजलेंस टीम की जांच में हुआ है। अधिकारियों की मानें तो स्थानीय दलालों ने राशनकार्ड बनाने के बहाने से गरीब किसानों के अभिलेख एकत्रित करके ऋण की फर्जी फाइल तैयार करके रुपये का बंटवारा कर लिया था। इसका खुलासा उस समय हुआ, जब राजस्व कर्मी कर्जमाफी का सत्यापन करने गांव पहुंच गए। बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में तीन वर्षों तक तैनात रहे तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने 26 किसानों को बगैर कर्ज लिए ही कर्जदार बना दिया। मैनेजर के खेल का खुलासा बैंक अधिकारियों को छह माह पहले ही हो गया था। मगर वह मैनेजर के इस कारनामे को सार्वजनिक नहीं करना चाहते थे। मगर जब जिला पहुंचा तो बैंक अधिकारी भी हरकत में आ गए। अधिकारियों की मानें तो फर्जीवाडे़ की परतें अभी और उधड़ने वाली है। विजलेंस टीम ने अभी तक सिर्फ आरोप लगाने वाले किसानों की है जांच ही है। मैनेजर के कार्यकाल में हुए सभी ऋण के फाइलों की जांच कराई जा रही है। अफसरों के मुताबित और भी फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।
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