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जेल में सजायाफ्ता वृद्ध कैदी की मौत 17-42-38

Fri, 08 Dec 2017 12:35 AM IST
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:35 AM IST
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जेल में सजायाफ्ता वृद्ध कैदी की मौत 17-42-38
जेल में सजायाफ्ता वृद्ध कैदी की मौत
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जानलेवा हमले में सुनाई गई थी कैद की सजा
4 सितंबर को फिर पहुंचा था जेल, बीमारी के कारण अस्पताल की बैरक में चल रहा था उपचार
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिला कारागार में निरुद्ध सजायाफ्ता वृद्ध कैदी की बीमारी के चलते मौत हो गई। जानलेवा हमले के आरोपी वृद्ध को अदालत से सजा मिली थी। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पंचायतनामा भरने के बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पीएम के बाद जेल प्रशासन ने शव को परिजनों के हवाले कर दिया। मृतक कैदी काफी दिनों से बीमार चल रहा था।
जेठवारा थाना क्षेत्र के पूरनपुर खास निवासी भागीरथी (80) को पड़ोसी रामसुमेर के ऊपर 30 साल पहले जानलेवा हमले के आरोप में अदालत से सजा सुनाई गई थी। सजा के बाद भागीरथी सजा काटने के लिए जेल चला गया था। उसके दूसरे आरोपी साथी बरी हो गए थे। हाईकोर्ट से उसे राहत मिल गई थी। लेकिन पेशी पर न जाने के कारण वारंट जारी हो गया था। 4 सितंबर 2017 को फिर भागीरथी जेल पहुंच गया। उसकी तबीयत खराब थी। जिसके चलते उसे अस्पताल की बैरक में रखा गया था। गुरुवार की सुबह भागीरथी की तबीयत अधिक खराब हो गई। आनन-फानन में जेल प्रशासन उसे लेकर उपचार के लिए जिला अस्पताल भागा। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूत्रों की मानें तो भागीरथी की मौत जेल में ही हो गई थी। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस पहुुंची। अधिकारियों को मामले से अवगत कराया। कैदी के मौत की खबर के बाद जेल प्रशासन मेें हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर परिजन रोते बिलखते अस्पताल पहुंचे। इस बाबत जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी ने बताया कि भागीरथी अल्सर समेत कई गंभीर बीमारी से पीड़ित था। उसे अस्पताल की बैरक में रखा गया था। कुछ दिन पहले जिला अस्पताल भी इलाज के लिए भेजा गया था। वीडियोग्राफी के बीच डाक्टरों के पैनल ने मृत कैदी के शव का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद जेल प्रशासन ने परिजनों के हवाले शव कर दिया। परिजन रोते बिलखते शव लेकर घर चले गए।
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तीन दिन पहले बहुएं गई थीं मिलने
जिला कारागार में निरुद्ध कैदी भागीरथी से मिलने के लिए बहुएं निर्मला, यशोदा और शुक्लाइन मिलने गई थीं। मुलाकात के लिए दूसरे बंदी भागीरथी को उनके पास पकड़कर लाए थे। जिसके बाद बहुओं से उसकी मुलाकात हुई थी।
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पहले भी हो चुकी है बंदियों की मौत
जिला कारागार में पहले भी बंदियों की मौतें हो चुकी हैं। गत दिनों चोरी के मामले में जेल में निरुद्ध उत्तराखंड के बंदी सोनू की भी कुछ दिनों पहले मौत हो चुकी है। इसके अलावा इसी साल बीमारी से पीड़ित एक बंदी की इलाहाबाद में इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।


ड्यूटी से गायब चल रहा बंदीरक्षक निलंबित
रात में चेकिंग करने निकले जेल अधीक्षक , दो बंदीरक्षकों को थमाया आरोप पत्र
जेल से गैरहाजिर सफाईकर्मी पर भी गिरी गाज
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़।
जिला कारागार में तैनात बंदीरक्षक कई माह से गायब चल रहा था। जिसे निलंबित कर दिया गया। बुधवार की रात चेकिंग में निकले जेल अधीक्षक को दो बंदीरक्षक ड्यूटी के प्रति लापरवाह मिले। दोनों पबंदीरक्षकों को आरोप पत्र थमाया गया। काफी दिनों से गैरहाजिर चल रहे सफाईकर्मी पर जेल अधीक्षक की गाज गिरी। इस कार्रवाई से जेल में हड़कंप मचा रहा।

जिला कारागार का बुधवार की रात जेल अधीक्षक आरके त्रिपाठी ने जेलर के साथ निरीक्षण किया। देखा तो बैरक नंबर सात व दस की ड्यूटी पर तैनात बंदीरक्षक राहुल कुमार व अशोक कुमार ड्यूटी से गायब थे। रात में सभी को खोजा जाने लगा। काफी देर बाद वे दूसरे स्थान पर सोते हुए मिले। जबकि उनकी ड्यूटी बैरकों में निरुद्ध बंदियों की निगरानी के लिए लगाई गई थी। दोनों पर गाज गिराते हुए उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया। इस बीच पता चला कि सफाईकर्मी गोपाल पुष्पाकर काफी दिनों से बिना बताए नहीं आ रहा है। उसे भी चार्जशीट दी गई। जेल अधीक्षक ने बताया कि कारागार में तैनात बंदीरक्षक अभय कुमार तिवारी एक अगस्त 2017 से बिना बताए ड्यूटी से गायब था। इस बात की जानकारी जेल अधीक्षक ने डीआईजी जेल के साथ ही डीजी जेल को दी थी। अधिकारियों से संस्तुति के बाद जेल अधीक्षक ने बंदीरक्षक अभय कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया। जेल अधीक्षक के इस कदम से कारागार प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। बतादें कि कुछ दिनों पहले चर्चित व दबंग बंदियों को दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया था ताकि जेल में किसी भी प्रकार का बवाल बंदी न कर सके।
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