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महिलाओं ने उठाया शव, पुलिस के हाथ-पांव फूले
Updated Tue, 01 Aug 2017 07:02 PM IST
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कटरामेदनीगंज। नगर कोतवाली का पूरा मुस्तफा गांव मंगलवार को भी पुलिस छावनी में तब्दील रहा। मांगों को पूरा कराने के लिए महिलाओं ने मृतक का शव लेकर डीएम आवास की ओर कूच किया। जिससे पुलिस की सांस फूल गई। रोकने के लिए आगे बढ़ी महिला सिपाहियों से धक्कामुक्की होती रही। हालांकि सीओ सिटी ने मोर्चा संभाला और उनकी मांगों को हर हाल में पूरा कराने का आश्वासन दिया। बता दें कि यहां जमीन विवाद को लेकर सोमवार को अधेड़ लालता प्रसाद सिंह (55) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
लालता को बचाने के लिए उसका भतीजा नरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ बच्चा और भाई फौजदार सिंह की पत्नी विमला देवी दौड़े। उन्हें भी हत्यारोपियों ने लाठी डंडे व सरिया से मारकर घायल कर दिया था। विमला और नरेंद्र को डाक्टरों ने इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। इस मामले में मृतक के परिजनों ने इंद्रजीत सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। तनाव को देखते हुए रात भर गांव में पुलिस तैनात रही। मंगलवार को परिवार के लोग शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिए। वे सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस, आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य मांगों को पूरा कराने की मांग करने लगे। दोपहर में अचानक लोग मृतक का शव लेकर डीएम आवास की ओरकूच करने की तैयारी करने लगे। यह देख पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। जैसे ही परिजनों ने शव उठाया, सीओ व कोतवाली पुलिस ने सभी को रोक लिया। इसके बाद महिलाएं शव लेकर आगे बढ़ीं। उन्हें रोकने के लिए महिला पुलिस आगे बढ़ी तो उनसे हाथापाई होने लगी।
हालांकि सीओ सिटी ने परिजनों को समझाया कि अधिकारियों को बुलाया गया है। उनकी सभी मांगें पूरी होंगी। सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी पंकज वर्मा मौके पर पहुंचे। परिजनों से बातकर भरोसा दिलाया कि हर संभव आर्थिक मदद व शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाएगा। आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होगी। इसके बाद परिजनों ने विवादित रास्ते के करीब ही शव को दफनाया। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली। सीओ सिटी ने बताया कि हत्यारोपियों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
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पूरे मुस्तफा में मृतक लालता प्रसाद सिंह के परिजन पुलिस की लापरवाही पर खासे नाराज दिखे। लोगों का आरोप था कि कल दिनभर घर छोड़कर भागे आरोपियों का मोबाइल बजता रहा। रात में पुलिस भी मौजूद थी। इस बीच उनके घर से मोबाइल गायब हो गया। ऐसे में इस बात को बल मिलता है कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। हालांकि पुलिस आरोपों को निराधार बताते रहे। लालता प्रसाद की भयाहू विमला के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। डाक्टरों ने उसे बेहोशी की हालत में इलाहाबाद रेफर कर दिया। वहां सिटी स्कैन व दवा के लिए रुपये की जरूरत पड़ी। जो परिवार के लोग दे न सके। इसके बाद परिजन विमला को उसी हालत में लेकर घर चले आए। मंगलवार को गांव के लोग उसकी मदद को आगे आए और आर्थिक मदद कर इलाज कराने की व्यवस्था कराई।
मृतक लालता प्रसाद के परिजन एसडीएम के सामने पुलिस पर आरोपों की झड़ी लगा दी। कहा कि यदि पुलिस मामले को गंभीरता से लेती तो शायद आज यह नौबत न आती। सोमवार को भी आरोपी समझौते के लिए दबाव बनाते रहे। वे गांव में ही लगातार बने हुए हैं। पुलिस उनके ठिकानों को जान रही है लेकिन कार्रवाई नहीं कर रही। लालता की गोली मारकर हत्या के बाद आरोपियों का एक नेता रिश्तेदार लाइसेंसी असलहा लेकर गांव पहुंचा था। वह अपने प्रभाव का प्रयोग करता भी दिखा। पुलिस उसके सामने मूकदर्शक बनी रही। वह परिवार के लोगों को धमकाने के बाद लौट भी गया। पुलिस का कहना है कि वे लोग नेता को मृतक का रिश्तेदार समझ रहे थे।
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लालता को बचाने के लिए उसका भतीजा नरेंद्र बहादुर सिंह उर्फ बच्चा और भाई फौजदार सिंह की पत्नी विमला देवी दौड़े। उन्हें भी हत्यारोपियों ने लाठी डंडे व सरिया से मारकर घायल कर दिया था। विमला और नरेंद्र को डाक्टरों ने इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। इस मामले में मृतक के परिजनों ने इंद्रजीत सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। तनाव को देखते हुए रात भर गांव में पुलिस तैनात रही। मंगलवार को परिवार के लोग शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिए। वे सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस, आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य मांगों को पूरा कराने की मांग करने लगे। दोपहर में अचानक लोग मृतक का शव लेकर डीएम आवास की ओरकूच करने की तैयारी करने लगे। यह देख पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। जैसे ही परिजनों ने शव उठाया, सीओ व कोतवाली पुलिस ने सभी को रोक लिया। इसके बाद महिलाएं शव लेकर आगे बढ़ीं। उन्हें रोकने के लिए महिला पुलिस आगे बढ़ी तो उनसे हाथापाई होने लगी।
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हालांकि सीओ सिटी ने परिजनों को समझाया कि अधिकारियों को बुलाया गया है। उनकी सभी मांगें पूरी होंगी। सूचना मिलने पर उप जिलाधिकारी पंकज वर्मा मौके पर पहुंचे। परिजनों से बातकर भरोसा दिलाया कि हर संभव आर्थिक मदद व शस्त्र लाइसेंस दिलाया जाएगा। आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी होगी। इसके बाद परिजनों ने विवादित रास्ते के करीब ही शव को दफनाया। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली। सीओ सिटी ने बताया कि हत्यारोपियों की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।
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पूरे मुस्तफा में मृतक लालता प्रसाद सिंह के परिजन पुलिस की लापरवाही पर खासे नाराज दिखे। लोगों का आरोप था कि कल दिनभर घर छोड़कर भागे आरोपियों का मोबाइल बजता रहा। रात में पुलिस भी मौजूद थी। इस बीच उनके घर से मोबाइल गायब हो गया। ऐसे में इस बात को बल मिलता है कि पुलिस आरोपियों से मिली हुई है। हालांकि पुलिस आरोपों को निराधार बताते रहे। लालता प्रसाद की भयाहू विमला के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। डाक्टरों ने उसे बेहोशी की हालत में इलाहाबाद रेफर कर दिया। वहां सिटी स्कैन व दवा के लिए रुपये की जरूरत पड़ी। जो परिवार के लोग दे न सके। इसके बाद परिजन विमला को उसी हालत में लेकर घर चले आए। मंगलवार को गांव के लोग उसकी मदद को आगे आए और आर्थिक मदद कर इलाज कराने की व्यवस्था कराई।
मृतक लालता प्रसाद के परिजन एसडीएम के सामने पुलिस पर आरोपों की झड़ी लगा दी। कहा कि यदि पुलिस मामले को गंभीरता से लेती तो शायद आज यह नौबत न आती। सोमवार को भी आरोपी समझौते के लिए दबाव बनाते रहे। वे गांव में ही लगातार बने हुए हैं। पुलिस उनके ठिकानों को जान रही है लेकिन कार्रवाई नहीं कर रही। लालता की गोली मारकर हत्या के बाद आरोपियों का एक नेता रिश्तेदार लाइसेंसी असलहा लेकर गांव पहुंचा था। वह अपने प्रभाव का प्रयोग करता भी दिखा। पुलिस उसके सामने मूकदर्शक बनी रही। वह परिवार के लोगों को धमकाने के बाद लौट भी गया। पुलिस का कहना है कि वे लोग नेता को मृतक का रिश्तेदार समझ रहे थे।