{"_id":"637d16e8748e0952c03e8d67","slug":"amla-products-will-be-sold-on-172-committees-pratapgarh-news-ald34661542","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pratapgarh News: 172 साधन सहकारी समितियों की बदलेगी दशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pratapgarh News: 172 साधन सहकारी समितियों की बदलेगी दशा
विज्ञापन
Amla products will be sold on 172 committees
जिले की साधन सहकारी समितियां सिर्फ खाद और बीज तक ही सीमित नहीं रहेंगी। एक जनपद, एक उत्पाद योजना के तहत अब इन समितियों पर आंवले से बने उत्पादों की भी बिक्री की जाएगी। यह स्थानीय बाजार के साथ ही दूसरे प्रांतों में भी भेजी जाएगी।
जिले के 17 विकास खंडों के 172 ग्राम पंचायतों में साधन सहकारी समितियों की स्थापना की गई है। इन समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और बीज मुहैया कराया जाता है। सिर्फ खाद और बीज तक सीमित रहने वाली साधन सहकारी समितियों पर अब आंवला उत्पादों की बिक्री की भी जिम्मेदारी दी जा रही है। वर्तमान में खाद और बीज की बिक्री बंद होते ही समितियों पर ताला लगा दिया जाता है।
दरअसल, समितियों पर तैनात सचिवों को वेतन नहीं दिया जाता है, बल्कि व्यवसाय के मुताबिक उन्हें कमीशन दिया जाता है। यही उनकी कमाई का जरिया होता है। इससे गेहूं और धान के सीजन में मतलब भर का व्यवसाय हो जाता है, मगर उसके बाद उनके पास ताला लगाने के सिवा कोई उपाय नहीं होता है।
विज्ञापन
विभाग ने जो नया प्लान तैयार किया है, उसके मुताबिक समितियों के भवनों को नए सिरे से निर्मित कराने के साथ ही एक जनपद, एक उत्पाद के तहत चयनित आंवले को संजीवनी देने के लिए अब उत्पाद की बिक्री प्रारंभ की जाएगी। मुरब्बा, कैंडी, जूस, बर्फी, लड्डू की बिक्री करके समितियों की उपयोगिता बढ़ाई जाएगी।
36 समितियों पर हुआ मरम्मत का कार्य
जिले की 36 साधन सहकारी समितियों पर मरम्मत का कार्य क्षेत्र पंचायतों से कराया गया है, मगर समितियों पर न तो शौचालय है और न ही पानी पीने की व्यवस्था। जल्द ही इन समस्याओं से किसानों को निजात मिलेगी।
साधन सहकारी समितियों पर अब आंवले का उत्पाद बेचने की तैयारी है। समितियों से गैर प्रांतों में भी उत्पाद भेजा जा सकेगा। समितियों में जन सुविधाओं की व्यवस्था कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता
विज्ञापन
जिले के 17 विकास खंडों के 172 ग्राम पंचायतों में साधन सहकारी समितियों की स्थापना की गई है। इन समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और बीज मुहैया कराया जाता है। सिर्फ खाद और बीज तक सीमित रहने वाली साधन सहकारी समितियों पर अब आंवला उत्पादों की बिक्री की भी जिम्मेदारी दी जा रही है। वर्तमान में खाद और बीज की बिक्री बंद होते ही समितियों पर ताला लगा दिया जाता है।
विज्ञापन
दरअसल, समितियों पर तैनात सचिवों को वेतन नहीं दिया जाता है, बल्कि व्यवसाय के मुताबिक उन्हें कमीशन दिया जाता है। यही उनकी कमाई का जरिया होता है। इससे गेहूं और धान के सीजन में मतलब भर का व्यवसाय हो जाता है, मगर उसके बाद उनके पास ताला लगाने के सिवा कोई उपाय नहीं होता है।
विज्ञापन
विभाग ने जो नया प्लान तैयार किया है, उसके मुताबिक समितियों के भवनों को नए सिरे से निर्मित कराने के साथ ही एक जनपद, एक उत्पाद के तहत चयनित आंवले को संजीवनी देने के लिए अब उत्पाद की बिक्री प्रारंभ की जाएगी। मुरब्बा, कैंडी, जूस, बर्फी, लड्डू की बिक्री करके समितियों की उपयोगिता बढ़ाई जाएगी।
36 समितियों पर हुआ मरम्मत का कार्य
जिले की 36 साधन सहकारी समितियों पर मरम्मत का कार्य क्षेत्र पंचायतों से कराया गया है, मगर समितियों पर न तो शौचालय है और न ही पानी पीने की व्यवस्था। जल्द ही इन समस्याओं से किसानों को निजात मिलेगी।
साधन सहकारी समितियों पर अब आंवले का उत्पाद बेचने की तैयारी है। समितियों से गैर प्रांतों में भी उत्पाद भेजा जा सकेगा। समितियों में जन सुविधाओं की व्यवस्था कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। अरविंद प्रकाश, सहायक निबंधक, सहकारिता