फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pratapgarh News ›   लघु सिंचाई विभाग में 29 लाख का घोटाला

लघु सिंचाई विभाग में 29 लाख का घोटाला

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Pratapgarh
Pratapgarh Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
प्रतापगढ़। जिले में मनरेगा कमाई का जरिया बन चुकी है। योजना की तिजोरी में दिनदहाड़े डाका डाला जा रहा है। लघु सिंचाई विभाग में करीब 29 लाख के घपले का मामला सामने आया है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई के बजाय अफसर उन्हें बचाने में जुटे हैं। जांच, एफआईआर जैसी कार्रवाई के बजाय किश्तों में रकम की रिकवरी का आदेश डीएम ने दिया है। यह मामला आरटीआई (जन सूचना अधिकार) के तहत जानकारी मांगने पर सामने आ गया। वित्तीय अनियमितता जैसे मामलों की इस तरह उपेक्षा लोगों के गले नहीं उतर रही।
विज्ञापन

जनता विकास मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी तेज बहादुर सिंह ने आरटीआई के तहत एक सूचना मांगी थी। जिसमें लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता शलभ श्रीवास्तव के जरिए 28 लाख 76 हजार तीन सौ रुपए के घपले का प्रकरण प्रकाश में आया। हालांकि इस मामले में अब तक जांच या एफआईआर जैसी कार्रवाई नहीं की गई है। डीएम ने घपला करने वालों से रकम की वसूली का आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा था कि यह धनराशि शीघ्र खाते में डलवाई जाए। मगर अब तक डीएम के आदेश पर अमल नहीं हो सका है। घपले के दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय अधिकारी उन्हें बचाने में जुटे हैं। नियम के विपरीत जिम्मेदार लोगों ने बगैर अनुमोदन के मनरेगा की धनराशि को खर्च कर दिया है। यह मनरेगा गाइड लाइन के खिलाफ है। उन्होंने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता शलभ श्रीवास्तव कहते हैं कि उन पर लगे सारे आरोप गलत हैं। पैसे का घपला नहीं हुआ है। वहीं यदि दी गई सूचना के आधार पर यह स्थितियां खुलेआम मनरेगा के धन में लूट की दशा को उजागर कर रही हैं।
विज्ञापन

परियोजना निदेशक एसएन चौधरी का कहना है कि ऐसा नहीं कि उस पैसे का घोटाला किया गया है। यह सच है कि बगैर अनुमोदन हुए उन्होंने दूसरी जगह उतने पैसे से काम करा दिया है। प्रशासन खुद मामले में अपने स्तर से कार्रवाई कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं इस मामले में अधिवक्ता विवेक उपाध्याय का कहना है कि यदि रिकवरी के आदेश हैं तो जाहिर हैं कि आरोप साबित हैं। बगैर आरोप साबित हुए रिकवरी के आदेश नहीं हो सकते। घपले का प्रकरण है फ्राड कहलाता है। ऐसी दशा में एफआईआर और जांच जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed