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जिले में दम तोड़ रहा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना
Tue, 10 Aug 2021 12:46 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 12:46 AM IST
सार
जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते दम तोड़ रहा है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में...
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pregnent women
विस्तार
जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते दम तोड़ रहा है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासांउड समेत अन्य जांच कराने का निर्देश शासन की ओर से दिया गया है। मगर, यह योजना सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही है। जिले की 53 हजार महिलाओं के लिए मात्र एक अल्ट्रासाउंड केंद्र चिह्नित किया गया है। गर्भवती महिलाओं की जांच समय पर नहीं हो पा रही है। मरीजों को प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जांच कराने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा समय में जनपद में लगभग 53 हजार महिलाएं गर्भवती हैं। इन महिलाओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसलिए शासन ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना का संचालन किया है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में जांच और इलाज करने की व्यवस्था है। मगर, जिले में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने के कारण योजन दम तोड़ रही है।
अपर शोध अधिकारी ने बताया कि जिले में पीपी मोड के तहत एक अल्ट्रासाउंड पर गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में जांच कराया जा रहा है। जांच में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि जिले में 53 हजार गर्भवती महिलाओं के जांच के लिए महज एक सेंटर हैं।
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ऐसे में हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है। वैसे तमाम ऐसी महिलाएं हैं जिन्हे इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उनकी जांच मुफ्त में होगी। डॉक्टर द्वारा जांच कराने के लिए पर्चे पर लिखा जाता है। जिसके बाद भी गर्भवती महिलाएं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जाकर जांच कराती हैं। इसके बदले उन्हें रुपये भी देने पड़ते हैं।
कुंडा और पट्टी के लोग ज्यादा परेशान
प्रतापगढ़ से कुंडा की दूरी लगभग 50 किलो मीटर से ज्यादा है। 30 किमी के करीब में पट्टी और लालगंज तो 20 किमी के करीब में रानीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पड़ता है। यहां पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना दिवस पर अस्पताल में जांच कराने के लिए आने वालीं गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट सेंटर पर जाकर जांच करानी पड़ती है।
सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पीपी मोड के तहत गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। शासन की ओर से महज दो सौ रुपये शुल्क तय है। इसलिए अन्य सेंटर संचालक पीपी मोड के तहत मुफ्त में अल्ट्रासाउंड करने को तैयार नहीं है। डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो मौजूदा समय में जनपद में लगभग 53 हजार महिलाएं गर्भवती हैं। इन महिलाओं को किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसलिए शासन ने प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना का संचालन किया है। प्रत्येक माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में जांच और इलाज करने की व्यवस्था है। मगर, जिले में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने के कारण योजन दम तोड़ रही है।
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अपर शोध अधिकारी ने बताया कि जिले में पीपी मोड के तहत एक अल्ट्रासाउंड पर गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में जांच कराया जा रहा है। जांच में किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि जिले में 53 हजार गर्भवती महिलाओं के जांच के लिए महज एक सेंटर हैं।
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ऐसे में हर माह की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए समस्या का सामना करना पड़ता है। वैसे तमाम ऐसी महिलाएं हैं जिन्हे इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उनकी जांच मुफ्त में होगी। डॉक्टर द्वारा जांच कराने के लिए पर्चे पर लिखा जाता है। जिसके बाद भी गर्भवती महिलाएं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर जाकर जांच कराती हैं। इसके बदले उन्हें रुपये भी देने पड़ते हैं।
कुंडा और पट्टी के लोग ज्यादा परेशान
प्रतापगढ़ से कुंडा की दूरी लगभग 50 किलो मीटर से ज्यादा है। 30 किमी के करीब में पट्टी और लालगंज तो 20 किमी के करीब में रानीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पड़ता है। यहां पर अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना दिवस पर अस्पताल में जांच कराने के लिए आने वालीं गर्भवती महिलाओं को प्राइवेट सेंटर पर जाकर जांच करानी पड़ती है।
सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पीपी मोड के तहत गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड कराया जा रहा है। शासन की ओर से महज दो सौ रुपये शुल्क तय है। इसलिए अन्य सेंटर संचालक पीपी मोड के तहत मुफ्त में अल्ट्रासाउंड करने को तैयार नहीं है। डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ