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47 अस्पताल 45 डॉक्टर, कैसे हो इलाज
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
Updated Thu, 29 Jan 2015 10:55 PM IST
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जनपद में संचालित कई होम्योपैथिक अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं। कई अस्पताल ऐसे हैं जहां एक भी डॉक्टर नहीं है। हालांकि लिखा-पढ़ी में सभी अस्पताल सुचारू रूप से चल रहे हैं। डॉक्टर न होने के कारण दूरदराज से इलाज कराने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है जबकि विभाग का दावा है कि सभी अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
जिला अस्पताल को मिलाकर जनपद में होम्योपैथिक के 47 अस्पताल स्थापित हैं।
मगर जिले में होम्योपैथिक के कुल डॉक्टरों की संख्या मात्र 45 है। यह आंकड़ा खुद इस बात का गवाह है कि अगर एक अस्पताल में एक डॉक्टर तैनात कर दिए जाएं तो भी दो अस्पताल खाली बच जाएंगे। मगर जिला अस्पताल में दो डॉक्टरों की तैनाती है। इसके अलावा शनिदेव में तैनात डॉक्टर आरसी मिश्र को जिला प्रभारी बना दिया गया है। इससे अब चार अस्पतालों में डॉक्टरों की कुर्सी खाली पड़ी है। दो अस्पतालों के डॉक्टर काफी दिनों से छुट्टी पर हैं। इससे 6 अस्पताल बगैर डॉक्टर के ही चल रहे हैं। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलते हैं तो निराश लौटना पड़ता है। हालत यह है कि इन खाली अस्पतालों में कहीं चपरासी तो कहीं फार्मासिस्ट काम चला रहे हैं। परानूपुर, राजापुर, सांगीपुर व बाभन की बखरी गांवों में बने अस्पतालों में जून माह से ही डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी है। भुपियामऊ व एक अन्य डॉक्टर काफी दिनों से छुट्टी पर हैं। इन स्थानों पर डॉक्टर की कुर्सी पर या तो फार्मासिस्ट इलाज कर रहा है या फिर चपरासी।
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जिला अस्पताल को मिलाकर जनपद में होम्योपैथिक के 47 अस्पताल स्थापित हैं।
मगर जिले में होम्योपैथिक के कुल डॉक्टरों की संख्या मात्र 45 है। यह आंकड़ा खुद इस बात का गवाह है कि अगर एक अस्पताल में एक डॉक्टर तैनात कर दिए जाएं तो भी दो अस्पताल खाली बच जाएंगे। मगर जिला अस्पताल में दो डॉक्टरों की तैनाती है। इसके अलावा शनिदेव में तैनात डॉक्टर आरसी मिश्र को जिला प्रभारी बना दिया गया है। इससे अब चार अस्पतालों में डॉक्टरों की कुर्सी खाली पड़ी है। दो अस्पतालों के डॉक्टर काफी दिनों से छुट्टी पर हैं। इससे 6 अस्पताल बगैर डॉक्टर के ही चल रहे हैं। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को डॉक्टर नहीं मिलते हैं तो निराश लौटना पड़ता है। हालत यह है कि इन खाली अस्पतालों में कहीं चपरासी तो कहीं फार्मासिस्ट काम चला रहे हैं। परानूपुर, राजापुर, सांगीपुर व बाभन की बखरी गांवों में बने अस्पतालों में जून माह से ही डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी है। भुपियामऊ व एक अन्य डॉक्टर काफी दिनों से छुट्टी पर हैं। इन स्थानों पर डॉक्टर की कुर्सी पर या तो फार्मासिस्ट इलाज कर रहा है या फिर चपरासी।
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