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21 दिन बीता, दो कदम भी नहीं बढ़ पाई जांच
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fertilizer
पीसीएफ में ढाई करोड़ रुपये के खाद के गबन का खुलासा होने के 21 दिन बाद भी विभागीय जांच जस की तस पड़ी है। विभागीय अधिकारी घपले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि लगातार यह सवाल उठ रहे हैं कि घोटाले के आरोपी संतोष को तीन गोदामों का प्रभार क्यों सौंपा गया। भौतिक साक्ष्य जुटाने के बजाय मोबाइल से गबन की जांच क्यों की जा रही है। जबकि घपले की जांच कर रहे उप महाप्रबंधक ने कभी जिले में आकर हकीकत देखना भी मुनासिब नहीं समझा।
पीसीएफ में घपलेबाजों के सिंडीकेट के आगे विभागीय अधिकारी भी नतमस्तक हैं। विभागीय लोगों के पीसीएफ में शीर्ष पद पर बैठ ेएक अफसर घपलेबाजों के सरगना हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो अफसर के इजाजत के बगैर कोई पत्ता भी नहीं हिलता । वास्तव में ढाई करोड़ खाद के गबन का जो खेल हुआ है, वह विभाग के ही एक बड़े अफसर की मिलीभगत से हुआ है।
पीसीएफ के उप महाप्रबंधक नारेंद्र सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। घटना के 21 दिन व्यतीत होने के बाद भी वह न तो जिले के दौरा करके वास्तविकता को जानने की जरूरत समझी और न ही अब तक आरोपी भंडार नायक को बर्खास्त किया गया। विभागीय अधिकारी पहले भंडार नायक के परिजनों से ढाई करोड़ रुपये की रिकवरी करने की बात कह रहे थे। मगर अब वह चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं।
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विवेचक हुए बीमार, पुलिस भूल गई घपले की जांच
भंडार नायक के खिलाफ पीसीएफ प्रबंधक ने मुकदमा दर्ज कराया था। घटना की जांच नगर कोतवाली में तैनात एसएसआई भृगुनाथ मिश्र को सौंपी गई है। मगर उनके बीमार होते ही अधिकारी जांच करना भूल गए। वह इस ताक में बैठे हुए हैं, कि आर्थिक अपराध शाखा के लोग कब आएं और जांच हस्तगत हो जाए।
खाद का स्टाक देखने पहुंचे आरएम
पीसीएफ में ढाई करोड़ का घपला उजागर होने के बाद अब आरएम प्रयागराज की नजरें जिले में टिक गई हैं। शुक्रवार को पीसीएफ के आरएम संजीव कुमार ने मीराभवन स्थित गोदाम पर पहुंचकर खाद के स्टाक का निरीक्षण किया। उन्होंने अपनी मौजूदगी में गोदाम पर रखी खाद की बोरियों की गणना कराई। इस दौरान विभागीय अधिकारियों के साथ ही कर्मचारी भी मौजूद रहे। लगभग पांच घंटे तक जिले में रहकर अभिलेखों की जांच करते रहे। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया है कि अगर कोई व्यक्ति गड़बड़ी करता है,तो उसे किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।
ढाई करोड़ रुपये की खाद बेचकर फरार होने वाले भंडार नायक को निलंबित कर दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती है, तब तक भंडार नायक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। फिलहाल, अधिकारी अपने स्तर से मामले की जांच कर रहे हैं। धनंजय तिवारी, जिला प्रबंधक, पीसीएफ
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पीसीएफ में घपलेबाजों के सिंडीकेट के आगे विभागीय अधिकारी भी नतमस्तक हैं। विभागीय लोगों के पीसीएफ में शीर्ष पद पर बैठ ेएक अफसर घपलेबाजों के सरगना हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो अफसर के इजाजत के बगैर कोई पत्ता भी नहीं हिलता । वास्तव में ढाई करोड़ खाद के गबन का जो खेल हुआ है, वह विभाग के ही एक बड़े अफसर की मिलीभगत से हुआ है।
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पीसीएफ के उप महाप्रबंधक नारेंद्र सिंह को जांच अधिकारी बनाया गया है। घटना के 21 दिन व्यतीत होने के बाद भी वह न तो जिले के दौरा करके वास्तविकता को जानने की जरूरत समझी और न ही अब तक आरोपी भंडार नायक को बर्खास्त किया गया। विभागीय अधिकारी पहले भंडार नायक के परिजनों से ढाई करोड़ रुपये की रिकवरी करने की बात कह रहे थे। मगर अब वह चुप्पी साधकर बैठे हुए हैं।
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विवेचक हुए बीमार, पुलिस भूल गई घपले की जांच
भंडार नायक के खिलाफ पीसीएफ प्रबंधक ने मुकदमा दर्ज कराया था। घटना की जांच नगर कोतवाली में तैनात एसएसआई भृगुनाथ मिश्र को सौंपी गई है। मगर उनके बीमार होते ही अधिकारी जांच करना भूल गए। वह इस ताक में बैठे हुए हैं, कि आर्थिक अपराध शाखा के लोग कब आएं और जांच हस्तगत हो जाए।
खाद का स्टाक देखने पहुंचे आरएम
पीसीएफ में ढाई करोड़ का घपला उजागर होने के बाद अब आरएम प्रयागराज की नजरें जिले में टिक गई हैं। शुक्रवार को पीसीएफ के आरएम संजीव कुमार ने मीराभवन स्थित गोदाम पर पहुंचकर खाद के स्टाक का निरीक्षण किया। उन्होंने अपनी मौजूदगी में गोदाम पर रखी खाद की बोरियों की गणना कराई। इस दौरान विभागीय अधिकारियों के साथ ही कर्मचारी भी मौजूद रहे। लगभग पांच घंटे तक जिले में रहकर अभिलेखों की जांच करते रहे। उन्होंने साफ शब्दों में चेताया है कि अगर कोई व्यक्ति गड़बड़ी करता है,तो उसे किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा।
ढाई करोड़ रुपये की खाद बेचकर फरार होने वाले भंडार नायक को निलंबित कर दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं होती है, तब तक भंडार नायक को बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। फिलहाल, अधिकारी अपने स्तर से मामले की जांच कर रहे हैं। धनंजय तिवारी, जिला प्रबंधक, पीसीएफ