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खुद को फिट बनाए रखने के लिए योग और प्राणायाम करते हैं युवा चिकित्सक

Mon, 25 Oct 2021 12:34 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 25 Oct 2021 12:34 AM IST
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Young doctors do yoga and pranayama to keep themselves fit
प्राणायाम करती सिमरन। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। कोरोना काल में सेहत के प्रति आम लोगों में जागरूकता बढ़ी है तो योग और आयुर्वेद का भी महत्व भी बढ़ा है। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में बीएएमएस कर रहे विद्यार्थी जहां आयुर्वेद के प्रति सामान्य जन में बढ़ती रुचि से उत्साहित हैं। वहीं कुछ नया करने के इरादे भी हैं। अपनी खुद की सेहत को ठीक बनाए रखने के लिए वे अंग्रेजी दवाओं से परहेज कर रहे हैं और इलाज के लिए घरेलू फार्मूले अपनाते हैं। साथ ही अपने को फिट और हिट रखने के लिए योग और प्राणायाम कर रहे हैं। उनकी दिनचर्या सुबह पांच से छह बजे के बीच शुरू होती है। दैनिक क्रियाओं के बाद योग और प्राणायाम को करना यह नहीं भूलते। जीवनचर्या से लोगों को सेहतमंद बने रहने का संदेश देना इनकी प्राथमिकता है।
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मैं सुबह 5.30 बजे हर हाल में जग जाता हूं। दैनिक क्रियाओं के बाद नियमित से योग आसन और प्राणायाम मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। मौसम के अनुसार फल और भोजन मेरी प्राथमिकता है। इसीलिए पांच वर्ष में मैं एक दिन के लिए भी बीमार नहीं पड़ा। - सुधीर कुमार मिश्र, विद्यार्थी
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मैं 20-30 मिनट रोजाना योग करता हूं। अगर कभी सर्दी जुकाम या बुखार हुआ तो आयुर्वेदिक दवाओं और घरेलू नुस्खों से खुद को ठीक करता हूं। जब से आयुर्वेद चिकित्सा की पढ़ाई शुरू की है मेरे घर वाले भी आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल से खुद की सेहत को ठीक बनाए रखते हैं। मेरा यही कहना है कि खुद को फिट रखना है तो योग और प्राणायाम को जीवन चर्चा में शामिल करें। - संदीप दुबे, विद्यार्थी
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मैं ब्रह्म मुहूर्त में जागता हूं और योग तथा प्राणायाम के साथ जिंदगी शुरू होती है। मैं लोगों को सेहतमंद और निरोगी बनाए रखने के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहता हूं। इसीलिए आयुर्वेद चिकित्सा में पढ़ाई कर रहा हूं। ताकि कम से कम खर्चे में लोगों को सेहतमंद बनाए रखने के तरीके लोगों को सिखाए जा सकें। मैंने योगा विद सीएम प्रतियोगिता में यूपी में दूसरा स्थान प्राप्त किया। - पवन तिवारी, विद्यार्थी
मैंने भोजन और दिनचर्या को नेचर के साथ जोड़ा है। सात्विक भोजन के साथ खुद को फिट बनाए रखने के लिए योग करती हूं। मैं चाहती हूं कि लोग भोजन और रहन सहन ऐसा रखें कि बीमार न पड़ें। अगर बीमार पड़ें तो आयुर्वेद चिकित्सा अपनाएं और कम से खर्चे में स्वस्थ हो जाएं। - सिमरन, विद्यार्थी
आठ महीने पहले मुझे सर्दी जुकाम हुआ तो मैंने काढ़ा पीकर खुद को ठीक किया। अगर मैं आयुर्वेद का विद्यार्थी नहीं होता तो हो अंग्रेजी दवाओं का इस्तेमाल करता लेकिन मैंने आयुर्वेद को पढ़कर खुद को निरोगी रखने की विद्या सीखी है। लोगों में इसका प्रचार-प्रसार करना मेरे जीवन का सपना है। - अमन पांडेय, विद्यार्थी

मैं फिलहाल बीएमएमस कर रही हूं। मेरे भाई विभोर को त्वचा रोग हुआ तो मैंने देखा कि अंग्रेजी दवाएं सही काम नहीं कर रही हैं। एक आयुर्वेदाचार्य डॉ. भोजराज को दिखाया। उनके उपचार से भाई ठीक हुआ। मैंने इसके बाद यही सोचा कि त्वचा संबंधी रोगों के निदान के लिए मैं शोध करूं और समाज को लाभ दूं। जहां तक खुद को फिट रखने की बात है उसके लिए योग और प्राणायाम मेरी जिंदगी का हिस्सा है। - वाणी चौधरी, विद्यार्थी
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