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आधी आबादी को गन्ना विभाग दे रहा आत्मनिभर्रता की मुस्कान
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पीलीभीत। कोरोना के दौर में गन्ना विभाग ने आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके तहत ग्रामीण अंचलों में रहने वाली स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं वैज्ञानिक विधि से उन्नत प्रजातियों के गन्ने का शोधित बीज तैयार करने में जुटी हैं। प्रथम चरण में अब तक आठ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को इस गन्ना शोधन तकनीक से जोड़ा गया है। प्रशिक्षण के बाद अब ये महिलाएं स्वयं ही इस विधि से नर्सरी तैयार करने लगीं। इस तकनीक से बुवाई होने पर गन्ने का जमाव 90 फीसदी से अधिक होगा।
शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह अनूठी पहल की गई है। तराई इलाके में नकदी फसल के रूप में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस बार भी एक लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गन्ने की फसल बोई गई है। यह गत वर्ष की तुलना में चार फीसदी अधिक है। अब गन्ने की खेती में नई पहल करते हुए गन्ना विभाग ने ग्रामीण अंचल की महिलाओं को सिंगल बड चिप विधि से नर्सरी तैयार करने की तकनीकी से जोड़ा है। महिलाएं गन्ने की बुवाई के लिए सिंगल बड चिप से नर्सरी तैयार करेंगी। इनमें तैयार सीडलिंग (एक आंख की पौध) का वितरण भी करेंगी। गन्ना विभाग के इस कदम से महिलाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगी। साथ ही महिलाओं में आधुनिक खेती करने का ज्ञान भी बढ़ेगा।
80 फीसदी बचेगा बीज, बढ़ेगी पैदावार
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक रामभद्र द्विवेदी के मुताबिक प्रति गन्ना औसतन 15 आंख होती है। पारंपरिक विधि में एक गन्ना दो और तीन आंख के टुकड़े काटकर बुवाई होती थी। इस विधि से अधिकतम पांच आंख से ही गन्ने का जमाव होता है, जबकि सिंगल बड चिप विधि अर्थात एक आंख की गन्ना बुवाई विधि से एक गन्ने से औसतन 15 पौधे तैयार होंगे। इससे करीब 80 फीसदी तक बीज बचेगा। गन्ने की तैयार नर्सरी को खेत में निर्धारित दूरी पर ट्रैंच विधि से पौधरोपण करने से उसकी पैदावार भी बढ़ेगी।
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आठ स्वयं सहायता समूहों ने तैयार की नर्सरी
गन्ने के शोधित बीज की नर्सरी तैयार करने के लिए आठ गांवों में स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक के अनुसार गन्ना विकास परिषद द्वारा गांव जगत, देवीपुरा, लालपुर, बेला पुखरा, और नगरिया सहगवां, नावकूड, कैम सिकलापुर और महुआ के महिला स्वयं सहायता समूहों से नर्सरी तैयार करवाई जा रही है। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह में दस महिलाएं हैं। इन महिलाओं को प्रति पौधा डेेढ़ रुपये अनुदान दिया जाता है। महिलाएं तीन रुपये प्रति पौधे के हिसाब से उसकी बिक्री कर सकती हैं। इस सिंगल बड चिप से तैयार बीज का उपयोग प्रदर्शन क्षेत्र, देरी से बुवाई और जल प्लावित क्षेत्रों में किया जाएगा।
गन्ना पैदावार में बढ़ोतरी और नारी सशक्तिकरण के लिए सिंगल बड चिप विधि से गन्ने की नर्सरी तैयार की जा रही है। इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। नर्सरियों के माध्यम से महिला सहायता समूह स्वयं भी सानों में सीडलिंग को बिक्री करके लाभ अर्जित कर सकती हैं। - जितेंद्र मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी
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शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह अनूठी पहल की गई है। तराई इलाके में नकदी फसल के रूप में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इस बार भी एक लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में गन्ने की फसल बोई गई है। यह गत वर्ष की तुलना में चार फीसदी अधिक है। अब गन्ने की खेती में नई पहल करते हुए गन्ना विभाग ने ग्रामीण अंचल की महिलाओं को सिंगल बड चिप विधि से नर्सरी तैयार करने की तकनीकी से जोड़ा है। महिलाएं गन्ने की बुवाई के लिए सिंगल बड चिप से नर्सरी तैयार करेंगी। इनमें तैयार सीडलिंग (एक आंख की पौध) का वितरण भी करेंगी। गन्ना विभाग के इस कदम से महिलाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ेंगी। साथ ही महिलाओं में आधुनिक खेती करने का ज्ञान भी बढ़ेगा।
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80 फीसदी बचेगा बीज, बढ़ेगी पैदावार
ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक रामभद्र द्विवेदी के मुताबिक प्रति गन्ना औसतन 15 आंख होती है। पारंपरिक विधि में एक गन्ना दो और तीन आंख के टुकड़े काटकर बुवाई होती थी। इस विधि से अधिकतम पांच आंख से ही गन्ने का जमाव होता है, जबकि सिंगल बड चिप विधि अर्थात एक आंख की गन्ना बुवाई विधि से एक गन्ने से औसतन 15 पौधे तैयार होंगे। इससे करीब 80 फीसदी तक बीज बचेगा। गन्ने की तैयार नर्सरी को खेत में निर्धारित दूरी पर ट्रैंच विधि से पौधरोपण करने से उसकी पैदावार भी बढ़ेगी।
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आठ स्वयं सहायता समूहों ने तैयार की नर्सरी
गन्ने के शोधित बीज की नर्सरी तैयार करने के लिए आठ गांवों में स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक के अनुसार गन्ना विकास परिषद द्वारा गांव जगत, देवीपुरा, लालपुर, बेला पुखरा, और नगरिया सहगवां, नावकूड, कैम सिकलापुर और महुआ के महिला स्वयं सहायता समूहों से नर्सरी तैयार करवाई जा रही है। प्रत्येक स्वयं सहायता समूह में दस महिलाएं हैं। इन महिलाओं को प्रति पौधा डेेढ़ रुपये अनुदान दिया जाता है। महिलाएं तीन रुपये प्रति पौधे के हिसाब से उसकी बिक्री कर सकती हैं। इस सिंगल बड चिप से तैयार बीज का उपयोग प्रदर्शन क्षेत्र, देरी से बुवाई और जल प्लावित क्षेत्रों में किया जाएगा।
गन्ना पैदावार में बढ़ोतरी और नारी सशक्तिकरण के लिए सिंगल बड चिप विधि से गन्ने की नर्सरी तैयार की जा रही है। इसके लिए महिला स्वयं सहायता समूहों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जा चुका है। नर्सरियों के माध्यम से महिला सहायता समूह स्वयं भी सानों में सीडलिंग को बिक्री करके लाभ अर्जित कर सकती हैं। - जितेंद्र मिश्र, जिला गन्ना अधिकारी