फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Why tiger not declared maneater after 15 deaths?

15 मौतों के बाद भी नरभक्षी क्यों नहीं घोषित हुए बाघ?

Wed, 02 Aug 2017 10:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत
अमर उजाला ब्यूरो,पीलीभीत Updated Wed, 02 Aug 2017 10:41 PM IST
विज्ञापन
Why tiger not declared maneater after 15 deaths?
Tiger
तराई में बाघ के हमले बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों में गुस्सा भी बढ़ रहा
विज्ञापन

नेपाल सीमा से सटे तराई इलाके के जंगल में बाघ के हमलों की घटनाएं नई नहीं हैं। फर्क इतना है कि पहले साल में एक दो घटनाएं होती थीं लेकिन अब नौ माह में बाघ ने 15 इंसानों को शिकार बनाया। इससे इलाके में जहां दहशत है, वहीं वन विभाग के अफसर भी चिंतित हैं। इन घटनाओं के बाद आक्रोशित भीड़ कभी वनकर्मियों पर हमला कर देती है तो कभी हाईवे जाम कर गुस्से का इजहार कर रही है। कई माह पहले एक बाघ को नरभक्षी घोषित कर लखनऊ के चिड़िया घर भी भेजा गया। सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक बाघ इंसान की जिंदगी को खत्म करते रहेंगे? आखिर कब वन विभाग बाघ को नरभक्षी घोषित कर उनके आतंक से लोगों को निजात दिलाएगा? वन विभाग के अधिकारी इन सवालों का जवाब पूछने पर या तो चुप्पी साध जाते हैं या फिर बजट, स्टाफ का रोना रोतो हैं। 

पीलीभीत के जंगलों को तीन साल टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इससे कुछ दिन पूर्व यह वन्यजीव विहार के रूप में भी रहा, लेकिन वन्यजीव विहार और टाइगर रिजर्व बनने के बाद भी व्यवस्थाओं और आम जनता की सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। लगातार बढ़ती संख्या के चलते बाघ अब जंगल से बाहर आने लगे हैं। इसमें जंगल किनारे तेजी से बढ़ रहे गन्ने का क्षेत्रफल बाघों को प्रकृति वास का आभास दिला रहा है, जिससे बाघ इन गन्ने के खेतों में छिपकर शिकार कर रहे हैं। पशुओं पर हमले के साथ मानव बाघ संघर्ष की घटनाएं भी लगातार बढ़ी हैं। पिछले नौ माह के आंकड़ों की बात करें तो अब तक 15 लोगों की जानें जंगल के बाहर और अंदर हुए हमलों में जा चुकी हैं। जिसमें एक वनवाचर भी शामिल हैं, साथ ही कई लोग घायल हो चुके है। वनविभाग मृतक के परिवारीजनों को मुआवजा देकर उनके आंसू पोंछने का प्रयास तो करता है लेकिन हमलों पर अंकुश लगाने की कोई प्रभावी योजना अब तक सफल होती नहीं दिखी है। संसाधनों के अभाव में केवल बैठकों और दिखावटी भागदौड़ के अलावा कुछ भी ठोस कार्रवाई नहीं पा रही है। 
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed