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...आखिर जाएं तो कहां जाएं
अमर उजाला ब्यूरो माधोटांडा/पीलीभीत।
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:29 PM IST
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बरसों बाद घर बनाने को मिली रकम तो रोड़ा बन बैठा वन विभाग
ढकिया ता. महाराजपुर के थारू परिवारों की व्यथा
तराई क्षेत्र में राजस्व व वन विभाग के बीच तालमेल न होने का खामियाजा क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। अब तराई के थारू जनजाति के परिवारों का ही मामला देखे तो करीब डेढ़ दशक पूर्व राजस्व विभाग ने 45 थारू परिवारों के ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में आवासीय पट्टे किए थे। तबसे यह सभी परिवार इसी गांव रहते आ रहे हैं। इधर शासन ने इनमेें से 30 परिवार को छत मुहैय्या कराने आवास आवंटित किए तो वन विभाग आवास बनाने में रोड़ा बन रहा है।
वर्ष 1995 में थारू जनजनति के परिवारों को हटाकर कटकवारा व ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में बसाया गया था। उस दौरान राजस्व प्रशासन ने ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में 45 थारू परिवारों के आवासीय पट्टे किए थे। तब से लेकर आज तक यह सभी अपनी अपनी जमीनों पर काबिज हैं। नगरिया ग्रामपंचायत के अंतर्गत इन थारू परिवारों का गांव शारदा नदी के पार पड़ता है। इधर शासन ने 30 परिवारों को आवास योजना के तहत आवास आवंटित किए हैं। आवास निर्माण की पहली किश्त भी ग्रामीणों के खातों में भेज दी गई, लेकिन अब आशियाना बनाने में वन महकमा अड़ंगा लगा रहा है। गांव के पूर्व प्रधान फिरुआ राना व ग्राम पंचायत सदस्य राधे राना कहते हैं कि सरकार ने लग्गा भग्गा से हटाकर यहां बसने को 45 परिवारों को दो-दो डिसमिल के आवासीय पट्टे दिए थे। अब मकान बनाने को पैसा दिया तो वन विभाग भूमि को अपनी भूमि बताकर रोड़ा अटका रहे हैं। आखिर वह लोग जाएं तो कहां जाए। अब इन थारू परिवारों ने डीएम को पत्र भेजकर वन विभाग द्वारा किया जा रहा उत्पीड़न रोकने व राजस्व भूमि पर आवास बनने की स्वीकृति दिलाने की मांग की है।
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ढकिया ता. महाराजपुर के थारू परिवारों की व्यथा
तराई क्षेत्र में राजस्व व वन विभाग के बीच तालमेल न होने का खामियाजा क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बनता जा रहा है। अब तराई के थारू जनजाति के परिवारों का ही मामला देखे तो करीब डेढ़ दशक पूर्व राजस्व विभाग ने 45 थारू परिवारों के ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में आवासीय पट्टे किए थे। तबसे यह सभी परिवार इसी गांव रहते आ रहे हैं। इधर शासन ने इनमेें से 30 परिवार को छत मुहैय्या कराने आवास आवंटित किए तो वन विभाग आवास बनाने में रोड़ा बन रहा है।
वर्ष 1995 में थारू जनजनति के परिवारों को हटाकर कटकवारा व ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में बसाया गया था। उस दौरान राजस्व प्रशासन ने ढकिया ताल्लुके महाराजपुर में 45 थारू परिवारों के आवासीय पट्टे किए थे। तब से लेकर आज तक यह सभी अपनी अपनी जमीनों पर काबिज हैं। नगरिया ग्रामपंचायत के अंतर्गत इन थारू परिवारों का गांव शारदा नदी के पार पड़ता है। इधर शासन ने 30 परिवारों को आवास योजना के तहत आवास आवंटित किए हैं। आवास निर्माण की पहली किश्त भी ग्रामीणों के खातों में भेज दी गई, लेकिन अब आशियाना बनाने में वन महकमा अड़ंगा लगा रहा है। गांव के पूर्व प्रधान फिरुआ राना व ग्राम पंचायत सदस्य राधे राना कहते हैं कि सरकार ने लग्गा भग्गा से हटाकर यहां बसने को 45 परिवारों को दो-दो डिसमिल के आवासीय पट्टे दिए थे। अब मकान बनाने को पैसा दिया तो वन विभाग भूमि को अपनी भूमि बताकर रोड़ा अटका रहे हैं। आखिर वह लोग जाएं तो कहां जाए। अब इन थारू परिवारों ने डीएम को पत्र भेजकर वन विभाग द्वारा किया जा रहा उत्पीड़न रोकने व राजस्व भूमि पर आवास बनने की स्वीकृति दिलाने की मांग की है।
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