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संभल कर चलें.. माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग पर गड्ढे बहुत हैं
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कलीनगर। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पर्यटन को लेकर जनपद की पहचान पूरे देश में लगातार बढ़ रही है लेकिन लापरवाही ही कही जाएगी कि पर्यटन स्थल पहुंचने के लिए सैलानियों को जिस माधोटांडा पीलीभीत मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है, वह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गया है। 32 किलोमीटर लंबे मार्ग का हाल बुरा होने के चलते आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आए दिन दुर्घटनाएं होने से लोग चोटिल हो रहे हैं।
कलीनगर तहसील क्षेत्र की तराई समेत अन्य गांवों की जनता को माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग से ही जिला मुख्यालय से जोड़ा गया है। बीमार होने की स्थिति हो या अन्य समस्याओं के साथ बेहतर खरीदारी के लिए लोग इस मार्ग से पीलीभीत मुख्यालय पहुंचते हैं। इस सड़क की दुर्दशा को देखते हुए छह साल पूर्व 32 करोड़ की लागत से मार्ग का चौड़ीकरण कर निर्माण कराया गया था। लोक निर्माण विभाग को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निर्माण के कुछ समय बाद ही मार्ग की स्थिति खराब होने लगी थी।
हर बार पैचवर्क कर इसकी हकीकत छुपाई जाती रही, जो कुछ ही दिन में फिर सामने आ गई। फिलाहाल हालत ये हैं कि मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील होने गया। 32 करोड़ की लागत से बना मार्ग छह साल नहीं टिक सका। कलीनगर पुल से पीलीभीत की ओर बढ़ते ही गहरे गड्ढों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर तो रास्ता पूरी तरह उधड़ गया है। खस्ताहाल स्थिति के चलते आए दिन बाइक सवार चोटिल हो रहे हैं। इसके अचानक गहरे गड्ढों आ जाने से वाहन भी खराब हो रहे हैं। मार्ग पर अधिक बुरा हाल जंगल क्षेत्र में हैं। सिद्धबाबा स्थल से जंगल खत्म होने तक मार्ग की स्थिति काफी बदतर है। नतीजतन आए दिन हादसे भी हो रहे हैं।
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रोजाना गुजरते है मुख्यालय के अफसर -माधोटांडा पीलीभीत मार्ग से आए दिन जिला मुख्यालय के अफसर गुजरते हैं। कलीनगर, पूरनपुर तहसील दिवस से लेकर अन्य निरीक्षण के लिए भी जिले के आला अफसर इस मार्ग से होकर ही गुजरते हैं, लेकिन मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पर्यटन सत्र के दौरान आने वाले सैलानी भी इस मार्ग से होकर ही मुस्तफाबाद और चूका बीच के लिए जाते हैं।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र की तराई समेत अन्य गांवों की जनता को माधोटांडा-पीलीभीत मार्ग से ही जिला मुख्यालय से जोड़ा गया है। बीमार होने की स्थिति हो या अन्य समस्याओं के साथ बेहतर खरीदारी के लिए लोग इस मार्ग से पीलीभीत मुख्यालय पहुंचते हैं। इस सड़क की दुर्दशा को देखते हुए छह साल पूर्व 32 करोड़ की लागत से मार्ग का चौड़ीकरण कर निर्माण कराया गया था। लोक निर्माण विभाग को कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निर्माण के कुछ समय बाद ही मार्ग की स्थिति खराब होने लगी थी।
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हर बार पैचवर्क कर इसकी हकीकत छुपाई जाती रही, जो कुछ ही दिन में फिर सामने आ गई। फिलाहाल हालत ये हैं कि मार्ग गहरे गड्ढों में तब्दील होने गया। 32 करोड़ की लागत से बना मार्ग छह साल नहीं टिक सका। कलीनगर पुल से पीलीभीत की ओर बढ़ते ही गहरे गड्ढों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर तो रास्ता पूरी तरह उधड़ गया है। खस्ताहाल स्थिति के चलते आए दिन बाइक सवार चोटिल हो रहे हैं। इसके अचानक गहरे गड्ढों आ जाने से वाहन भी खराब हो रहे हैं। मार्ग पर अधिक बुरा हाल जंगल क्षेत्र में हैं। सिद्धबाबा स्थल से जंगल खत्म होने तक मार्ग की स्थिति काफी बदतर है। नतीजतन आए दिन हादसे भी हो रहे हैं।
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रोजाना गुजरते है मुख्यालय के अफसर -माधोटांडा पीलीभीत मार्ग से आए दिन जिला मुख्यालय के अफसर गुजरते हैं। कलीनगर, पूरनपुर तहसील दिवस से लेकर अन्य निरीक्षण के लिए भी जिले के आला अफसर इस मार्ग से होकर ही गुजरते हैं, लेकिन मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही पर्यटन सत्र के दौरान आने वाले सैलानी भी इस मार्ग से होकर ही मुस्तफाबाद और चूका बीच के लिए जाते हैं।