{"_id":"621d198648c73b1cae582a6e","slug":"waiting-for-air-tickets-now-food-and-water-crisis-in-front-of-students-pilibhit-news-bly4769045153","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवाई टिकट का इंतजार, छात्रों के सामने अब खाने और पानी का भी संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवाई टिकट का इंतजार, छात्रों के सामने अब खाने और पानी का भी संकट
विज्ञापन
पीलीभीत। यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों की मुसीबत अब भी कम नहीं हो पाई हैं। कुछ छात्र रोमानिया पहुंच गए हैं मगर उनको हवाई टिकट का इंतजार है। वहीं कई छात्र अब भी यूक्रेन में ही फंसे हैं। अब उनके सामने खाने और पानी का भी संकट खड़ा हो गया है। मझोला के सार्थक के परिवार वालों से सोमवार को नायब तहसीलदार मिलने पहुंचे। रोमानिया पहुंच चुके सार्थक से भी फोन पर बातचीत की।
वहीं भारतीय किसान यूनियन की तरफ से प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन सौंपकर यूक्रेन में फंसे छात्रों को सही सलामत जल्द देश लाने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन( टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस दौरान जिलाध्यक्ष स्वराज सिंह, मंजीत सिंह जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दिनेश कुमार जिला महामन्त्री,जिला उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
रोमानिया पहुंचा सार्थक, भारत लौटने का इंतजार - मझोला निवासी सार्थक यूक्रेन से निकलकर रोमानिया तो पहुंच गया है। अब उसे टिकट का इंतजार है। सोमवार शाम तक उसका टिकट नहीं हो पाया था। घर वालों को उसने बताया कि रात तक टिकट फाइनल हो सकता है। वहीं सार्थक को लेकर घर वाले चिंतित हैं।
विज्ञापन
एक टाइम का मिल पा रहा है खाना - हजारा क्षेत्र के हर्षित शुक्ला अभी खारकीव में ही फंसे हैं। हर्षित के पिता प्रदीप शुक्ला ने बताया कि बेटे को मात्र एक ही टाइम खाना मिल पा रहा है। पानी का संकट होने पर बच्चे वहां परेशान है। खारकीव में फंसे बच्चे नहीं निकल पा रहे है। सरकार शीघ्र हस्तक्षेप करें। ताकि उसका पुत्र किसी तरह से घर आ सके। हर्षित ने यूक्रेन सीमा पर भारत के छात्रों की यूकेनियन सेना की ओर से की जा रही पिटाई का वीडियो अपने पिता को भेजा है।
तीन दिन से संपर्क न होने पर बेटे के बारे में पूछने पर रोने लगती है मां - गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ यूक्रेन में फंसे है। बलजीत के फुफेरे भाई मनवीर ने बताया कि तीन दिन से बलजीत का मोबाइल नहीं मिल रहा है। पुत्र के बारे में पूछने पर बलजीत की मां रोने लगती है।
सायरन बजने पर मच जाती है भगदड़ - मोहल्ला साहूकारा निवासी राइस मिलर अजीम खां पुत्र से वहां का हाल सुनने के बाद उदास हो जाते है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में खाना और पानी का संकट होने लगा है। बच्चों को भरपेट पानी भी पीने को नहीं मिल पा रहा है। कुछ देर के लिए ही अब बंकर से बाहर निकलने दिया जाता है। सायरन बजते ही बंकर में घुसने को भगदड़ मच जाती है।
विज्ञापन
वहीं भारतीय किसान यूनियन की तरफ से प्रशासनिक अफसरों को ज्ञापन सौंपकर यूक्रेन में फंसे छात्रों को सही सलामत जल्द देश लाने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन( टिकैत) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। इस दौरान जिलाध्यक्ष स्वराज सिंह, मंजीत सिंह जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, दिनेश कुमार जिला महामन्त्री,जिला उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
रोमानिया पहुंचा सार्थक, भारत लौटने का इंतजार - मझोला निवासी सार्थक यूक्रेन से निकलकर रोमानिया तो पहुंच गया है। अब उसे टिकट का इंतजार है। सोमवार शाम तक उसका टिकट नहीं हो पाया था। घर वालों को उसने बताया कि रात तक टिकट फाइनल हो सकता है। वहीं सार्थक को लेकर घर वाले चिंतित हैं।
विज्ञापन
एक टाइम का मिल पा रहा है खाना - हजारा क्षेत्र के हर्षित शुक्ला अभी खारकीव में ही फंसे हैं। हर्षित के पिता प्रदीप शुक्ला ने बताया कि बेटे को मात्र एक ही टाइम खाना मिल पा रहा है। पानी का संकट होने पर बच्चे वहां परेशान है। खारकीव में फंसे बच्चे नहीं निकल पा रहे है। सरकार शीघ्र हस्तक्षेप करें। ताकि उसका पुत्र किसी तरह से घर आ सके। हर्षित ने यूक्रेन सीमा पर भारत के छात्रों की यूकेनियन सेना की ओर से की जा रही पिटाई का वीडियो अपने पिता को भेजा है।
तीन दिन से संपर्क न होने पर बेटे के बारे में पूछने पर रोने लगती है मां - गांव भोपतपुर निवासी बलजीत सिंह अपनी पत्नी मनदीप कौर के साथ यूक्रेन में फंसे है। बलजीत के फुफेरे भाई मनवीर ने बताया कि तीन दिन से बलजीत का मोबाइल नहीं मिल रहा है। पुत्र के बारे में पूछने पर बलजीत की मां रोने लगती है।
सायरन बजने पर मच जाती है भगदड़ - मोहल्ला साहूकारा निवासी राइस मिलर अजीम खां पुत्र से वहां का हाल सुनने के बाद उदास हो जाते है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन में खाना और पानी का संकट होने लगा है। बच्चों को भरपेट पानी भी पीने को नहीं मिल पा रहा है। कुछ देर के लिए ही अब बंकर से बाहर निकलने दिया जाता है। सायरन बजते ही बंकर में घुसने को भगदड़ मच जाती है।