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Pilibhit News: आर्थिक तंगी और टूटते परिवारों के दर्द से सहमे हैं ग्रामीण

Sat, 09 May 2026 01:05 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 01:05 AM IST
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Villagers are suffering from financial hardship and the pain of broken families.
पीलीभीत। नेपाल सीमा से सटे छोटे से गांव बूंदी भूड़ में शराब की दुकानों के विरोध में महिलाओं का गुस्सा अचानक नहीं फूटा था। इसके पीछे वर्षों से घरों में पल रही पीड़ा, टूटते रिश्ते, आर्थिक तंगी और शराब की वजह से बिखरते परिवारों की लंबी कहानी जुड़ी है।
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गांव में दो सरकारी शराब की दुकानें खुलने की सूचना मिलते ही महिलाओं ने डंडे उठाकर विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि शराब ने पहले ही कई घरों की खुशियां छीन ली हैं। ऐसे में गांव में दुकान खुलने से हालात और बिगड़ जाएंगे। करीब 2200 की आबादी वाले इस सीमावर्ती गांव में पहले से ही शराब बड़ी सामाजिक समस्या बनी हुई है। नेपाल सीमा नजदीक होने के कारण गांव के पुरुष आसानी से सीमा पार जाकर सस्ती शराब पी आते हैं। शाम ढलते ही कई घरों में कलह शुरू हो जाती है। महिलाओं का आरोप है कि शराब की वजह से घरों की जमा पूंजी बर्बाद हो रही है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। घरेलू हिंसा तक की नौबत आ जाती है।
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महिलाओं को सबसे बड़ा डर यही था कि जब पुरुष बाहर जाकर शराब पीने से नहीं रुक पा रहे, तो गांव में ही दुकान खुल जाने के बाद स्थिति और खराब हो जाएगी। शराब की आसान उपलब्धता से नशाखोरी बढ़ेगी, परिवारों की आर्थिक हालत और बिगड़ेगी। गांव का माहौल खराब होगा। इसी डर ने महिलाओं को आंदोलन की अगुवाई करने पर मजबूर कर दिया। घटना के बाद आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन ने जब गांव की स्थिति और महिलाओं के विरोध की वजहों की पड़ताल की तो ये एक अहम सच सामने आया।
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नेपाल सीमा से लगे गांवों में सस्ती शराब की उपलब्धता लंबे समय से सामाजिक संकट बनी हुई है। बूंदी भूड़ की घटना ने यह साफ कर दिया है कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि परिवारों के टूटते सामाजिक ढांचे और महिलाओं की पीड़ा से जुड़ा बड़ा मुद्दा भी है।
गांव की महिलाओं का कहना है कि उनका विरोध किसी राजनीति या प्रदर्शन के लिए नहीं था, बल्कि अपने घरों और आने वाली पीढ़ी को बचाने की लड़ाई थी। संवाद
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