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दो मौजूदा, दो पूर्व मंत्रियों के भाग्य का फैसला आज
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Fri, 10 Mar 2017 10:36 PM IST
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शनिवार सुबह मतगणना शुरू होने के साथ-विधान सभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर भी साफ होने लगेगी। पीलीभीत और बरखेड़ा विधान सभा सीट पर क्रमश: एक निवर्तमान कैबिनेटमंत्री और एक राज्यमंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है वहीं बीसलपुर विधान सभा सीट पर दो पूर्व मंत्रियों की किस्मत का फैसला भी मतगणना परिणाम से होगा। जिले की चौथी पूरनपुर (सुरक्षित) सीट पर हालांकि कोई मंत्री अथवा पूर्व मंत्री चुनाव मैदान में नहीं है, लेकिन यहां भाजपा उम्मीदवार बाबूराम पासवान केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की पसंद के उम्मीदवार हैं, इस लिए भाजपा प्रत्याशी के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की प्रतिष्ठा भी अप्रत्यक्ष रूप से यहां दांव पर लगी हुई है।
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कैबिनेट मंत्री रियाज अहमद की प्रतिष्ठा दांव पर
पीलीभीत सदर सीट से सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रियाज अहमद की प्रतिष्ठा इस बार दांव में लगी है। 2002 से 2012 तक लगातार वह सपा टिकट पर चुनाव जीतते रहे हैं। इससे पहले भी वह 1983 में संजय मंच और 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ जीत चुके हैं। 2012 के विधान सभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में रियाज अहमद के निकटतम प्रतिद्दंदी रहे पूर्व ब्लाक प्रमुख संजय गंगवार से इस बार भी उनकी कड़ी टक्कर होने की संभावना है। पूर्व विधायक अरशद खां के बसपा प्रत्याशी के रूप में यहां चुनाव मैदान में जाने का नुकसान भी हाजी रियाज अहमद को उठाना पड़ सकता है।
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राज्यमंत्री हेमराज की राह भी आसान नहीं
राज्यमंत्री हेमराज की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। वह जिले की बरखेड़ा विधान सभा सीट से 2012 में सपा टिकट पर चुनाव जीते थे। अखिलेश के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है और अखिलेश सरकार में वह राज्यमंत्री हैं। इस विधान सभा सीट पर हालांकि भाजपा प्रत्याशी केएल राजपूत पहली बार चुनाव लड़े, लेकिन अमित शाह, योगी आदित्यनाथ की सभा के बाद यहां के बदले राजनीतिक समीकरण और बसपा प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र गंगवार की हर वर्ग में की गई सेंधमारी हेमराज की दिक्कत बढ़ा सकते हैं।
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दो पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
बीसलपुर विधान सभा सीट पर कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू और निवर्तमान भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री रामसरन की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कांग्रेस उम्मीदवार अनीस अहमद तीन बार विधायक चुने जाने के साथ बसपा शासन में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। रामसरन भी यहां से तीन बार विधायक और भाजपा सरकार में एक बार मंत्री रह चुके हैं। बसपा प्रत्याशी दिव्या गंगवार भी यहां मैदान में हैं।
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पीतमराम की प्रतिष्ठा भी दांव पर
पूरनपुर (सुरक्षित) विधान सभा सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमा रहे निवर्तमान विधायक पीतमराम जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र के ससुर भी हैं। यहां उन्हें मेनका गांधी की पसंद के भाजपा उम्मीदवार बाबूराम पासवान ने कड़ी टक्कर दी है। सेवा निवृत इंजीनियर केके अरविंद भी यहां बसपा टिकट पर किस्मत आजमाई है।
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किसी ने मन्नत मांगी कोई टेक चुका माथा
कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद दो दिन पहले ही कलियर शरीफ जाकर वहां अपनी जीत के लिए चादरपोशी कर चुके हैं और मन्नत मांग चुके हैं। शहर सीट से भाजपा प्रत्याश संजय गंगवार भी काशी में भोलेबाबा के दर्शन कर जीत के लिए मनौती मांग चुके हैं। अन्य अधिकांश प्रत्याशी भी अपनी-अपनी जीत के लिए कुछ न कुछ कर रहे हैं।
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कैबिनेट मंत्री रियाज अहमद की प्रतिष्ठा दांव पर
पीलीभीत सदर सीट से सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रियाज अहमद की प्रतिष्ठा इस बार दांव में लगी है। 2002 से 2012 तक लगातार वह सपा टिकट पर चुनाव जीतते रहे हैं। इससे पहले भी वह 1983 में संजय मंच और 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ जीत चुके हैं। 2012 के विधान सभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में रियाज अहमद के निकटतम प्रतिद्दंदी रहे पूर्व ब्लाक प्रमुख संजय गंगवार से इस बार भी उनकी कड़ी टक्कर होने की संभावना है। पूर्व विधायक अरशद खां के बसपा प्रत्याशी के रूप में यहां चुनाव मैदान में जाने का नुकसान भी हाजी रियाज अहमद को उठाना पड़ सकता है।
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राज्यमंत्री हेमराज की राह भी आसान नहीं
राज्यमंत्री हेमराज की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। वह जिले की बरखेड़ा विधान सभा सीट से 2012 में सपा टिकट पर चुनाव जीते थे। अखिलेश के करीबी नेताओं में उनकी गिनती होती है और अखिलेश सरकार में वह राज्यमंत्री हैं। इस विधान सभा सीट पर हालांकि भाजपा प्रत्याशी केएल राजपूत पहली बार चुनाव लड़े, लेकिन अमित शाह, योगी आदित्यनाथ की सभा के बाद यहां के बदले राजनीतिक समीकरण और बसपा प्रत्याशी डॉ. शैलेंद्र गंगवार की हर वर्ग में की गई सेंधमारी हेमराज की दिक्कत बढ़ा सकते हैं।
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दो पूर्व मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर
बीसलपुर विधान सभा सीट पर कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू और निवर्तमान भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री रामसरन की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कांग्रेस उम्मीदवार अनीस अहमद तीन बार विधायक चुने जाने के साथ बसपा शासन में दो बार मंत्री भी रह चुके हैं। रामसरन भी यहां से तीन बार विधायक और भाजपा सरकार में एक बार मंत्री रह चुके हैं। बसपा प्रत्याशी दिव्या गंगवार भी यहां मैदान में हैं।
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पीतमराम की प्रतिष्ठा भी दांव पर
पूरनपुर (सुरक्षित) विधान सभा सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमा रहे निवर्तमान विधायक पीतमराम जिला पंचायत अध्यक्ष आरती महेंद्र के ससुर भी हैं। यहां उन्हें मेनका गांधी की पसंद के भाजपा उम्मीदवार बाबूराम पासवान ने कड़ी टक्कर दी है। सेवा निवृत इंजीनियर केके अरविंद भी यहां बसपा टिकट पर किस्मत आजमाई है।
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किसी ने मन्नत मांगी कोई टेक चुका माथा
कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद दो दिन पहले ही कलियर शरीफ जाकर वहां अपनी जीत के लिए चादरपोशी कर चुके हैं और मन्नत मांग चुके हैं। शहर सीट से भाजपा प्रत्याश संजय गंगवार भी काशी में भोलेबाबा के दर्शन कर जीत के लिए मनौती मांग चुके हैं। अन्य अधिकांश प्रत्याशी भी अपनी-अपनी जीत के लिए कुछ न कुछ कर रहे हैं।