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ढाई दशक से ठप है घंटाघर की घड़ी
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Sun, 26 Feb 2017 10:14 PM IST
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पीलीभीत। शहर में ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति नगरपालिका व प्रशासन संजीदा होता नहीं दिख रहा है। ब्रिटिशकाल में बने ऐतिहासिक घंटाघर को ही लें तो करीब ढाई दशक से ठप यहां की घड़ी के जीर्णोद्धार के लिए साल भर पहले शुरू हुई कवायद के बाद भी सफलता नहीं मिली। पालिका प्रशासन द्वारा गत वर्ष इसको लेकर बरेली की एक फर्म को ठेका दिया गया था, लेकिन रंगाई पुताई के बाद काम रोक दिया गया।
शहर में ब्रिटिश काल के दौरान कई संपत्तियों का निर्माण कराया गया था। इसमें से एक घंटाघर भी है। बुजुर्गों के मुताबिक घंटाघर पर लगी घड़ी की आवाज से ही शहरवासी उठते थे। ढाई दशक पूर्व यह घड़ी खराब हो गई। करीब दस वर्ष पूर्व इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन कुछ मिनट चलने के बाद यह पुन: ठप हो गई। इधर अनदेखी के चलते घंटाघर पर लगी घड़ी की मशीन भी चोरी हो गई और आसपास के दुकानदारों ने उसमें सामान रखना शुरू कर दिया। ऐतिहासिक धरोहरों को नेस्तनाबूंद होते देख शहरवासियों ने घंटाघर आदि की मरम्मत कराने की कई बार मांग उठाई। इस पर नगर पालिका चेयरमैन प्रभात जायसवाल ने घड़ी को पुन: चालू करने का बीड़ा उठाया। पालिका प्रशासन द्वारा करीब साढ़े तीन लाख रुपये का स्टीमेट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दिया। इसके बाद बरेली की एक फर्म को ठेका दिया गया। उस दौरान पालिका प्रशासन ने जर्जर होते जा रहे घंटाघर को खुलवाकर साफ सफाई कराने के साथ रंगाई पुताई भी कराई। ठेकेदार ने भी घंटाघर की घड़ी को जल्द शुरू करने की बात कही, लेकिन ठेकेदार गायब हो गया। इस बीच पालिका प्रशासन ने ठेकेदार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। पालिका प्रशासन ने ठेकेदार को पत्र जारी कर तत्काल घंटाघर की मशीन की फिटिंग कर उसे चालू करने की बात कही। जल्द कार्य पूरा न होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी। बताते हैं कि ठेकेदार ने परिवार के सदस्य के बीमार होने की बात कहते हुए कुछ दिनों की मोहलत मांगी है। फिलहाल मामला जो भी हो, लेकिन शहरवासी अपनी विरासत को एक बार फिर से जीता जागता देखने की उम्मीद लंबे अरसे से संजाए हुए हैं।
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घंटाघर के जीर्णोद्धार को लेकर एक फर्म को ठेका दिया गया था, लेकिन ठेकेदार के न आने से इसे अभी दुरुस्त नहीं कराया जा सका है। ठेकेदार को चेतावनी पत्र जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसे जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा।
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- प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगरपालिका
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शहर में ब्रिटिश काल के दौरान कई संपत्तियों का निर्माण कराया गया था। इसमें से एक घंटाघर भी है। बुजुर्गों के मुताबिक घंटाघर पर लगी घड़ी की आवाज से ही शहरवासी उठते थे। ढाई दशक पूर्व यह घड़ी खराब हो गई। करीब दस वर्ष पूर्व इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन कुछ मिनट चलने के बाद यह पुन: ठप हो गई। इधर अनदेखी के चलते घंटाघर पर लगी घड़ी की मशीन भी चोरी हो गई और आसपास के दुकानदारों ने उसमें सामान रखना शुरू कर दिया। ऐतिहासिक धरोहरों को नेस्तनाबूंद होते देख शहरवासियों ने घंटाघर आदि की मरम्मत कराने की कई बार मांग उठाई। इस पर नगर पालिका चेयरमैन प्रभात जायसवाल ने घड़ी को पुन: चालू करने का बीड़ा उठाया। पालिका प्रशासन द्वारा करीब साढ़े तीन लाख रुपये का स्टीमेट बनाकर जिला प्रशासन को भेज दिया। इसके बाद बरेली की एक फर्म को ठेका दिया गया। उस दौरान पालिका प्रशासन ने जर्जर होते जा रहे घंटाघर को खुलवाकर साफ सफाई कराने के साथ रंगाई पुताई भी कराई। ठेकेदार ने भी घंटाघर की घड़ी को जल्द शुरू करने की बात कही, लेकिन ठेकेदार गायब हो गया। इस बीच पालिका प्रशासन ने ठेकेदार से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। पालिका प्रशासन ने ठेकेदार को पत्र जारी कर तत्काल घंटाघर की मशीन की फिटिंग कर उसे चालू करने की बात कही। जल्द कार्य पूरा न होने पर एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी भी दी। बताते हैं कि ठेकेदार ने परिवार के सदस्य के बीमार होने की बात कहते हुए कुछ दिनों की मोहलत मांगी है। फिलहाल मामला जो भी हो, लेकिन शहरवासी अपनी विरासत को एक बार फिर से जीता जागता देखने की उम्मीद लंबे अरसे से संजाए हुए हैं।
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घंटाघर के जीर्णोद्धार को लेकर एक फर्म को ठेका दिया गया था, लेकिन ठेकेदार के न आने से इसे अभी दुरुस्त नहीं कराया जा सका है। ठेकेदार को चेतावनी पत्र जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसे जल्द ही दुरुस्त कराया जाएगा।
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- प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष, नगरपालिका