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बैंकों की हड़ताल : दो दिन में 400 करोड़ का लेन-देन प्रभावित
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पीलीभीत में बैंक के बाहर प्रदर्शन करते यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक के सदस्य। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों की चल रही हड़ताल शुक्रवार शाम को खत्म हो गई। हड़ताल के चलते दो दिन तक जिले की 160 ब्रांचों के बंद होने से करीब चार सौ करोड़ का लेन-देन प्रभावित रहा। दूसरे दिन भी बैंक कर्मी हड़ताल के दौरान नारेबाजी कर प्रदर्शन करते रहे। यूनियन नेताओं का कहना था कि निजी हाथों में बैंकों को नहीं जाने दिया जाएगा।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान पर दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह लोहा मंडी स्थित बैक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए। इसके बाद निजीकरण के विरोध में अधिकारी और कर्मचारियों ने विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। शहर में कई निजी बैंकों में पहुंचकर समर्थन करने को कहा। दो दिन की हड़ताल के चलते सभी बैंकों की 160 ब्रांचों में ताल लटक रहे। ग्राहकों को काफी दिक्कत हुई। व्यापारियों के कारोबार पर भी काफी प्रभाव पड़ा। हालांकि जरूरतमंदों एटीएम का सहारा लेकर काम चलाया। पिछले दो दिनों में साढ़े तीन से चार सौ करोड़ तक का लेन-देन ठप रहा। हड़ताली कर्मचारियों का कहना था कि किसी सूरत में बैंकों को निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगी। अगर बैंक निजी हाथों चली गई, तो कठपुतली बनकर रह जाएगी। इससे बैंक कर्मियों के अलावा जनता को भी काफी दिक्कत होती।
सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। अगर बैंकों को निजी हाथों में जाने दिया, तो कर्मचारियों के साथ आम जनमानस को भी दिक्कत होगी। यह निर्णय किसी के हित में साबित नहीं होगा।- शैलेंद्र गुप्ता, जिला संयोजक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक
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बैंकों को सरकार निजी हाथों में देना चाहती है। इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। कॉरपोरेट के हाथों में जाने के बाद बैंक खिलौना बनकर रह जाएगी। जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। - अशोक शर्मा, यूनियन नेता
निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मी पिछले दो दिन से हड़ताल पर है। इससे जिले की 160 ब्रांच बंद रहीं है। करोड़ों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है। - गौरव गुप्ता, एलडीएम
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान पर दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह लोहा मंडी स्थित बैक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा पर एकत्र हुए। इसके बाद निजीकरण के विरोध में अधिकारी और कर्मचारियों ने विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। शहर में कई निजी बैंकों में पहुंचकर समर्थन करने को कहा। दो दिन की हड़ताल के चलते सभी बैंकों की 160 ब्रांचों में ताल लटक रहे। ग्राहकों को काफी दिक्कत हुई। व्यापारियों के कारोबार पर भी काफी प्रभाव पड़ा। हालांकि जरूरतमंदों एटीएम का सहारा लेकर काम चलाया। पिछले दो दिनों में साढ़े तीन से चार सौ करोड़ तक का लेन-देन ठप रहा। हड़ताली कर्मचारियों का कहना था कि किसी सूरत में बैंकों को निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगी। अगर बैंक निजी हाथों चली गई, तो कठपुतली बनकर रह जाएगी। इससे बैंक कर्मियों के अलावा जनता को भी काफी दिक्कत होती।
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सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाहती है। अगर बैंकों को निजी हाथों में जाने दिया, तो कर्मचारियों के साथ आम जनमानस को भी दिक्कत होगी। यह निर्णय किसी के हित में साबित नहीं होगा।- शैलेंद्र गुप्ता, जिला संयोजक, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक
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बैंकों को सरकार निजी हाथों में देना चाहती है। इसका लगातार विरोध किया जा रहा है। कॉरपोरेट के हाथों में जाने के बाद बैंक खिलौना बनकर रह जाएगी। जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। - अशोक शर्मा, यूनियन नेता
निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मी पिछले दो दिन से हड़ताल पर है। इससे जिले की 160 ब्रांच बंद रहीं है। करोड़ों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है। - गौरव गुप्ता, एलडीएम