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बाघों पर कोरोना के बाद अब कैनाइन डिस्टेंपर का खतरा मंडराया
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पीलीभीत/ माधोटांडा। टाइगर रिजर्व के बाघों पर कोरोना के बाद अब कैनाइन डिस्टेंपर का खतरा मंडरा रहा है। सबसे ज्यादा खतरा उन 15 बाघों को है जो जंगल से बाहर बफर जोन या रिहायशी इलाकों में घूम रहे हैं। इस संबंध में शासन ने एक एडवाइजरी भी जारी की है। वहीं टाइगर रिजर्व प्रशासन का दावा है कि कहना है कि वह इस वायरल बीमारी को रोकने के लिए बफर जोन के कुत्तों का टीकाकरण कराया जा रहा है।
टाइगर रिजर्व के बाघों के लिए बफर जोन में रहने वाले कुत्ते भी अब खतरा बन गए हैं। इनसे फैलने वाली कैनाइन डिस्टेंपर वायरल बीमारी से बाघों की मौत भी हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 65 से अधिक बाघ हैं। इस संक्रामक बीमारी का फैलाव पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघों में सर्वाधिक हो सकता है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
इसकी वजह यह है कि मौजूदा समय में 15 से अधिक बाघ इन दिनों बफर जोन समेत रिहायशी इलाकों में घूम रहे हैं। चूंकि यह संक्रमण बाघों में कुत्तों से फैलता है। अधिकांश बाहर निकले बाघों के आसपास कुत्ते भी झुंड बनाकर घूमते देखे गए हैं। वहीं दूसरी ओर जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले किसान वन्यजीवों से अपनी कृषि फसलों को बचाने के लिए कुत्तों को पाल रहे हैं। बाघ कुत्तों को भी निवाला बनाते रहते हैं। ऐसी दशा में यह वायरल बीमारी कुत्ते के मांस के साथ बाघ के शरीर में प्रवेश कर संक्रमण फैला सकती है।
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बाघों की जान को खतरा देख शासन ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें टाइगर रिजर्व के बाघों समेत कुछ अन्य वन्यजीवों को कुत्तों में पाए जाने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से गंभीर खतरे की बात कही गई है। अब पीटीआर के वन अफसर जंगल से बाहर निकले बाघों को इस संक्रामक बीमारी से कैसे बचाएंगे। इसका जवाब तो टाइगर रिजर्व के अफसर ही दे सकते हैं। फिलहाल वन अफसरों का दावा है कि इसको लेकर बफर जोन के कुत्तों का टीकाकरण कराया जा रहा है।
यह होता है कैनाइन डिस्टेंपर
पीटीआर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार के मुताबिक, कैनाइन डिस्टेंपर एक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस कुत्तों में पाया जाता हैं। बाघों में संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं। बाघ यदि संक्रमित कुत्ते को खा लेे या बाघ द्वारा किए गए शिकार के बाद मांस को बाघ की गैरमौजूदगी में कुत्ते खा लेते हैं। इसके बाद जब बाघ उस मांस को खाता है तब कुत्तों का यह वायरस बाघों में पहुंच जाता है। इससे तेज बुखार, आंख में सूजन, श्वांस और भूख कम लगने लगती है। यह शरीर के विभिन्न अंगों जैसे श्वांस नली, रीढ़ और नर्वस सिस्टम को सुस्त कर देता है।
शासन स्तर से बाघों में फैलने वाले संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। इस बीमारी से बाघों व अन्य वन्यजीवों को बचाने के लिए पीटीआर के बफर जोन में पाए जाने वाले कुत्तों में टीकाकरण किया जा रहा है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए समय-समय पर जंगल सीमा से सटे इलाकों में वैक्सीनेशन प्रोग्राम भी चलाया जाता है। सभी रेंजों को अलर्ट रहने को निर्देशित किया जा चुका है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व
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टाइगर रिजर्व के बाघों के लिए बफर जोन में रहने वाले कुत्ते भी अब खतरा बन गए हैं। इनसे फैलने वाली कैनाइन डिस्टेंपर वायरल बीमारी से बाघों की मौत भी हो सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 65 से अधिक बाघ हैं। इस संक्रामक बीमारी का फैलाव पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघों में सर्वाधिक हो सकता है, ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।
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इसकी वजह यह है कि मौजूदा समय में 15 से अधिक बाघ इन दिनों बफर जोन समेत रिहायशी इलाकों में घूम रहे हैं। चूंकि यह संक्रमण बाघों में कुत्तों से फैलता है। अधिकांश बाहर निकले बाघों के आसपास कुत्ते भी झुंड बनाकर घूमते देखे गए हैं। वहीं दूसरी ओर जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले किसान वन्यजीवों से अपनी कृषि फसलों को बचाने के लिए कुत्तों को पाल रहे हैं। बाघ कुत्तों को भी निवाला बनाते रहते हैं। ऐसी दशा में यह वायरल बीमारी कुत्ते के मांस के साथ बाघ के शरीर में प्रवेश कर संक्रमण फैला सकती है।
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बाघों की जान को खतरा देख शासन ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें टाइगर रिजर्व के बाघों समेत कुछ अन्य वन्यजीवों को कुत्तों में पाए जाने वाले कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से गंभीर खतरे की बात कही गई है। अब पीटीआर के वन अफसर जंगल से बाहर निकले बाघों को इस संक्रामक बीमारी से कैसे बचाएंगे। इसका जवाब तो टाइगर रिजर्व के अफसर ही दे सकते हैं। फिलहाल वन अफसरों का दावा है कि इसको लेकर बफर जोन के कुत्तों का टीकाकरण कराया जा रहा है।
यह होता है कैनाइन डिस्टेंपर
पीटीआर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. दक्ष गंगवार के मुताबिक, कैनाइन डिस्टेंपर एक संक्रामक बीमारी है। यह वायरस कुत्तों में पाया जाता हैं। बाघों में संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं। बाघ यदि संक्रमित कुत्ते को खा लेे या बाघ द्वारा किए गए शिकार के बाद मांस को बाघ की गैरमौजूदगी में कुत्ते खा लेते हैं। इसके बाद जब बाघ उस मांस को खाता है तब कुत्तों का यह वायरस बाघों में पहुंच जाता है। इससे तेज बुखार, आंख में सूजन, श्वांस और भूख कम लगने लगती है। यह शरीर के विभिन्न अंगों जैसे श्वांस नली, रीढ़ और नर्वस सिस्टम को सुस्त कर देता है।
शासन स्तर से बाघों में फैलने वाले संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। इस बीमारी से बाघों व अन्य वन्यजीवों को बचाने के लिए पीटीआर के बफर जोन में पाए जाने वाले कुत्तों में टीकाकरण किया जा रहा है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए समय-समय पर जंगल सीमा से सटे इलाकों में वैक्सीनेशन प्रोग्राम भी चलाया जाता है। सभी रेंजों को अलर्ट रहने को निर्देशित किया जा चुका है। - नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व