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टाइगर रिजर्व केे तीन साल, जनता के जी का  जंजाल 

Thu, 08 Jun 2017 11:27 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
ब्यूरो /पीलीभीत Updated Thu, 08 Jun 2017 11:27 PM IST
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Three years of Tiger Reserve, public junkery
टाइगर रिजर्व केे तीन साल, जनता के जी का जंजाल
नौ जून यानी आज टाइगर रिजर्व की स्थापना के तीन साल पूरे हो रहे हैं। पर्यटन और पर्यावरण की दृष्टि से ही टाइगर रिजर्व अच्छा माना जा रहा हो लेकिन जंगल किनारे बसे लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। पिछले छह माह में 12 लोग बाघ, तेंदुए के शिकार बन चुके हैं जबकि लगभग इतने ही हमलों में घायल हुए हैं। खेत किनारे एवं गांव में घुसकर बाघ व तेंदुए आए दिन पालतू मवेशियों को निवाला बना लेते है। नौ मई को जंगल में बुझाने गए वाचर ताराचंद्र को बाघिन ने मार कर खा लिया था। उसके अवशेष के रूप में पैर और तीन दिन बाद सिर मिला था। इससे पूर्व भी अक्तूबर 2016 से अब तक 12 लोग बाघ का शिकार बन चुके हैं। इससे पूर्व इसी जंगल में लकड़ी बीनने आई महिला पर लीलावती को बाघ ने मारा डाला था। इसके कुछ माह बाद मरौरी में जंगल किनारे खेत पर सिंचाई करने गए छात्र अनुज को मार डाला था। महिला से पूर्व भी मरौरी निवासी धर्मपाल पर बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया था। पूर्व में एक ही बाघ की तीन घटनाओं के बाद ताराचंद के शिकार के रूप में यह चौथी घटना है। अकेले अप्रैल माह में बाघ, तेंदुआ और भालू के हमले की एक दर्जन घटनाएं हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए और जबकि कई पालतू पशु इनका निवाला बने। 31 मार्च को माधोटांडा मार्ग पर माला जंगल में बाघ ने जमुनिया के बुजुर्ग को मार डाला था। अगले ही दिन पहली अप्रैल को न्यूरिया क्षेत्र में भालू ने हमला बसंतापुर निवासी रामसिंह को घायल कर दिया था। तीन अप्रैल को भीकपुर निवासी मंजीत सिंह में घुसकर तेंदुए ने गाय को मार दिया था। जबकि छह अप्रैल को माला कॉलोनी में तेंदुए घुस आया था। 10 अप्रैल अमरिया क्षेत्र में बाइक से आते समय दुगाईलाल और बुद्धसेन पर बाघ ने हमला कर घायल कर दिया था। इस बीच सामने से कार आ जाने के चलते बाघ उन्हें छोड़ गया। 11 अप्रैल को एक बार फिर मॉला कॉलोनी में तेंदुए ने सुनील कुमार पर हमला कर घायल कर दिया। अप्रैल के बाद मई में भी लगातार घटनाएं सामने आई हैं। जंगल और इसके बाहर लगातार हो रही घटनाओं से लोगों आक्रोश और दहशत दोनों बढ़ रहा है। यदि समय रहते वन विभाग ने इन घटनाओं पर अकुंश लगाने को प्रभावी कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में वन्यजीवों के हमले जिले सुख शांति एवं कानून व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
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