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Pilibhit News: फिजियोथेरेपिस्ट नहीं, बाहर इलाज करा रहे मरीज
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पीलीभीत के जिला चिकित्सालय परिसर स्थित ट्रॉमा सेंटर।संवाद
पीलीभीत। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद भी जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ है। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को अब तक बहुप्रतीक्षित फिजियोथेरेपी की सुविधा भी नहीं मिल सकी है। इसकी वजह है यहां फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती न होना। मरीजों को निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में संबंद्ध होने के बाद यहां की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना करीब 1500 नए मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के दावों के बीच आज भी यहां अव्यवस्थाएं हावी हैं। जिला अस्पताल के आर्थोपैडिक कक्ष में रोजाना करीब 40-50 विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज पहुंचते हैं।
अधिकांश मरीजों को फिजियोथेरेपी की जरूरत होती है। चिकित्सक भी फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। मगर अस्पताल में फिजियोथेरेपी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आर्थोपैडिक कक्ष में बैठने वाले चिकित्सक मरीजों को व्यायाम करने या फिर बाहर से फिजियोथेरेपी कराने को कहते हैं।
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बुजुर्गाें को होती है सबसे ज्यादा परेशानी
उपचार को पहुंचने वाले अधिकांश मरीज 50 वर्ष से ऊपर के होते हैं। जोड़ों का दर्द, नसों का दर्द सहित अन्य परेशानियां होती हैं। इन मरीजों को अगर सही समय से फिजियोथेरेपी मिल जाए तो उनकी समस्या का आसानी से समाधान हो सकता है।
निजी केंद्रों पर वसूले जाते हैं मनमाने रुपये
शहर में संचालित निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों पर मरीजों का जमकर शोषण होता है। दोगुने रुपये लेने के बाद भी महीनों उपचार किया जाता है। एक दिन की थेरेपी के 200 या इससे अधिक रुपये लिए जाते हैं। मनमाना शुल्क वसूलने के बाद सही से इलाज नहीं किया जाता।
पैरामेडिकल स्टाफ के लिए काम किया जा रहा है। जल्द ही पैरामेडिकल का स्टाफ उपलब्ध होने के बाद यहां मशीनें मंगवाकर लोगों को उपचार दिया जाना लगेगा।- डॉ. संगीता अनेजा, मेडिकल प्राचार्य
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जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में संबंद्ध होने के बाद यहां की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रोजाना करीब 1500 नए मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। मरीजों को बेहतर सुविधा मुहैया कराने के दावों के बीच आज भी यहां अव्यवस्थाएं हावी हैं। जिला अस्पताल के आर्थोपैडिक कक्ष में रोजाना करीब 40-50 विभिन्न बीमारियों से ग्रसित मरीज पहुंचते हैं।
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अधिकांश मरीजों को फिजियोथेरेपी की जरूरत होती है। चिकित्सक भी फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। मगर अस्पताल में फिजियोथेरेपी की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में आर्थोपैडिक कक्ष में बैठने वाले चिकित्सक मरीजों को व्यायाम करने या फिर बाहर से फिजियोथेरेपी कराने को कहते हैं।
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बुजुर्गाें को होती है सबसे ज्यादा परेशानी
उपचार को पहुंचने वाले अधिकांश मरीज 50 वर्ष से ऊपर के होते हैं। जोड़ों का दर्द, नसों का दर्द सहित अन्य परेशानियां होती हैं। इन मरीजों को अगर सही समय से फिजियोथेरेपी मिल जाए तो उनकी समस्या का आसानी से समाधान हो सकता है।
निजी केंद्रों पर वसूले जाते हैं मनमाने रुपये
शहर में संचालित निजी फिजियोथेरेपी केंद्रों पर मरीजों का जमकर शोषण होता है। दोगुने रुपये लेने के बाद भी महीनों उपचार किया जाता है। एक दिन की थेरेपी के 200 या इससे अधिक रुपये लिए जाते हैं। मनमाना शुल्क वसूलने के बाद सही से इलाज नहीं किया जाता।
पैरामेडिकल स्टाफ के लिए काम किया जा रहा है। जल्द ही पैरामेडिकल का स्टाफ उपलब्ध होने के बाद यहां मशीनें मंगवाकर लोगों को उपचार दिया जाना लगेगा।- डॉ. संगीता अनेजा, मेडिकल प्राचार्य

पीलीभीत के जिला चिकित्सालय परिसर स्थित ट्रॉमा सेंटर।संवाद